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Kalyan Singh Memories: सादगी की मिशाल थे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, होटल की बजाय भाजपा कार्यालय होता था ठहराव, जानिए खास बातें

-पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यपाल कल्याण सिंह के निधन से कानपुर स्तब्ध-संघ व भाजपा के कार्यक्रमों के अलावा कार्यकर्ताओं के समारोह में होते थे शरीक

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Kalyan Singh Memories: सादगी की मिशाल थे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, होटल की बजाय भाजपा कार्यालय होता था ठहराव, जानिए खास बातें

Kalyan Singh Memories: सादगी की मिशाल थे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, होटल की बजाय भाजपा कार्यालय होता था ठहराव, जानिए खास बातें

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. सादगी की मिशाल रहे पूर्व मुख्यमंत्री (Ex Chief Minister Kalyan Singh) और पूर्व राज्यपाल (Rajasthan Ex Governer) कल्याण सिंह के निधन से कानपुर में शोक छा गया। दरअसल उनका कानपुर से बहुत (Kanpur Relation Kalyan Singh) जुड़ाव रहा है। पार्टी के लिए जीवन गुजारने वाले कल्याण सिंह को लोग यहां बाबूजी भी कहते थे। संघ और भाजपा का कानपुर में अस्तित्व मजबूत करने के लिए उन्होंने रिक्शे पर बैठकर गलियों और सड़कों के चक्कर लगाए। उनमें सादगी इतनी थी कि गेस्ट हाउस या होटल की बजाय नवीन मार्केट स्थित भाजपा कार्यालय ठहरते थे। यहां कार्यकर्ताओं से मिलकर पार्टी की खूबियां बताते थे। कैबिनेट मंत्री सतीश महाना (Cabinet Minister Satish Mahana) ने बताया कि जब वो मुख्यमंत्री थे तो उन्हें भी काम करने का मौका मिला था। उन्होंने इसे अपना सौभाग्य बताया।

कार्यकर्ताओं के समारोह में होते थे शरीक

सतीश महान ने बताया कि कानपुर में किसी भी कार्यकर्ता के कार्यक्रम में कल्याण सिंह जरूर पहुंचते थे। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सलिल विश्नोई कहते हैं कि संगठन की बैठकों में उनके साथ कई बार शामिल हुए। बोले एक बार लाठीचार्ज में उनका पैर टूट गया। जैसे ही इसकी खबर मिली कल्याण सिंह लखनऊ से सीधे उनके घर पहुंचे और हालचाल लिए। सांसद सत्यदेव पचौरी ने यादें ताजा की। बोले बेटियों के शादी समारोह में कल्याण सिंह शामिल होने आए थे। कुशल राजनीतिज्ञ की तरह संगठन और सरकार दोनों को बेहतर तरीके से चलाया।

2013 में इंदिरा नगर में जनसभा की थी संबोधित

गोशाला सोसाइटी के सुरेश गुप्ता ने बताया कि उनका व्यापारियों और यहां के उद्यमियों से भी उनका बहुत जुड़ाव रहा है। जब कल्याण सिंह मुख्यमंत्री थे, तब जनवरी 1998 में वह खादी ग्रामोद्योग के तत्कालीन मंत्री राजाराम पांडे के साथ यहां खादी ग्रामोद्योग में एक सेमिनार में शामिल हुए थे। इसके बाद 19 अक्तूबर को 2013 को कल्याणपुर के इंदिरानगर में एक जनसभा को संबोधित किया था। मुख्यमंत्री से पहले उन्होंने संगठन के कार्य से कानपुर के कई चक्कर लगाए।

महाना बोले राम मंदिर आंदोलन में थी अहम भूमिका

कैबिनेट मंत्री सतीश महाना ने बताया कि राम मंदिर आंदोलन में उनकी अहम भूमिका रही है। उनके समय में अयोध्या का विवादित ढांचा अगर नहीं गिरता तो आज उस जगह पर भव्य मंदिर बनना मुश्किल होता। भाजपा क्षेत्रीय पदाधिकारी अनूप अवस्थी बताते हैं कि भव्य राम मंदिर (Ram Mandir Ayodhya) के स्वप्न सृजन के प्रारब्ध में शामिल साधु आत्माओं में से एक पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन से प्रभु राम ने एक अनन्य भक्त खो दिया है। प्रभु उन्हें बैकुंठ धाम में विश्रांति प्रदान करें। सच तो यह भी है कि उनके निधन से आज कानपुर भी स्तब्ध है।