कानपुर. बीमार मां के इलाज में सरा पैसा खर्च हो गया। घर की आर्थिक स्थित खराब हो गई और वो कर्जदार बन बैठा। उसने कानपुर में रोजगार के लिए हाथ-पैर चलाए पर किसी ने उसे नौकरी नहीं दी। इसी दौरान उसकी मुलाकात मोहल्ले के एक युवक से हुई और उसने उसे कुवैत में जॉब करने की बात कही तो वो मान गया। मकान गिरवीं रखकर वो कुवैत चला गया, जहां उसे अल अजुवा कंपनी में एयर कंडीशनर मैकेनिक के तौर पर काम पर रखा और हरमाह 19,900 रुपये यानी 90 रियाल मिल रहा था। कुछ माह तक नौकरी ठीक-ठाक चली और जून के आखरी सप्ताह में कंपनी बंद हो गई।