
जानलेवा हुई गरमा-गरम रोटी, सेवन से बढ़े कैंसर रोगी
कानपुर। सर्दी का मौसम के अलावा अन्य सीजन में किचन से निकली गरमा-गरम रोटी लोगों की पहली पसंद होती है। शादी-पार्टियों में भी लोग इसे पाने के लिए लाइन पर खड़े रहते हैं, लेकिन इस फूली रोटी को खाने से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी की चपेट में युवा आ रहे हैं। शहर के जाने-माने जेके कैंसर संस्थान के विशेषज्ञों की एक टीम ने शोध के बाद ये खुलाशा किया है।
शोध के बाद खुलाशा
घर की किचन हो या शादी व अन्य पार्टियों के अलावा होटल व रेस्टारेंट, यहां पर लोगों की पहली दाल के साथ गरमा-गरम रोटी होती है। पर ये चपाती इंसानों को कैंसर रोग से ग्रसित कर रही है। जेके कैंसर संस्थान के विशेषज्ञों ने करीब चार सौ कैंसर पीड़ित मरीजों की जांच की। जहां उन्हें पता चला इसके चलते खाने की नली में कैंसा यानि स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (एससीसी) पाया जा रहा है। डॉक्टर ने बताया कि इलाज के लिए आए 35-40 साल आयु वर्ग के युवाओं की जांच में खाने की नली का कैंसर पाया गया है।
ठंडा भोजन खाएं
जेके कैंसर संस्थान निदेशक प्रोफेसर एमपी मिश्र के मुताबिक रोटी के अलावा चाय, कॉफी, व अन्य गर्म खाना खाने से इस बीमारी सीधे गले की नली का अंदरूनी भाग खराब देती है। डॉक्टर एमपी मिश्र के मुताबिक रोटी के अलावा चाय, कॉपी व अन्य गर्म भोजन भी घातक हैं। ऐसे में लोगों से हमारी अपील है कि रोटी को ठंडा कर खाएं। साथ ही सुबह के वक्त जग कर पैदल चलें। अगर किसी भी व्यक्ति को गले की नली में हल्की भी दिक्कत आए तो तुरन्त डॉक्टर को दिखाएं।
लगातार बढ़ रहे मरीज
प्रोफेसर एमपी मिश्र ने बताया कि सीए इसोफेगस के कैंसर का शुरुआती अवस्था में पता नहीं चलता है। जब तक मरीज आते हैं, कैंसर की स्टेज 3-4 पहुंच चुकी है। उनका जीवन एक साल से छह माह के बीच रह जाता है। पिछले तीन वर्षो में इसके मरीज 2-3 फीसद की दर से लगातार बढ़ रहे हैं, जो गंभीर स्थिति है। ऐसे में युवा व्यस्त जीवनशैली को बदलें। पैक्ड फूड व जंक फूड के सेवन से परहेज करें। बताया, पैक्ड, जंक फूड और प्रिजर्व बेकरी आइटम में सोडियम बेंजाएट मिलाया जाता है जो कैंसर का कारक होता है।
शुरूआती लक्षण
प्रोफेर मिश्र ने बताया कि सीने में लगातार जलन, खाना अंदर जाने में दिक्कत, खाने के तुरंत बाद उल्टी होना, सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी आना, ये खाने की नलीं के कैंसर के शुरूआती लक्षण हैं। ऐसी समस्या आने पर डॉक्टर के पास जाकर पहले खाने की नली की इंडोस्कोपी जांच, सीटी स्कैन जांच और एमआरआइ जांच कराएं। समय रहते पता लगने पर इलाज करना आसान है। प्रोफेसर मिश्रा ने बताया कि युवाओं को ये मर्ज बढ़े पैमाने पर जकड़ रहा है। ऐसे में उन्हें सचेत रहना होगा।
Published on:
13 Jan 2019 03:04 pm
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