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कानपुर. सोशल मीडिया बकवास है, सिर्फ टाइम किलिंग। दिमाग शार्प करना है तो सिर्फ खबरें पढि़ए, अखबार या बेवसाइट पर। इसी गुरुमंत्र के साथ कानपुर की गरिमा सिंह ने अपने सपने को हकीकत में बदल लिया। पहली कोशिश में पीसीएस-जे में सातवां स्थान हासिल करने वाली गरिमा ने आजतक वाट्सएप का इस्तेमाल नहीं किया, जबकि फेसबुक को एक महीने बाद अलविदा कह दिया था। पापा पुलिस हैं और गरिमा अब जज बनेगी। सिर्फ गरिमा ही क्यों, पीसीएस-जे में कामयाबी हासिल करने वाले आठ अन्य होनहारों ने बताया कि सोशल मीडिया में उलझ जाते तो कामयाबी दूर की कौड़ी होती। उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा सिविल जज (जूडि) के परीक्षा परिणाम में लखनऊ की स्वरांगी शुक्ला ने पहली रैंक पर अपने नाम का परचम लहराया है। स्वरांगी की कामयाबी की कहानी गूंज रही है। कुछ ऐसे भी चेहरे हैं, जिन्होंने भी कामयाबी के पथ पर मील का पत्थर रखा है। आइए, सुनते हैं ऐसे ही अन्य मेधावियों की कहानी।
गरिमा के मुताबिक, वक्त की बर्बादी है सोशल मीडिया
गरिमा के पापा कौशलेंद्र सिंह यूपी विजिलेंस में ज्वाइंट डायरेक्टर हैं। कानपुर की पुलिस लाइन में रहने वाली गरिमा ने उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की न्यायिक परीक्षा 2016 को पहले प्रयास में पास करते हुए सातवां स्थान हासिल किया है। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी गरिमा ने 12वीं तक मथुरा में पढ़ाई करने के बाद कॉलम लॉ एडमिशन टेस्ट के जरिए राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ- पटियाला में पढऩे पहुंच गई। पटियाला में भी गरिमा ने कामयाबी के झंडे लहराए थे। यूनिवर्सिटी में उसे तीसरा और महिला वर्ग में पहला स्थान मिला था। इसके लिए उसे केटीएस तुलसी अवार्ड से नवाजा भी गया था। न्याय मिलने में देरी को अन्याय बताने वाले गरिमा ने कामयाबी का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को देते हुए बताया कि तमाम साथी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते थे, ऐसे में उसने भी फेसबुक से नाता जोड़ा, लेकिन जल्दी ही एहसास हो गया कि यह तो वक्त की फिजूलखर्ची है। इसके बाद आजतक फेसबुक, वाट्सएप और टिव्टर जैसे तमाम प्लेटफार्म से खुद को दूर रखा। नतीजा सामने है।
पापा पुलिस वाले हैं और शोभा बिटिया फैसला सुनाएगी
गरिमा की तरह इटावा की शोभा भाटी ने पीसीएस-जे में कामयाबी का परचम लहराया है। शोभा के पापा भोलू सिंह भाटी फिलहाल ग्रेटर नोयडा में तैनात हैं। शोभा ने बताया कि उसने जज बनने का सपना देखा था, जोकि कामयाब हुआ। शोभा ने भी बताया कि अखबार और न्यूज वेबसाइट के जरिए अपने सामान्य ज्ञान को शार्प किया और साक्षात्कार में बगैर झिझक खुद को साबित कर दिया। शोभा ने बताया कि सोशल मीडिया में वक्त बर्बाद नहीं करेंगे तो दिमाग शांत रहेगा और कामयाबी कदम चूमेगी। शोभा की तरह ही हरदोई में धर्मशाला रोड निवासी अधिवक्ता शैलेंश पाण्डेय के पुत्र संजय पाण्डेय ने पीसीएस-जे में छठां स्थान हासिल किया है। लखनऊ के क्रिश्चियन इंटर कालेज से 2006 में इंटरमीडियट उत्र्तीण करने वाले संजय को तीसरे प्रयास में यह कामयाबी मिली है। संजय भी बताते हैं कि तीसरे प्रयास में वक्त बर्बाद करने वाले माध्यमों से खुद को दूर किया तो सपना साकार हो गया।
