
सांसद डॉक्टर जोशी ने भरी हुंकार, टिकट मिला तो लड़ूंगा चुनाव
कानपुर। लोकसभा चुनाव की तारीख के ऐलान के बाद राजनीतिक दलों के अंदर सरगर्मी तेज हो गई है। दावेदार टिकट के लिए अपने करीबियों के जरिए पार्टी हाईकमान तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं तो वहीं वर्तमान सांसद भी एक्शन में आ गए हैं। भाजपा के कद्दावर नेता डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी ने रविवार की देरशाम रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्मों पर फुटओवर ब्रिज पर चढ़ने और उतरने के लिए नौ एस्केलेटर (स्वचलित सीढ़ियां) का शिलान्यास करने के बाद मीडिया से बातवीत के दौरान चुनाव में उतरने के संकते दे दिए हैं। उन्होंने हा कि मैं 2019 में चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं और यहां की जनता की सेवा और पांच साल करना चाहता हूं।
पीएम की प्रसंसा
भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश बहुत तेजी के साथ विकास के पथ पर बढ़ा है। विदेश, आर्थिक और कूटनाति में मोदी सरकार पिछले पांच सालों के दौरान पूरे विश्व में अपना लोहा मनवाया। कहा, यदि पार्टी हाईकमान मुझे चुनाव लड़ने को कहता है तो मैं तैयार हूं। कहा, यह पार्टी पर निर्भर करता है। जिस तरह से उन्होंने पांच साल लोगों का सहयोग किया, उसी तरह लोगों से भी सहयोग की अपेक्षा होगी।
29 को पड़ेंगे वोट
29 अप्रैल को कानपुर में लोकसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। भाजपा की तरफ से डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी के चुनाव में उतरने के संकेत के बाद यहां सियासत गर्म हो गई है। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस अपने पुराने व कद्दावर नेता पूर्व मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल को टिकट देने का मन बना चुकी है। वहीं जोशी के उतरने से कयास लगने शुरू हो गए हैं कि 2014 के दो दिग्गज 2019 में फिर से आपने-सामनें हो सकते हैं। वहीं बसपा के साथ गठबंधन के बाद सपा भी मैचनेस्टर से तगड़ा उम्मीदवार उतारनें जा रही है। ऐसे में यहां त्रिकोड़ी मुकाबला देखने को मिल सकता है।
कौन हैं मुरली मनोहर जोशी
डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में पूर्व मंत्री रह चुके हैं। साल 2009 में वाराणसी से चुनाव लड़ने से पहले उन्होंने तीन बार इलाहाबाद से चुनाव लड़ा। 2014 में डॉक्टर जोशी कानपुर से चुनाव लड़े और जीते। जानकारों का मानना है कि कानपुर संसदीय क्षेत्र ब्राहृमण बाहूल्य मानी जाती है। यहां 27 में 6 लाख के करीब ब्राम्हण वोटर्स हैं तो हार जीत में अहम रोल अदा करते आ रहे हैं। भाजपा के पक्ष में ये वोटर्स 2014 से लेकर 2018 तक खड़ा रहा। विधानसभा में यहां की 10 में 7 सीटों पर कमल खिला तो मेयर सीट पर भाजपा ने कब्जा किया। जानकारों का मानना है कि सपा-बीएसपी के चुनाव लड़ने से मुस्लिम वोट के साथ दलित वोट दो खेमों में बंट सकते हैं और इसका फाएदा भाजपा को होगा।
सबसे बड़ी जीत की थी दर्ज
2014 के लोकसभा चुनाव में डज्ञॅक्टर मुरली मनोहर जोशी ने 222946 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी। डॉक्टर जोशी को 474712 वोट मिले थे, जबिक कांग्रेस प्रत्याशी श्रीप्रकाश जायसवाल को 251766 वोट मिले। 222946 वोट से जीतने वाले डॉक्टर जोशी कानपुर के पहले सांसद बनें। इससे पहले इतने ज्यादा वोटों से किसी भी प्रत्याशी ने जीत दर्ज नहीं की थी। छह लाख ब्राम्हणों का वोट डॉक्टर जोशी को सीधे मिला। इसी के चलते शहर के कद्दावर नेता श्रीप्रकाश जायसवाल को हार उठानी पड़ी थी। साउथ क्षेत्र की सभी सीटों पर बीजपी को बढ़त मिली थी। लेकिन कैंट और सीसामऊ में पूर्वमंत्री डॉम्क्टर जोशी से आगे रहे।
Published on:
11 Mar 2019 01:19 am
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