
जल्द खाने को मिलेगा रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला कुफरी नीलकंठ आलू
कानपुर। जल्द ही आपको सफेद-मटमैले रंग के आलू की जगह हल्के बैंगनी व गूदा क्रीमी सफेद रंग का आलू खाने को मिल सकता है।चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के शाक-भाजी शोध केंद्र ने केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र शिमला के साथ मिलकर तीन साल के शोध के बाद आलू की नई किस्म 'कुफरी नीलकंठÓ तैयार की है। इसे लखनऊ स्थित राजभवन में 16 फरवरी को पहली बार प्रदेश स्तरीय शाक-भाजी प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया जाएगा।
२०१५ में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
इस आलू की खासियत जानकर आप खुशी से झूम उठेंगे। शाक-भाजी शोध केंद्र के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार दुबे ने बताया कि कुफरी नीलकंठ को तैयार करने का प्रोजेक्ट वर्ष 2015 को आया था। लगातार प्रयोग के बाद दिसंबर 2018 में इसका पूर्ण बीज बोया गया। बुधवार को इसको पहली बार खेत से निकलवाया गया तो वह आशा के अनुरूप ही निकला।
बढ़ाता है रोग प्रतिरोधक क्षमता
कुफरी नीलकंठ की रिसर्च में पैथोलॉजिस्ट डॉ. रमेश सिंह व एसआरएफ डॉ. अजय कुमार यादव का योगदान रहा। अभी इसको सेंट्रल सब कमेटी ऑन क्रॉप स्टैंडर्ड नोटिफिकेशन एंड रिवीज ऑफ वेरीटीज फॉर हार्डीकल्चरर क्रॉप, नई दिल्ली को मानकों के परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद तमाम जांचों के बाद भारत सरकार का यह विभाग इसे अधिसूचित करेगा। शोध केंद्र विभागाध्यक्ष पहली बार 16 फरवरी को राज्यपाल के सामने लखनऊ राजभवन में इसे प्रदर्शित करेंगे। आलू का छिलका हल्का बैंगनी व गूदा क्रीमी सफेद रंग का है। कंदों का साइज गोल व औसत वजन 60-80 ग्राम है। एंटी ऑक्सीडेंट एंथोसाइनिंन पिग्मेंट होने के कारण यह शरीर में फ्री रेडिकल्स (अत्यधिक प्रतिक्रियाशील अणु) को नियंत्रित करने की क्षमता रखता है, इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी।
४५० कुंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार
शाक-भाजी शोध केंद्र के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार दुबे कहते हैं कि इसकी पैदावार 400 से 450 कुंटल प्रति हेक्टेयर है, जबकि बाजार में कुफरी बहार, चिप-सोना, कुफरी जवाहर, लाल आलू आदि की किस्में एक हेक्टेयर में लगभग 300 कुंटल का उत्पादन देती हैं। वैसे तो इसे बाजार में आने में समय लगेगा, लेकिन आने के बाद यह किसानों की पहली पसंद बन सकता है।
Published on:
14 Feb 2019 10:03 am
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