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कानपुर

एयरोस्टेट की निगहबानी के चलते ‘शुक्र है शांति’

छह हजार वालंटियर अद्र्धसैनिक बलों की पांच कंपनियां तैनात -क्विक रिस्पांस टीम के साथ ही आईआईटी के एयरोस्टेट भी मुस्तैद।

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कानपुर। पिछले शुक्रवार को सीएए के विरोध में भड़की हिंसा ने कानपुर में दो युवकों की मौत हो गई थी तो वहीं सैकड़ों लोग घायल हुए थे। जबकि 11 लाख से ज्यादा की सरकारी व प्राईवेट संपत्ति का नुकसान हुआ था। पर पुलिस-प्रशासन ने 27 तारीख को जुमे के दिन कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था की थी। जिससे के कारण शहर में हिंसा तो परिंदा भी पर नहीं मार पाया। पुलिस ने 352 मस्जिदों के अलावा संवदेनशील इलाकों में आईआईटी द्धारा बनाया गए एयरोस्टेट के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी।

आईआईटी ने दिए एयरोस्टेट
एसपी पूर्वी राजकुमार अग्रवाल कि जुमे की नमाज को देखते हुए दो कंपनी आरएएफ, दो कंपनी आईटीबीपी वा चार कंपनी पीएसी लगाई गई थीं। उन्नाव व जालौन से भी पुलिस बल बुलाया गया था। सभी प्रमुख जगहों को चिन्हित कर पुलिस बल तैनात किया गया था। एसपी का कहना है कि जो सीसीटीवी कैमरे खराब हो गए थे उनको भी सही कराया गया था। शहर में नजर रखने के लिए आईआईटी से एरोस्टैग लगाया गया हैं, जो नौ किलोमीटर के दायरे में कैमरों के माध्यम से फुटेज प्रदान करेगा।

आईआईटी ने बनाया है एयरोस्टेट
आईआईटी कानपुर के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन विजन बेस्ड तकनीक पर ड्रोन तैयार किया है। गुब्बारे के आकार के इस ड्रोन को एयरोस्टेट नाम दिया गया है। यह ड्रोन सरहद से लेकर जंगल तक की रक्षा में काम आएगा। इसके अलावा इसके जरिए आसमान से 9 से 10 किमी के दायरे की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सकती है। अयोध्या फैसले के वक्त पुलिस ने इसी के जरिए शहर की निगरानी की थी।

9 से 10 किमी पर रखता नजर
एयरोस्पेस विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर एके घोष के मुताबिक बारिश हो या आंधी-तूफान, बर्फबारी हो या गर्मी, हर मौसम में एक से 9 किलोमीटर की दूरी तक यह ड्रोन आसानी से निगरानी रख सकता है। यही नहीं पहाड़ी इलाकों में जहां इंटरनेट की सुविधा नहीं होती, वहां इसके माध्यम से लोगों तक वाईफाई की सुविधा भी पहुंचाई जा सकती है।

अयोध्या फैसले के वक्त मदद
प्रोफेसर एके घोष बताया कि अयोध्या के फैसले के वक्त पुलिस की मांग पर इसे दिया गया था। बताते हैं, गुब्बारे के अंदर डे और नाइट दोनों ही कैमरे सेट हो सकेंगे। आवश्यकतानुसार इसमें किसी भी तरह के कैमरे लगाए जा सकते हैं। इसमें एआई तकनीक के जरिये फेस डिटेक्शन तकनीक भी दी गई है। इससे कैमरे की नजर जहां-जहां घूमेगी कंट्रोल रूम में बैठा शख्स जान जाएगा कि मौके पर कितने लोग हैं और क्या कर रहे हैं। बगैर इंटरनेट भी ये काम करता है। तब विजुअल के बजाय तुरंत इंसान की संख्या आपके कंप्यूटर स्क्रीन पर होगी।

मस्जिदों में अचूक सुरक्षा
शहर की सभी 352 मस्जिदों जहां एयरोस्टेट के जरिए नजर रखी गई तो वहीं छह हजार वालंटियर के अलावा सिविल पुलिस, अर्द्धसैनिक बल के जवानों को भी तैनात किया गया था। अधिकारी खुद सड़कों पर उतरकर लोगों से बातचीत कर रहे थे। खुफिया टीम भी मस्जिदों व गली-मोहल्लों में नजर बनाए हुए थीं। तीन कंपनी आरएएफ बढ़ाने के साथ क्विक रिस्पांस की 50 टीमों को पहले से तैयार रखा गया था। पिछली जुमा की नमाज के दौरान आरएएफ (रैपिड एक्शन फोर्स) की दो कंपनियां लगाई गई थीं, इस बार इनकी संख्या पांच कर दी गई थीं। क्विक रेस्पांस टीमों की संख्या भी 10 से बढ़ाकर 50 कर दी गई थी। बाहरी जिलों से आया पुलिस बल भी तैनात किया गया था।

5 जोन में शहर को बांटा गया
सतर्कता के लिहाज से पुलिस ने शहर में सेक्टर स्कीम और दंगा नियंत्रण स्कीम लागू कर दी है। शहर को पांच सुपर जोन, 11 जोन और 65 सेक्टरों में बांटा गया था। सुपर जोन में एडीएम सिटी, एडीएम वित्त एवं राजस्व, एडीएम आपूर्ति, एडीएम न्यायिक व एडीएम एलए को तो अन्य जोन में चार एसडीएम और सात एसीएम की तैनात किए गए थे। संवेदनशील क्षेत्रों में 65 सेक्टर मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगाई गई थी। एसएसपी अनंत देव ने बताया कि धर्मगुरुओं से अपील की गई थी कि वह नमाज के बाद अमन चैन की तकरीर दें और अकीदतमंदों को सीएए के बारे में बताकर भ्रांतियां दूर करें। जिसका सभी ने दिल खोलकर सहयोग किया।