13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मोतियों में बदला मारीच शरीर जहां गिरा वह है मॉरीशस

मॉरीशस में स्थापित किया गया है रामायण सेंटर रामायण से जुड़े हैं मॉरीशस की पहचान के किस्सेभारत की ही तरह वहां भी हिंदी भाषा का होता प्रयोग

2 min read
Google source verification
ramayan centar in Mauritius

मोतियों में बदला मारीच शरीर जहां गिरा वह है मॉरीशस

कानपुर। मॉरीशस के किस्से रामायण की कहानी से जुड़े हैं। एक लेख के अनुसार मॉरीशस के जन्म की धार्मिक कथा में बताया गया है कि जब प्रभु राम ने मारीच का वध किया तो उसका शरीर मोतियों में बदल गया। ये मोदी दक्षिण दिशा में फेंक दिए गए थे। जहां पर ये मोती गिरे थे वह देश आज मॉरीशस के नाम से जाना जाता है। यह बात मॉरीशस में रामायण विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी के दौरान बताई गई।

श्रीराम हैं मॉरीशस के लोगों की पे्ररणा
वीएसएसडी कॉलेज में मॉरीशस में रामायण विषय पर हुई संगोष्ठी में अंतरराष्ट्रीय रामायण केंद्र, मॉरीशस के अध्यक्ष व वरिष्ठ साहित्यकार पं. राजेंद्र अरुण ने कहा कि मॉरीशस में रामायण को श्रद्धा का ग्रंथ और भगवान राम को प्रेरक पुरुष माना जाता है। भगवान राम ने जिस तरह 14 वर्ष का वनवास काटा था और उसी तरह हर व्यक्ति सोचता है कि अभी कष्ट है, जल्द खुशहाली आएगी। पंडित राजेंद्र अरुण ने कहा कि, भारत से ज्यादा मॉरीशस में रामायण का महत्व है। वहां मांगलिक ही नहीं, कर्मकांड में भी रामायण का पाठ होता है।

हर चीज में होता रामायण का पाठ
आयोजित संगोष्ठी मॉरीशस में रामायण का शुभारंभ मुख्य अतिथि मॉरीशस रामायण केंद्र के अध्यक्ष पं. राजेंद्र अरुण ने किया। उन्होंने कहा, बहुत पहले मजदूर अपने साथ रामायण लेकर मॉरीशस गए थे। तब से वहां हर चीज में रामायण का पाठ किया जाता है। हनुमान शब्द पर कुछ दिन पहले हुए हंगामे पर उन्होंने कहा कि हनुमान संस्कृत शब्द हनुमत से बना है, जिस तरह भगवान संस्कृत शब्द भगवत से बना है। सिर्फ मान शब्द का कोई अर्थ नहीं है। एक हिंदू प्रधानमंत्री होने के चलते यहां हर धार्मिक कार्य में मंत्रोच्चार सिर्फ हिंदी में होता है।

रामायण की कथा से जुड़ी है पहचान
आईक्यूएसी की निदेशक व ऋतंभरा पत्रिका की संपादक डॉ. नीरू टंडन ने एक लेखक के हवाले से मॉरीशस के जन्म की कथा बताई। उन्होंने कहा कि सीता हरण के दौरान रावण के कहने पर मामा मारीच सोने का हिरण बनकर आया था और श्री राम ने उसका वध किया था। मरते-मरते मारीच का शरीर मोतियों में बदल गया था। बाद में उन मोतियों को दक्षिण दिशा में फेंका गया था, ये मोती उस दिशा में जहंा पर आकर गिरे थे वहां आज मॉरीशस है।