नियमित क्लास और अखबार पढऩे से प्रणव को मिला फायदा
प्रणव कहते हैं कि लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी ऑनर्स और नेशनल लॉ स्कूल बंगलूरू से एलएलएम किया है। 22 साल की उम्र में पहले ही प्रयास में सफलता मिल गई। अब समाज को पक्षपात रहित न्याय दिलाने का लक्ष्य लेकर इस क्षेत्र में आया हूं। हमारे देश का कानून बहुत बेहतर है, लोगों को सही समय पर न्याय मिले इसके लिए और प्रयास करने की जरूरत है। पीएनबी में सीनियर मैनेजर पिता नरेंद्र त्रिपाठी व मां विभा त्रिपाठी की मेहनत से कामयाब होने वाले प्रणव ने कहाकि रोजाना क्लास अटेंड करता रहा और प्रत्येक डाउट को क्लीयर करता रहा। इसके साथ ही अखबार से अपनी जीके को मजबूत किया।
दिमाग शार्प करने के लिए अखबार पढ़ती थी तरुणिमा पाण्डेय
पीसीएस-जो में 57वीं रैंक हासिल करने वाली तरुणिमा पाण्डेय ने लोरेटो कॉन्वेंट से स्कूलिंग करने के बाद डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विवि से बीएएलएलबी की पढ़ाई को पूरा किया। इसके बाद लखनऊ विवि से एलएलम की पढ़ाई पूरी करने के बाद पहले ही प्रयास में पीसीएस-जे में सफलता का झंडा लहरा दिया। तरुणिमा ने बताया कि प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा सेक्शन पूछते हैं इसलिए सभी एक्ट व सेक्शन की तैयारी करनी चाहिए। तरुणिमा ने बताया कि जीके के लिए अखबारों से सहायता लेने के साथ-साथ उसने सोशल मीडिया से परहेज किया और रोजाना पढ़ाई करती रही। तरुणिमा के पापा आरपी पाण्डेय भी डिस्ट्रिक्ट एवं सेशन जज हैं और फिलहाल रेल दावा प्राधिकरण में बैठते हैं। माता रागिनी गृहिणी हैं।
अंकुर को गगनचुंबी हौसले से ही मिली है कामयाबी
अंकुर की कहानी उसी की जुबानी। लखनऊ व विश्वविद्यालय से एलएलबी ऑनर्स और सेंट जॉन्स से मेरी स्कूलिंग हुई है। मेरा लक्ष्य जरूरतमंद को सही समय पर न्याय दिलाना है। न्याय के लिए लोगों को काफी भटकना पड़ता है और समय भी लगता है। इसमें कुछ बेहतर करने का प्रयास करूंगा। मुझे यह सफलता तीसरे प्रयास में मिली। कुल मिलाकर यह समझिए कि परीक्षार्थियों को हौसले के साथ तैयारी करनी चाहिए और निराश नहीं होना चाहिए। मेरे पिता नेडा के जनसंपर्क अधिकारी अरुण कुमार श्रीवास्तव व मां विभा श्रीवास्तव खाद्य निगम में जॉब करती हैं। मैंने परिजनों और गुरुजनों के मार्गदर्शन से ही सफलता प्राप्त की।’
ज्यादा से ज्यादा अभ्यास करें : भव्या श्रीवास्तव, रैंक 98
मैनें लविवि से एलएलबी ऑनर्स करने के बाद ही पीसीएस जे की तैयारी शुरू कर दी। परीक्षा देने के बाद मैंने इसी वर्ष लविवि के एलएलएम में प्रवेश लिया। पहले ही प्रयास में सफलता मिल गई। मैंने समय का प्रबंधन का ध्यान रखते हुए पूरे कोर्स को कम से कम तीन बार रिवाइज किया। स्लेबस काफी बड़ा होता है, इसलिए सभी पेपरों पर बराबर फोकस करते हुए तैयारी जरूरी है, तभी अच्छी रैंक मिलेगी। मेरे पिता केवी श्रीवास्तव बैंक अधिकारी और माता संगीता श्रीवास्तव गृहिणी हैं। जितना हो सके उतना प्रैक्टिस करें और परीक्षा से काफी समय पहले ही अपने सिलेबस को पूरा कर लें।
नोट्स से ज्यादा तैयारी करें - पुरुषोत्तम अवस्थी, रैंक 61
