
कोरोना के साथ ही अब इस विकराल समस्या से जुझ रहा ‘अन्नदाता’
कानपुर। कोरोना महामारी का असर अब अन्नदाताओं पर पड़ रहा है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल की बर्बादी से टूट चुके बिल्हौर तहसील के रहीमपुर और करीमपुर गांव के किसान सरकारी सिस्टम के चलते बिलख-बिलख कर रो रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकारी ट्यूबेल की मोटर पंद्रह दिन पहले फुंक गई थी। अलाधिकारियों से समस्या का समाधान करने को कहा पर सुनवाई नहीं। समय से पानी नहीं मिलने से गन्ने के अलावा मूंग सहित अन्य फसल सूखने लगी हैं। किसानों ने सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला
बिल्हौर तहसील के रहीमपुर और करीमपुर गांव के किसानों की फसल की सिचांई के लिए एक सरकारी ट्यूबेल लगा हुआ है। किसानों ने बताया कि मोटर फुंक जाने से ट्यूबल बंद है, जिसके चलते खेत में खड़ी गन्ने और मूंग की फसल बर्बाद हो रही है। किसानों के मुताबिक उन्होंने इस समस्या के बारे में भाजपा विधायक और एसडीएम को अवगत कराया, पर ट्यूबेल चालू नहीं हो सका। यदि दो दिन के अंदर फसल में पानी नहीं दिया गया तो वह बर्बाद हो जाएगी।
रोटी का सकंट
किसानों ने बताया कि सिर्फ गन्ने की ही फसल बची है और यही रोजी-रोटी का सहारा है। यदि समय पर ट्यूबेल नहीं ठीक हुआ तो खाने का संकट खड़ा हो जाएगा। किसानों ने बताया कि किसान क्रेडिड कार्ड के जरिए लोन लेकर सबसे महंगी फसल गन्ने की बोवनी की। उम्मीद थी कि गन्ना कुछ हद तक जख्मों में मलहम लगाएगा पर ऐसा दिख नहीं रहा। ग्रामीणों ने बताया कि ग्रामप्रधान, ग्रामसचिव, लेखपाल और ट्यूबेल आॅपरेटर से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन लाॅकडाउन का बहाना क रवह मोटर को ठीक नहीं करा रहे।
बारिश और ओले ने ढाया कहर
किसानों ने बताया कि बिन मौसम की हुई बारिश से मसूर, सरसों, मटर व चने और गेहूं की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। गेहूं की फसल गिर जाने से पैदावार पर बुरा असर पड़ा है। एक बीघे खेत में जहां पांच क्यूंअल गेहूं की फसल तैयार होती थी वहीं अब महज 50 से 100 किलो के बीच रह गई है। किसान भोले ने कहा कि गेहूं की फसल बारिश के कारण पूरी तरह से चैपट हो गई थी। अब गन्ने की फसल पर उम्मीद थी, लेकिन सरकारी सिस्टम के चलते अ बवह भी बर्बाद होने की कगार पर पहुंच चुकी है।
लाॅकडाउन ने तोड़ दी कमर
किसानों ने बताया कि कोरोना वायरस के चलते सरकार ने 21 दिन के लाॅकडाउन का ऐलान कर दिया। जिसके चलते गांव की गलियों में पुलिस के पहरे से खेतों में नहीं निकल पाए। प्रदेश सरकार ने फसल कटाई के लिए छूट दी। कटाई के बाद अनाज के बजाए सिर्फ भूसे के ढेर दिख रहे हैं। किसान ने बताया कि इससे पहले भी कई बार प्राकृतिक आपदा आई पर हालात इतनें खराब नहीं हुए। असलम कहते हैं कि गंगा कटरी के गांव में सब्जियां तैयार है पर खरीदार नहीं आ रहे। जिसके कारण वह सड़ रहीं हैं। असलम कहते हैं कि लौकी, कद्दू, खीरा, ककड़ी के ढेर गंगा के किनारे लगे हैं। अब तो हमलोग नाव के जरिए सब्जियों को भरकर फी में लोगों को दे रहे हैं।
Published on:
14 Apr 2020 09:01 am
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