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इंसान-बेजुबान के बीच अदभुत दोस्ती, तेंदुए को पढ़ा रहे हैं एबीसीडी

कानपुर चिड़ियाघर में 13 सौ से ज्यादा वन्यजीव, जिनकी देखरेख करते हैं डाॅक्टर आरके सिंह और उनकी पूरी टीम, बीमार शावकों की बचा ली जान।

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इंसान-बेजुबान के बीच अदभुत दोस्ती, तेंदुए को पढ़ा रहे हैं एबीसीडी

इंसान-बेजुबान के बीच अदभुत दोस्ती, तेंदुए को पढ़ा रहे हैं एबीसीडी

कानपुर। अपनी रफ्तर और शिकारी पर सटीक प्रहार के लिए पहचाने जाने वाले तेंदुए को देख कर अच्छे-अच्छों का पसीना छूट जाता है। लेकिन कानपुर चिड़ियाघर के डाॅक्टर आरके सिंह की एक नहीं बल्कि पूरे 12 तेंदुए के बच्चों से दोस्ती है। वो इनका इलाज के साथ शिकार करने की एबीसीडी पढ़ाते हैं। वो इन्हें शावकों से डरते नहीं बल्कि उनके करीब जाकर उन्हें पुचकारते हैं। उसकी इस काबिलियत को देखकर देखने वाले दंग ही रह जाते हैं।

12 शावक लाए गए थे
अप्रैल 2019 को मुरादाबाद और बिजनौर जिले से 12 तेंदुए के बच्चे लाए कानपुर चिडियाघर लाए गए थे। तेंदुए के शावकों के पैर व मुंह में जख्म थे। उन्हें सर्दी से बचाने के लिए रोगी कक्ष को चारों ओर से ढके के साथ ही ब्लोअर चलाया गया था। डाॅक्टर आरके सिंह बताते हैं कि ये सभी शावक गन्ने के खेत में पाए गए थे। इनमें से कुछ बच्चों की आंख नहीं खुली थी। आधा दर्जन शावक गंभीर बीमारियों की चपेट में आ गए। वेंटीलेटर में रख कर एक सप्ताह तक इनका इलाज किया गया। इस दौरान मैं और मेरी टीम टस से मस नहीं हुई। अस्पताल में भोजन करने के साथ ही यहीं पर विस्तर लगाकर सोते थे।

दो की हो गई थी मौत
डाॅक्टर आरके सिंह बताते हैं कि इलाज के दौरान दो शावकों की मौत हो गई तो एक की आंख की रोशनी चली गई। पूरे 70 दिन तक उसका इलाज चला और आॅपरेशन के बाद वह फिर से लोगों को देख सका। इस वक्त जू में 83 तेंदुए हैं, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं। डाॅक्टर सिंह कहते हैं कि आने वाले वक्त में कानपुर जू देश का पहला सेंटर होगा, जहां सबसे ज्यादा तेंदुए होंगे। इसके लिए ज ूप्रशासन तैयारी कर रहा है। बाड़ों में नर व माता तेंदुओं को रखा गया है।

जू प्रशासन ने रखे नाम
जू प्रशासन ने तेंदुओं के नाम भी रखे हुए हैं। जिनमें शेरू, पीताम्बरी, टॉम, टोनी, जेरी, कल्लू, लालू ,जैक, नीलम मुख्यरूप से बहुत तेज-तर्राक हैं। जब भी हम इनके बाड़े में जाते हैं और जैसे ही एक-एक कर इनका नाम पुकारते हैं तो सभी उछलकूद करने लगते हैं। बाड़े में लगी जाली में दोनो ंपैर कर खड़े हो जाते हैं और जैसे ही हम उनके सिर पर हाथ फेरते हैं वैसे ही वह बैठ जाते हैं। डाॅक्टर आरके सिंह कहते हैं कि तेंदुए कभी भी इंसानों पर हमला नहीं करते। बशर्ते उन्हें छेड़ा नहीं जाए। जंगल कम होने के कारण अब ये शहरों में दाखिल हो रहे हैं। लोगों से अपील है कि इन्हें मारने के बजाए वन्यविभाग को सूचना देकर बेजुबानों की रक्षा करें।

बेहतर माहौल
बाघिन त्रुशा और शेरनी नंदिनी के तीन-तीन शावकों को जन्म था। जिनकी देखरेभ डाॅक्टर आरके सिंह और यूजी श्रीवास्तप ने की थी। तेंदुए के साथ शेरों के बच्चों के जन्म लेने के बाद कानपुर चिड़ियाघर प्रशासन खासा उत्साहित है। खास तौर पर शेरों के लिए यहां मुफीद माहौल तैयार करने के साथ ही शावकों को स्वस्थ रखने के इंतजाम किए गए हैं। जू में शेरों के अलावा, बाघ, भालू समेत अन्य मांसाहारी जानवर मौजूद हैं।

बन सकता है ब्रीडिंग सेंटर
चिड़ियाघर में पर्याप्त प्राकृतिक क्षेत्र है और देखभाल के पूरे इंतजाम भी। ऐसे में प्राणिउद्यान को ब्रीडिंग सेंटर के तौर पर विकसित किया जा रहा है। चिकित्सक आरके सिंह ने बताया कि अगर शेरों का प्रजनन केंद्र कानपुर प्राणिउद्यान में बनता है तो यह एक बेहतर कदम होगा। यहां वन्यजीवों के लिए अनुकूल माहौल है। यहा शेर अजय, शेरनी नंदिनी के सभी शावक उमा, शकर और सुंदरी स्वस्थ हैं। इन सुविधाओं को देखते हुए शासन से शेरों के प्रजनन केंद्र के लिए हरी झडी दे दी है।

अव्वल जू बनाने की योजना
कानपुर प्राणिउद्यान को तीन आईएसओ सर्टिफिकेट मिल चुके हैं। इसे देश का नंबर एक जू बनाने के लिए शासन भी प्रयासरत है। प्राणिउद्यान में जहा 1300 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीव हैं। बीते दो-तीन माह में शासन के अफसरों ने यहा का दौरा कर व्यवस्थाओं पर खासा ध्यान दिया। डाॅक्टर आरके सिंह बताते हैं कि शेर-तेंदुए के साथ ही हमारे पास देशी भालू भी हैं। डाॅक्टर सिंह ने बताया कि 27 नवंबर 2017 को जन्मा भालू का बच्चा अब बड़ा हो गया है और लोगों के आकर्षण का केंद बना है।