मैनें दूसरे प्रयास में पीसीएस-जे क्लीयर किया। लविवि से बीए और एलएलबी की पढ़ाई करने के बाद पीसीएस की तैयारी की। जीजा गंगेश्वर उपाध्याय और बहन मीरा उपाध्याय पीसीएस ऑफिसर हैं, इन दोनों ने मेरी तैयारी में काफी मदद की। मेरी सफलता का श्रेय इन्हीं को जाता है। सिर्फ मेहनत करें और ज्यादा से ज्यादा नोट्स से तैयारी करें। मेरे पिता रमेश चंद्र अवस्थी अधिवक्ता और माता कुसुम गृहिणी हैं।
टाइम मैनेजमेंट सफलता के लिए जरूरी - अंबिका मेहरोत्रा- 39वीं रैंक
लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलएम और सीएमएस से स्कूलिंग हुई है। मैंने शिया पीजी कॉलेज से एलएलबी किया है। एलएलबी में मुझे छह गोल्ड मेडल मिले हैं। मेरे पिता अशोक मेहरोत्रा अधिवक्ता हैं और उन्हीं से प्रभावित होकर मैं इस क्षेत्र में जाने का निर्णय ले पाया। पिता के साथ म्यूजिक टीचर मां अल्पना मेहरोत्रा ने भी मेरा हर कदम पर सहयोग किया। बिना भ्रष्टाचार के सबको न्याय दिलाना पहला लक्ष्य है। दूसरे प्रयास में मुझे यह सफलता हासिल हुई। मैं किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए टाइम मैनेजमेंट को जरूरी मानता हूं। मैंने पढ़ाई पर पूरा फोकस किया और भगवान पर भरोसा रखा।’
लोकल लॉ और जनरल स्टडीज पर दिया ध्यान- अनुकृति संत-187वीं रैंक
‘लॉ के स्टूडेंट होने की वजह से पीसीएस जे में लॉ का पेपर तो आमतौर पर अच्छा ही जाता है। समस्या जनरल स्टडीज के पेपर में होती है। यही वजह है कि जनरल स्टडीज में मेरिट भी कम जाती है, इसलिए जरूरी है कि इस पर विशेष ध्यान दिया जाए। मैंने डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विवि से लॉ की पढ़ाई की है। लोकल लॉ का पेपर हमारे सिलेबस में शामिल नहीं होता है। इसलिए इस पर भी हमें विशेष ध्यान देना चाहिए। मेरे पिता केके संत सरकारी सेवा में हैं तथा मां अलका संत गृहिणी हैं। स्टूडेंट्स जनरल स्टडीज पर विशेष ध्यान दें।’
गीतिका सिंह- 193वीं रैंक
‘न्यायिक सेवा में सफलता हासिल करने के लिए धैर्य बेहद जरूरी है। धैर्य के साथ कड़ी मेहनत करेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी। मेरा मानना है कि सफलता हासिल करने के लिए नियमित रूप से पूर्व के वर्षों में आए सवालों के साथ ही मॉडल प्रश्नपत्र का अभ्यास करना परीक्षा में सफलता हासिल करने में लाभदायक रहा। मेरे पिता शिवराम सिंह सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि मां सुधा सिंह गृहिणी हैं। मेरी विद्यार्थियों को सलाह है कि वे धैर्य का साथ कभी न छोड़ें और तैयारी नोट्स बनाकर ही करें।’
प्री के साथ ही शुरू करें मेन्स की तैयारी- अनामिका-99वीं रैंक
‘प्री के साथ ही मेन्स की तैयारी करना सही रहता है। लोग सोचते हैं एक बार प्री निकाल लूं, उसके बाद मेन्स की तैयारी शुरू करुंगा, इससे मुख्य परीक्षा के लिए अच्छी तैयारी नहीं हो पाती। मैं मूल रूप से सोनभद्र जिले की रहने वाली हूं। मेरे पिता राधाकृष्ण चौहान टेलरिंग की दुकान चलाते हैं तथा मां गंगादेवी गृहिणी हैं। मैंने दूसरे प्रयास में ही सफलता हासिल की है। मैं वर्ष 2015 में साक्षात्कार में असफल हो गई थी। मेरी विद्यार्थियों को यही सलाह है कि वे शुरुआत से ही मेन्स को लेकर फोकस करें।’
Published on:
15 Oct 2017 12:25 pm
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