
निमोनिया को तीन दिन में ठीक करेगी यह नई दवा, यहां होगा इलाज
कानपुर। निमोनिया का संकट लंबे समय तक झेलने वाले मरीजों के लिए अच्छी खबर है कि अब निमोनिया को केवल तीन दिन की खुराक में पूरी तरह ठीक किया जा सकेगा। हालांकि यह दवा बच्चों पर प्रयोग नहीं की जाएगी। इससे केवल वयस्कों को ही लाभ मिलेगा। अभी तक सामान्य निमोनिया के लिए छह दिन की दवा दी जाती थी पर जटिल निमोनिया की चपेट में आए मरीज को लंबे समय तक नियमित रूप से दवा लेनी पड़ती है, अब इससे राहत मिल जाएगी।
यह है निमोनिया के लक्षण
निमोनिया पीडि़त मरीज को तेज बुखार के साथ बलगम वाली खांसी, सीने में हल्का दर्द होता है। खांसी के साथ हरे या भूरे रंग का गाढ़ा बलगम आता है और कभी-कभी हल्का खून भी आता है। मरीज को अत्यधिक पसीना और ठंड लगना, सांस लेने में कठिनाई, मतली व उल्टी भी इसके लक्षणों में शामिल है। इसका वायरस, बैक्टीरिया व फंगस संग संक्रमित लोगों के संपर्क में आने से फैलता है। इसमें शरीर का तापमान 101 डिग्री या इससे अधिक ऊपर होता है। मरीज के दांत किटकिटाना के साथ दिल की धडक़न बढऩा व भूख न लगना, होंठों का नीला पडऩा, बहुत ज्यादा कमजोरी लगना, बेहोशी छाना जैसे लक्षण भी सामने आते हैं।
कई प्रकार की होती निमोनिया
निमोनिया विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं जैसे बैक्टीरियल निमोनिया, वायरल निमोनिया, फंगल निमोनिया, अस्पताल से मिलने वाला जटिल और समुदाय आधारित निमोनिया है। स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया सबसे आम बैक्टीरिया है जो फेफड़ों की सूजन का कारण बनता है। अन्य बैक्टीरिया क्लैमाइडोफिला निमोनिया और लेगियोनेला न्यूमोफिला हैं। यह अधिक खतरनाक हैं जिस पर दवाओं का कम ही असर होता है, ऐसे में मरीजों को दवा की डोज बढ़ानी पड़ती है।
यहां मिलेगी दवा
हैलट के डॉक्टर नई दवा का ट्रायल करने जा रहे हैं जो निमोनिया पीडि़तों के लिए वरदान साबित होगी। इथिकल कमेटी ने रिसर्च को हरी झंडी दे दी है। मेडिसिन विभाग और चेस्ट अस्पताल के डॉक्टर मिलकर इस पर काम करेंगे। डॉक्टरों के मुताबिक खतरनाक निमोनिया के कई प्रकार हैं। इनमें जटिल निमोनिया तीन तरह से पाया जा रहा है। नई दवा इन्हें ठीक करने में कारगर साबित होगी।
इन लोगों को ज्यादा खतरा
निमोनिया से सर्वाधिक खतरा सांस रोगियों को होता है जिससे ऑक्सीजन मार्ग सिकुड़ता है। शोधकर्ता डॉ. सौरभ अग्रवाल का कहना है कि हृदय और फेफड़ों के रोगी, शराब पीने वाले, किडनी फेलियर, एचआईवी, डायबिटीज पीडि़त लोगों को ज्यादा खतरा होता है। नई दवा ऐसे रोगियों के लिए फायदेमंद देगी। हालांकि दवा सिर्फ वयस्कों के लिए ही होगी। बच्चों पर इसका प्रयोग नहीं होगा।
एंटीबायोटिक का ओवरडोज खतरनाक
सर्दी-जुकाम और निमोनिया सहित कई बीमारियों में डॉक्टर दवाइयों के साथ एंटीबायोटिक भी देते हैं। पर कई मरीज ज्यादा एंटीबायोटिक का सेवन करते हैं। अधिक या अनाप-शनाप एंटीबायोटिक नुकसान का कारण बनती हैं। डॉक्टर आमतौर पर निमोनिया के लक्षणों के आधार पर ही दवा लिखते हैं जो बुखार कम करने या ए्प्रिरन, इबुप्रोफेन, एसिटामिनोफेन और खांसी की दवाइयों जैसे दर्द निवारक के रूप में काम करती हैं। लक्षण ज्यादा गंभीर हैं तो डॉक्टर एंटीबायोटिक जैसे एंटीवायरल एजेंटों या जीवाणुरोधी दवाओं का इलाज करना पसंद कर सकते हैं।
Published on:
12 Feb 2020 01:20 pm
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