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मरीज उबलते रहे, डाक्टर्स एसी में बैठकर दोस्तों के साथ……

आईसीयू के अंदर तीमारदार पंखा लेकर हिलाते रहे, हडक़ंप मचा तो पंखे भी छीने

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मरीज उबलते रहे, डाक्टर्स एसी में बैठकर दोस्तों के साथ......

कानपुर . उरई के चांद मंसूरी बीते चार दिन से लाला लाजपत राय अस्पताल (एलएलआर-हैलट) में भटक रहे हैं। उनकी भांजी का बेटा मेडिसिन विभाग के इंसेटिव केयर यूनिट (आइसीयू) में भर्ती है। आईसीयू के अंदर गर्मी के कारण दम निकाल रहा है, लेकिन चांद मंसूरी की शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है। आईसीयू के अंदर पंखा हिलाते-हिलाते उनकी भांजी का हाथ थक चुका है। गुरुवार को मरीजों की मौत के बाद हडक़ंप मचा तो आईसीयू स्टॉफ ने स्थिति सामान्य दिखाने के लिए पंखा भी छीन लिया। अब चांद मंसूरी एक छोटा इलेक्ट्रिक पंखा लेकर आए हैं। यह दास्तां अकेले चांद मंसूरी की नहीं, बल्कि आईसीयू के बाद इधर-उधर पड़े तमाम तीमारदारों की कहानी है। दूसरी ओर, मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार और अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आर.सी. गुप्ता समेत सभी रेजीडेंट डाक्टर्स के चेंबर में एसी चलते नजर आए। आईसीयू में भर्ती रसूलाबाद के एक मरीज के परिजनों ने बताया कि बुधवार की रात एसी नहीं चलने की शिकायत करने गए तो जूनियर डाक्टर्स एक सीनियर डाक्टर्स के एसी कमरे में बैठकर गप्प लड़ाते मिले। आग्रह करने के बावजूद कोई नहीं आया, दोबारा शिकायत करने पर डाक्टर्स ने उन्हें धमकाकर भगा दिया।


पांच दिन से तपड़ रहे हैं मरीज, डाक्टर्स को चिंता नहीं

आईसीयू का एसी प्लांट पांच दिन से गड़बड़ा रहा है, इस कारण कूलिंग कम होने से भर्ती मरीज बिलबिला रहे थे। शिकायतों पर सुनवाई नहीं होने के बाद तीमारदारों ने खुद पंखों का इंतजाम किया तो आईसीयू प्रभारी डॉ. सौरभ अग्रवाल ने उन्हें बाहर रखा दिया। ऐसे में तीमारदार हाथ के पंखे से मरीजों को राहत देने की कोशिश में जुटे थे। बुधवार की रात एसी प्लांट पूरी तरह ठप होने के बाद मरीजों की मौत का सिलसिला शुरू हुआ तो आईसीयू की खिड़कियों को खोल दिया गया। गोविंदनगर के विनय तिवारी के पिता चार दिन से आईसीयू में भर्ती हैं। विनय ने बताया कि मरीजों की मौत का कारण तो डाक्टर्स ही बताएंगे, लेकिन बगैर एसी आईसीयू में गर्मी के कारण बुरा हाल है।


आईसीयू में 25 डिग्री से ऊपर तापमान तो खतरा बढ़ेगा

अधिकतम 25 डिग्री सेल्सियस तापमान में ही बेहतर काम कर पाने वाला लाइफ सपोर्ट सिस्टम 41.2 डिग्री तापमान में काम नहीं करता है। ऐसी गर्मी में जीवनरक्षक उपकरणों ने काम करना बंद कर देते हैं। संभवत: ऐसा ही मेडिसिन विभाग के इंसेटिव केयर यूनिट (आइसीयू) हुआ है। इस बारे में कानपुर जिला अस्पताल में ईएमओ तथा क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉ. सपन गुप्ता भी कहते हैं कि आईसीयू में लाइफ सेविंग सपोर्ट सिस्टम में शामिल एबीजी मशीन और वेंटीलेटर 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ही सुचारू रूम से काम करते हैं। तापमान अधिक होने पर दोनों मशीनों का थर्मोस्टेट (तापमान) गड़बड़ा जाता है और काम करना बंद कर देती हैं। ऐसे में लाइफ सेविंग सपोर्ट सिस्टम के सही तरीके से काम न करने पर मरीजों की मौत तक संभव होती है। उन्होंने बताया कि एसी खराब होने से बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं। इनका संक्रमण भी मरीजों की हालत गंभीर कर सकता है।