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कानपुर में सूबे की पहली कामर्शियल कोर्ट, तीन लाख से अधिक के विवाद सुने जाएंगे

कारोबारी विवाद सुनने के लिए अलग से कोर्ट स्थापित हो गई है। सूबे की पहली कोर्ट स्थापित होने का गौरव कानपुर को मिला है।

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कानपुर में सूबे की पहली कामर्शियल कोर्ट, तीन लाख से अधिक के विवाद सुने जाएंगे

कानपुर, कारोबार के लिए बेहतर माहौल और विवाद की स्थिति में तेज निपटारा, इसे वादे को अमलीजामा पहनाया जाने लगा है। राज्य सरकार की तरफ से पिछले वर्ष कामर्शियल कोर्ट स्थापित करने की घोषणा धरातल पर उतर गई। यानी कारोबारी विवाद सुनने के लिए अलग से कोर्ट स्थापित हो गई है। सूबे की पहली कोर्ट स्थापित होने का गौरव कानपुर को मिला है। इससे कोर्ट में लंबित हजारों मामलों के बीच दबे कारोबारी विवाद अब तेजी से निपट सकेंगे।

अभी तक व्यापारियों के लेनदेन से जुड़े विवाद सिविल कोर्ट में सुने जाते थे। मुकदमों की अधिक संख्या के कारण सालों केस चलते हैं। करोड़ों की रकम फंसती है तो कारोबारी फैसलों की गति धीमी हो जाती है। ऐसे में लंबे समय से मांग थी कि कानपुर में कामर्शियल कोर्ट बने। प्रदेश सरकार ने कानपुर को तोहफा दिया है और सूबे की पहली कामर्शियल कोर्ट कानपुर में खुल गई। कानपुर देहात के पूर्व जिला न्यायाधीश अली जामिन को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है। फिलहाल इसमें कचहरी का ही स्टाफ लगाया गया है। जल्द ही कामर्शियल कोर्ट को अपना स्टाफ मिल जाएगा और काम शुरू हो जाएगा।

हर जिले में खोली जानी है कोर्ट
23 अक्टूबर 2015 से प्रभावी कामर्शियल कोर्ट एक्ट 2015 के तहत इस कोर्ट की स्थापना की गई है। यह कोर्ट हर जिले में खोली जानी है लेकिन कोर्ट सूत्रों के मुताबिक अभी कानपुर कोर्ट का क्षेत्राधिकार देहात, इटावा, औरैया, कन्नौज और फर्रुखाबाद भी होगा। अधिनियम की धारा 2सी में 22 प्रकार के व्यावसायिक विवादों की जानकारी दी गई है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता आशुतोष शर्मा बताते हैं कि 2015 में एक्ट बनते समय एक करोड़ से अधिक के विवाद यहां सुने जाने थे लेकिन मई 2018 में संशोधित कर तीन लाख रुपये कर दिया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित बताते हैं कि एक्ट में कामर्शियल कोर्ट, डिवीजन कोर्ट और अपीलेट कोर्ट का जिक्र है। जिले में कामर्शियल कोर्ट और अन्य दोनों हाईकोर्ट में होंगी। कामर्शियल कोर्ट के निर्णय के खिलाफ डिवीजन में कोर्ट में 60 दिन में अपील की जा सकेगी। डिवीजन कोर्ट के निर्णय को हाईकोर्ट में स्थित अपीलेट कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी। नवंबर 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में 13 बेंच गठित करने की घोषणा की थी। ïपहली पीठ उन्होंने कानपुर में खोल दी। वरिष्ठ अधिवक्ता शरद कुमार बिरला बताते हैं कि बड़ी धनराशि के लेनदेन पर अक्सर विवाद होते हैं। वर्तमान में छोटे विवाद ही लाखों रुपये के होते हैं। जिले की बात करें तो यहां ऐसे हजारों मामले लंबित होंगे। कामर्शियल कोर्ट इन विवादों को खत्म करेगी, व्यापारियों को राहत भी देगी।