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इस मंदिर में देवी प्रतिमा दिन में तीन बार बदलती रूप बाल्यावस्था युवावस्था और वृद्धावस्था, डाकुओं की आस्था का रहा केंद्र

सुबह के समय बाल अवस्था, दोपहर युवा अवस्था और रात में वृद्ध अवस्था धारण करती हैं। यहां पूरे वर्ष भर श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहता है।

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इस मंदिर में देवी प्रतिमा दिन में तीन बार बदलती रूप बाल्यावस्था युवावस्था और वृद्धावस्था, डाकुओं की आस्था का रहा केंद्र

इस मंदिर में देवी प्रतिमा दिन में तीन बार बदलती रूप बाल्यावस्था युवावस्था और वृद्धावस्था, डाकुओं की आस्था का रहा केंद्र

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

कानपुर देहात. प्रदेश नहीं देश के कई हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र मुक्ता देवी का मंदिर (Mukta Devi Temple), जो करीब पांच हजार वर्ष प्राचीन बताया जाता है। इस मंदिर में स्थापित मुक्ता देवी के बारे के कहा जाता है कि यहां देवी दिन में 3 रूप बदलती हैं। सुबह के समय बाल अवस्था, दोपहर युवा अवस्था और रात में वृद्ध अवस्था धारण करती हैं। कानपुर देहात में यमुना नदी (Yamuna River) के किनारे स्थित इस मंदिर में दस्यु सुंदरी फूलन देवी (Foolan Devi) और डाकू विक्रम मल्लाह (Daku Vikram Mallah) माथा टेकने आते थे। इस मंदिर परिसर में वर्षों से चूड़ी बेच रही मुस्लिम बुज़ुर्ग महिला साम्प्रादायिक सौहार्द की मिसाल पेश करती है, जिसने मंदिर के लिए 3 बीघा जमीन दान की थी। यहां पूरे वर्ष भर श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहता है।

इसे सिद्धपीठ का दर्जा भी मिला

कानपुर देहात के मूसानगर इलाके में यमुना नदी के किनारे स्थित मुक्ता देवी मंदिर को लोग मुक्तेश्वरी देवी के नाम से भी जानते हैं। मान्यता है कि इस दरबार मे हर मनोकामना पूरी होती है। इसे सिद्धपीठ भी कहा जाता है। जानकार बताते हैं कि मंदिर परिसर में लगी प्रतिमाओं को कई दशक पहले चोर चोरी करके ले गए, लेकिन बाद में चोर प्रतिमाओं को वापस मंदिर में लाकर रख गए और क्षमा प्रार्थना कर चले गए।

क्या कहते हैं मंदिर के पुजारी रामजी

मंदिर के पुजारी रामजी द्विवेदी बताते हैं कि ये वास्तविक जानकारी किसी को नहीं है कि मंदिर कितना पुराना है। मगर हाल ही में पुरातत्व विभाग की टीम आयी थी और उसके सर्वेक्षण में ये जानकारी हुयी कि मंदिर लगभग 5 हज़ार साल पुराना है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यमुना किनारे स्थित इस प्राचीन मंदिर में दस्यु सुंदरी फूलन देवी एवं डाकू विक्रम मल्लाह सहित बीहड़ में रहने वाले तमाम डाकू भी माथा टेकने आते थे और माता का आशीर्वाद लेकर चले जाते थे, लेकिन कभी डाकुओ ने किसी को हानि नही पहुंचाई।

मुस्लिम महिला जैतून ने दिया बड़ा दान

मंदिर परिसर में चूड़ी और श्रृंगार का सामान बेचकर परिवार का भरण पोषण करने वाली मुस्लिम महिला जैतून कई दशक से मंदिर में ही श्रृंगार का सामान बेच रही है। मंदिर में जैतून ने 3 बीघा जमीन दान कर दी थी। जैतून के मुताबिक भविष्य में उसके रिश्तेदार नातेदार कोई विवाद ना करें, लेकिन जैतून को डर नही लगता है। रोज़ाना ऐसे ही मंदिर के सामने दुकान लगाकर बैठती हैं और यहां के लोग उन्हें प्यार स्नेह देते हैं, जो यकीनन हिन्दू मुस्लिम सौहार्द की मिसाल है।