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आठ साल से कूड़ा निस्तारण में नगर निगम कर रहा बड़ा ‘खेल’

नगर निगम शहर में कूड़ा निस्तारण को लेकर लगातार पिछले आठ साल से शासन को झूठी रिपोर्ट देकर उनकी आंखों में धूल झोंक रहा था, लेकिन अब नगर निगम की कारस्तानी सबके सामने आ गई है.

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Kanpur

आठ साल से कूड़ा निस्तारण में नगर निगम कर रहा बड़ा ‘खेल’

कानपुर। नगर निगम शहर में कूड़ा निस्तारण को लेकर लगातार पिछले आठ साल से शासन को झूठी रिपोर्ट देकर उनकी आंखों में धूल झोंक रहा था, लेकिन अब नगर निगम की कारस्तानी सबके सामने आ गई है. आपको बता दें कि शहर में सफाई व्यवस्था के साथ ही कूड़ा निस्तारण के लिए भी नगर निगम जिम्मेदार है.

की जाती है मॉनिटरिंग
शासन की ओर से इसकी मॉनिटरिंग भी की जाती है, लेकिन नगर निगम पिछले 8 साल से उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लखनऊ को झूठी रिपोर्ट भेज रहा है. रिपोर्ट में इस बात का दावा किया जाता रहा कि पनकी स्थित भौसिंह डंपिंग ग्राउंड में शहर का रोजाना सैकड़ों मीट्रिक टन कूड़ा डंप किया जाता है और आईएलएंडएफएस कंपनी की ओर से कूड़ा का निस्तारण किया जा रहा है.

अपनाया सख्‍त रुख
उधर, वर्ष 2015 से वर्ष 2017 तक कूड़ा निस्तारण करने वाली कंपनी ने कोई काम ही नहीं किया. इस संबंध में कई बार प्रदूषण बोर्ड के स्थानीय अधिकारियों ने नगर निगम के झूठ का स्थलीय निरीक्षण कर पर्दाफाश भी किया था. अब इस मामले में प्रदूषण बोर्ड के सदस्य सचिव आशीष तिवारी ने सख्त रुख अपनाते हुए नगर आयुक्त को एनओसी लेने के सख्त निर्देश दिए हैं. 15 दिन का वक्त देते हुए सही रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है, वरना विधिक कार्यवाही की जाएगी.

कार्यवाही के लिए जारी हुआ था नोटिस
उ. प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 1000 मीट्रिक टन ठोस कूड़े के निस्तारण के संबंध में 4 अप्रैल 2016 को नोटिस जारी किया था. इसके बाद 5 अक्टूबर 2017 को भी राज्य बोर्ड द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के प्रावधानों की प्रभावी कार्यवाही के लिए नोटिस जारी हुआ था.

जारी हुआ था नोटिस
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भी नगर निगम कानपुर को 16 नवंबर 2017 को इस संबंध में प्रभावी कार्यवाही करने के लिए नोटिस जारी हुआ था. इसके जवाब में नगर निगम कानपुर द्वारा नोटिस का जवाब दिया गया कि कूड़ा निस्तारण की सुविधा 2010 से स्थापित है, जबकि अप्रैल 2015 से कूड़े कंपोस्ट खाद्य, आरडीएफ और वर्मी कंपोस्ट बनाने का संचालन बंद है. वहीं सितंबर 2017 में कूड़ा निस्तारण के लिए आईएलएंडएफएस कंपनी से अनुबंध किया गया है और कूड़ा निस्तारण किया जा रहा है.

खुल गई पोल
प्रदूषण बोर्ड को दी गई उक्त रिपोर्ट की सच्चाई तब खुल गई जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय स्तर पर 30 जुलाई 2018 को टीम ने निरीक्षण किया. टीम को कहीं भी कूड़ा निस्तारण होते नहीं मिला. इस संबंध में रिपोर्ट राज्य प्रदूषण बोर्ड को भेज दी गई. जिसके बाद अब बोर्ड के सदस्य सचिव आशीष तिवारी ने नगर आयुक्त को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि नोटिस मिलने के 15 दिन के अंदर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 के प्रावधानों के अंतर्गत जल और वायु अधिनियम के प्राविधानों के तहत नियमानुसार एनओसी प्राप्त की जाए. वरना कूड़े के शोधन और निस्तारण के लिए उत्तरदायी व्यक्तियों के खिलाफ पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत कोर्ट में विधिक कार्यवाही शुरू की जाएगी.

नहीं बन रही बिजली
पनकी स्थित भौसिंह प्लांट में कई मीट्रिक टन कूड़ा डंप पड़ा है. कूड़े से बिजली बनाने का कार्य कई साल पहले एटूजेड कंपनी ने शुरू किया था, लेकिन एक महीने बाद यह कार्य बंद हो गया. 2017 में आईएलएंडएफएस कंपनी ने कार्य शुरू किया. इस दौरान कई बार पूर्व नगर आयुक्त और कंपनी के अधिकारियों ने जल्द कूड़े से बिजली बनाने के कार्य को शुरू करने का दावा किया था. आज तक यह कार्य शुरू नहीं किया जा सका है. बता दें कि डंपिंड ग्राउंड में डंप 30 परसेंट कूड़े से 15 मेगावॉट बिजली पैदा की जा सकती है.