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जीएसटी ने पकड़ी करोड़ों की चोरी की सुपारी

गोवाहटी और कोलकाता से आ रही थी कानपुर, जीएसटी की टीम ने तीन राज्यों में मारी रेड, दो सौ करोड़ की सुपारी की बरामद, कई कारोबारियों से चल रही पूछताछ।

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जीएसटी ने पकड़ी करोड़ों की चोरी की सुपारी

कानपुर। कपड़े, चमड़े के बाद कानपुर का नाम गुटखा किंग के पहचाने जाने लगा। गुजरात से आए मनसुख भाई कोठारी ने यहां पहली फैक्ट्रह खोली, इसके बाद फिर कई कंपनियों ने यहां अपने पैर पसार लिए। अधिक मुनाफे के चलते कारोबारियों ने गुटखा की गुणवत्ता में कमी की फिर सस्ती कीमत पर दूसरे राज्यों से बड़े पैमाने पर सुपारी की खेप आनी शुरू हो गई। केंद्र सरकार ने जैसे ही जीएसटी कानून पास किया, वैसे गुटखा कारोबारियों की आमदनी कम होने लगी। बावजूद जुगाड और रसूख के चलते टैक्स चोरी कर सुपारी मंगवाते रहे। लेकिन जीएसटी इंटेलिजेंस कानपुर की टीम गुवाहाटी और कोलकाता, दिल्ली और कानपुर में दो दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापामार कर इस कारोबार का पर्दाफाश किया। टीम ने करीब दो से ढाई सौ करोड़ की सुपारी का अवैध करोबार पकड़ा है। यह कारोबार कई राज्यों में फैला था। जीएसटी के अधिकारियों की मानें तो नंबर दो की सुपारी पहले कानपुर आती थी और यहां से फिर अन्य शहरों के लिए खेप भेजी जाती थी।

इन ठिकानों में रेड
जीएसटी इंटेलिजेंस के अपर निदेशक दिनेश कुमार को लगातार सूचनाएं मिल रही थीं कि कोलकाता और गुवाहाटी से कानपुर के अलावा लखनऊ और दिल्ली के लिए बड़े पैमाने पर सुपारी का परिवहन हो रहा है। ई-वे बिल के जरिये सुपारी के परिवहन का होना तो पता चल रहा था, लेकिन सुपारी कहां जा रही है इस बात की जानकारी नहीं मिल पा रही थी। इसके खुलासे की जिम्मेदारी उप निदेशक शलभ कटियार और उनकी टीम को सौंपी गई। शलभ कटियार ने रेकी शुरू की और 22 दिसंबर को बजरंग ट्रेडिंग कंपनी ट्रांसपोर्ट नगर कानपुर, बजरंग सेल्स कारपोरेशन लखनऊ, अंकिता सेल्स कारपोरेशन दिल्ली, मारुति ट्रेडर्स गुवाहाटी, आदित्य कारपोरेशन कोलकाता के प्रतिष्ठानों पर छापा मारा। यहां से टीम के करीब दो से ढाई सौ करोड़ रूपए का अवैध सुपारी बरामद की।

कोलकाता के कारोबारियों को पकड़ा
गुटखा कारोबारी कोलबाता और गोहाटी से कम कीमत पर सुपारी मंगवाते थे और यहां उससे गुटखा तैयार करते थे। जानकारों का कहना है कि कोलबाता और गोहाटी में सुपारी की कीमत अन्य शहरों के मुकाबले बहुत कम है। इसी के कारण गुटखा कारोबारी कई सालों से नंबर दो की सुपारी को बेरोक-टोक के वहां से कानपुर लाते थे। यहां से फिर सुपारी लखनऊ, दिल्ली के अलावा अन्य शहरों में भेजी जाती थी। गुटखा कारोबारी अवैध सुपारी पर करोड़ों कमाने के साथ ही सरकार को बड़े पैमाने पर चूना लगा रहे थे। जीएसटी की टीम इसी के बाद हरकत में आई और इन शहरों में रेड की। तीन दिन तक चली जांच के बाद जीएसटी इंटेलिजेंस ने कोलकाता के कुछ कारोबारियों को भी पकड़ा है। उनसे पूछताछ में कानपुर के पान मसाला कारोबारियों, सुपारी व्यापारियों और एजेंटों के गठजोड़ की परतें खुल रही हैं, जिन्हें जीएसटी की टीम किसी भी बक्त अरेस्ट कर सकती है।

फर्जी नाम से चल रही थीं फर्में
जीएसटी की रेड के बात ये सामने आई है कि कानपुर, लखनऊ और दिल्ली की फर्में फर्जी हैं। अफसरों ने इन प्रतिष्ठानों को सील कर दिया। इन फर्मों के लिंक में 10 से ज्यादा ठिकानों पर और छापा मारी हुई। नतीजा ये निकला कि कोलकाता में 15 से ऐसी फर्जी फर्मों का पता चला जिनके जरिये कई राज्यों में सुपारी का अवैध कारोबार फैला था। इन फर्मों से मिले दस्तावेजों के आधार पर अफसरों ने पाया कि बीते एक साल में करीब 200 करोड़ रुपये की सुपारी का परिवहन बिना टैक्स दिए हुआ। सिर्फ सुपारी कारोबार पर टैक्स माना जाए तो पांच फीसदी के हिसाब से 10 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी हुई। यदि पान मसाला कारोबार के लिहाज से माने तो टैक्स चोरी कई गुना अधिक होगी। छापे के बाद अफसरों के हाथ लगे दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।