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कानपुर

नसीमुद्दीन का छोड़ा साथ,सलीम हाथी पर सवार

बसपा के पूर्व कानपुर लोकसभा सीट के प्रत्याशी रहे सलीम अमहद ने बसपा की दोबारा ली सदस्यता, पार्टी प्रमुख को प्रधानमंत्री बनाने का लिया संकल्प।

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कानपुर। 2019 लोकसभा चुनाव के लिए बहुजन समाज पार्टी ने बिगुल फूंक दिया है। शनिवार को बीएसपी कार्यालय में कानपुर-लखनऊ के जोनल इंचार्ज नौशाद अली ने एमएलसी भीमराव अंबेडकर के साथ बूथ वार कार्यकर्ताओ को चुनाव की तैयारियों के सुझाव दिए और बूथ कमेटियों का गठन कर चुनाव में जोर शोर से लगने को कहा। इस मौके पर बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के शागिर्द पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सलीम अहमद की फिर से घर वापसी हो गई। उन्हें नौशाल अली ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर सलीम ने कहा कि मैं अब पार्टी सुप्रमो के हाथों को मजबूत करूंगा। हम सभी कार्यकर्ता उन्हें देश का प्रधानमंत्री बनाएंगे। आज के वक्त वो ही देश की नंबर एक नेता हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजयी रथ को वो ही रोकेंगी।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी के करीबी थे सलीम
लोकसभा चुनाव से पहले बसपा ने कांग्रेस का बड़ा झटका दिया है। पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बसपा से निकाले जाने के बाद कानपुर से बसपा के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सलीम अहमद भी कांग्रेस ज्वाइन कर ली। पिछले कई माह से सलीम अहमद पंजे को मजबूत कर रहे थे, लेकिन बसपा प्रमुख के कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करने का संकेत मिलते ही उन्होंने घर वापसी की तैयारी कर ली। जोनल कोआर्डिनेटर नौशाल अली की मौजूदगी में आज उन्होंने फिरे नीले रंग को अपना लिया। इस मौके पर नौशाल अली ने कहा कि किसी कारण के चलते हमारे वरिष्ठ नेता पार्टी को छोड़कर चले गए थे, अब वो एक-एक कर घर वापसी कर पार्टी सुप्रीमो के हाथों को मजबूत कर रहे हैं।

कौन है सलीम अहमद
सलीम अहमद ने राजनीति की शुरूआत बतौर बसपा कार्यकर्ता के तौर पर की थी। इन्हें पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी का करीबी माना जाता है। बसपा ने 2012 में सलीम अहमद को कानपुर मेयर पद के लिए चुनाव के मैदान में उतारा था। करीब दो लाख वोट पाने के बाद वो तीसरे नंबर पर रहे थे। इसी के बाद मायावती ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी के कहने पर इन्हें 2014 में लोकसभा का टिकट दिया, पर मोदी लहर के चलते सलीम को हार उठानी पड़ी। 2017 विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद मायावती ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी से निकाल दिया। इसी से नाराज होकर सलीम अहमद भी पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस का दामन थाम लिया।

इसके चलते की घर वापसी
सपा और बसपा के बीच संभावित गठबंधन को देख सलीम अहमद ने बसपा नेताओं से संपर्क बनाया और कोआर्डिनेटर नौशाद अली ने उन्हें पार्टी में शामिल कर लिया। जानकारों का मानना है कि लोकसभा चुनाव में मायावती-अखिलेश के बीच गठबंधन होना तय है, जबकि दोनों दल पहले से ही कांग्रेस से दूरी बना चुके हैं। ऐसे में नगर की सीट बसपा के खाते में जा सकती है और मुस्लिम वोटर्स की संख्या अधिक होने के चलते सलीम को बसपा टिकट दे सकती है। इस मामले पर जब सलीम अहमद से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि पार्टी जिसे भी चुनाव के मैदान में उतारेगी उसे जिताया जाएगा। टिकट देने का फैसला पार्टी सुप्रीमो करेंगी।

इनकी भी हो चुकी है घर वापसी
सलीम अहमद के अलावा नसीमुद्दीन के एक और करीबी गंगाराम पाल पहले ही उनका दामन छोड़ बसपा में शामिल हो चुके है । नौशाद अली ने सलीम अहमद की पार्टी में वापसी पर खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश की जनता बसपा प्रमुख को प्रधानमंत्री बनाना चाहती है। इस वक्त पूरे देश में बसपा की लहर चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ जनता को छला है। यूपी में अपराध चरम पर है तो बीजेपी के नेता थाने चला रहे हैं। जबकि बसपा सरकार के दौरान अपराधी पार्टी प्रमुख के नाम सुनकर कांप जाया करते थे।