
गरीब मरीजों के लिए राहत, 10 हजार में धड़केगा दिल
कानपुर। पिछले एक सप्ताह से शहर के पारे में जबरदस्त गिरावट आई है, जिसके कारण कार्डियालॉजी के बेड दिल के रोगियों से फुल हो गए हैं। साथ ही दस से ज्यादा की इलाज के दौरान मौत हो गई है। यहां आने वाले अधिकतर मरीय हृदय रोग से पीड़ित होते हैं और अधिकतर के वाल्व में समस्या पाई जा रही है। जिनके पास धन है तो वो सजर्री करा लेते हैं, लेकिन जिनकी आर्थिक स्थित अच्छी नहीं होती वो वाल्व नहीं बदलवा पाते। पर उनके लिए अब राहत भरी खबर है। क्योंकि उनके वॉल्व की गड़बड़ी न सिर्फ बेहतर ढंग, बल्कि महज पांस से दस हजार में रूपए प्रत्यारोपण हो जाएगा। कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉक्टर विनय कृष्ण के मुताबिक अभी तक मरीजों को मेटल या जानवरों के वल्व ही लगाए जाते थे, जो महंगे होते हैं। लेकिन अब मृत इंसानों के वल्वों से कम कीमत पर ज्यादा दिनों तक दिल धड़केगा।
रोगियों के लिए राहत भरी खबर
कानपुर के अलावा आसपास के जिलों के हृदय रोगियों के लिए महज एक अस्पताल लक्ष्मीपत सिंहानिया हृदयरोग संस्थान (कार्डियोलॉजी) है। यहां पर हरदिन तीन से चार सौ दिल के मरीज आते हैं। इनमें से अधिकतर के वाल्व में खराबी होती है। एक वाल्य प्रत्यारोपण में करीब दो से तीन लाख का खर्च आता है। जिसके पास पैसा होता है तो वो वाल्य का प्रत्यारोपण करा लेता हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर मरीज दवाओं के सहारे दिल को धड़काता है। लेकिन अब इन मरीजों के लिए खुशखबरी है। कार्डियोलॉजी में जल्द ही महज पांच से दस हजार रूपए में वाल्य बदला जा सकेगा। इसके लिए बेंगलुरु के सत्यसाईं इंस्टीट्यूट और हृदय रोग संस्थान के बीच अगले वर्ष एमओयू साइन होने वाला है। वहां से निशुल्क वॉल्व आएंगे, जिस पर मरीजों को 5 से 10 हजार रुपये में ऑपरेशन कर लगा दिए जाएंगे।
इन वाल्वों की उम्र अधिक
कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉक्टर विनय कृष्ण बताते हैं कि असली वॉल्व (होमोग्राफ्ट) से रोगियों को काफी सहूलियत मिलेगी। उनके इलाज का खर्चा बहुत ही कम हो जाएगा। यह प्रत्यारोपण अप्रैल से शुरू करने की तैयारी है। बताया, अभी मेटल या जानवरों का वॉल्व लगाया जाता है, जिसकी कीमत 65 हजार से ढाई लाख रुपये के बीच है।मेटल वाल्व में हमेशा खून पतला करने वाली दवाएं खानी पड़ती हैं। नियमित जांच की आवश्यकता होती है। इन वॉल्व की उम्र भी अधिक नहीं होती है। बायोलॉजिकल वॉल्व की उम्र 8-10 साल होती है। पर ये वाल्व कम कीमत पर ज्यादा दिनों तक धड़केंगे।
बनेंगा वाल्व बैंक
कार्डियोलॉजी में इसके लिए यहां वॉल्व बैंक बनाएगा। इसके लिए संस्थान अपने यहां बैंक स्थापित के लिए भी आवेदन करने जा रहा है। पहले चरण में सत्यसाईं इंस्टीट्यूट की ओर से मिलने वाले वॉल्व से बैंक स्थापित किया जाएगा। इसमें मरीजों की संख्या के मुताबिक वॉल्व रखे जाएंगे। कार्डियोलॉजी के डॉक्टर राकेश वर्मा के मुताबिक शव संक्रमित होने से पहले वॉल्व निकाले जा सकते हैं। इसमें समय सीमा नहीं होती है लेकिन अगर संक्रमण है तो वह वॉल्व काम के नहीं होते, इसीलिए निकालने से पहले पूरी जांच की जाती है। वॉल्व को बॉक्स में सुरक्षित किया जाता है, उस बॉक्स का निश्चित तापमान होता है, उसे ले जाने में कोई दिक्कत नहीं होती है।
दो से तीन वाल्व का प्रत्यारोपण
कानपुर कार्डियालॉजी में हरदिन दो से तीन मरीजों के वाल्व प्रत्योरापण किए जाते हैं। जिनकी कीमत 65 हजार से लेकर तीन लाख रूपए तक है। अधिकतर ये वो मरीज होते हैं, जो आर्थिक रूप से मजबूत होते हैं। ब्रम्हपुरी निवासी अनूप ने बताया कि पिछले साल डॉक्टरों ने वाल्प प्रत्यारोपण की सलाह दी थी, लेकिन कीमत ज्यादा होने के चलते हमने सजर्री नहीं कराई। ठंड पड़ते ही दिल में दर्द बढ़ा तो कार्डियालॉजी आए। डॉक्टरों ने जल्द से जल्द वल्प प्रत्यारोपण की सलाह दी है। वहीं काकादेव निवासी संजीव भी दिल का इलाज करवाने के लिए अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने देखते ही वाल्व बदलवाने की सलाह दे डाली। पर सस्ते वाल्व की जानकारी मिलते ही उनके चेहरे में हल्की सह मुस्कान दिखी।
Published on:
26 Dec 2018 09:03 am
बड़ी खबरें
View Allकानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
