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उड़ा रंग गुलाल, माहौल में घुली मस्ती

सुबह हटिया से ठेले और झांकियां निकलीं, जिसमें लाखों की संख्या में कनपुर के लोग शामिल हुए। जिस-जिस गली से झांकी निकली, घरों की छत से महिलाओं ने रंग गुलाल उड़ाया

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Ruchi Sharma

Mar 28, 2016

holi

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कानपुर.सुबह हटिया से ठेले और झांकियां निकलीं, जिसमें लाखों की संख्या में कनपुर के लोग शामिल हुए। जिस-जिस गली से झांकी निकली, घरों की छत से महिलाओं ने रंग गुलाल उड़ाया। झांकी शाम तीन बजे हटिया पहुंची, जहां रंग और गुलाल में सराबोर चार दोस्त गले मिले। कोई अफसाफ खान था तो कई मनिंदर सिंह, या बिलियम्स के साथ थे राजेश भाई।

गंगा मेले में सभी एक रंग में रंगे थे। ऐसा नजारा कानपुर के गंगा मेला के अलावा और कहीं आपको देखने को नहीं मिल सकता। रमजानी भाई फाग गाते तो मनिंदर सिंह भांगड़ा की धुन में थिरकते। सुबह 10 बजे रंजनबाबू पार्क से रंग ठेला उठा, जो जरनलगंज बाजार, मनीराम बगिया, मेस्टन रोड, चौक, टोपी बाजार, कोतवालेश्वर मंदिर, चौक सराफा, कोतवाली चौराहा, संगमलाल मंदिर, कमला टॉवर, फीलखाना, बिरहना रोड, नयागंज, मारवाड़ी कॉलेज, हुलागंज, नयागंज डाकखाना, लाठी मोहाल, जरनलगंज होते हुए शाम 3:30 पर रज्जन पार्क लौटा।

जब गोरों ने कहा, वन फोटो प्लीज

हटिया बाजार के रज्जनबाबू पार्क से जैसे ही रंग ठेला निकला, वैसे ही लाखों की संख्या में बैंडबाजा और भांगड़ा की धुन में कनपुर के लोग थिरके। रंग ठेला में शामिल कोई अमीर था न गरीब, हिंदू था न मुसलाम और सिख न इसाई। सभी के चेहरे रंग से लाल थे, तभी तो बिद्रिश से आए गोरे अंग्रेजी में कह रहे थे, यू आर ग्रेट, वन फोटे प्लीज। कंपू वालों ने सेल्फी संग अंग्रेजों के चेहरों को भी काले रंग से पोत दिया। बता दें गंगा मेला देखने के लिए विदेश से सैकड़ों लोग आते हैं और हटिया बाजार से ही वह भी रंग ठेले के साथ चलते हैं। इस साल बिट्रिस, कनाडा, जर्मनी सहित अन्य देशों के लोग इतिहासिक गंगा मेले में शामिल हुए।

मटकी फोड़ी गई, जमकर रंगबाजी हुई

बिरहना रोड और काहूकोठी में गंगा मेला के अवसर पर यहां के रहवासियों ने मटकी फोड़ने का आयोजन रखा था। बिरहनारोड में मटकी फोड़ने पर वहां के व्यापारियों ने इनाम रखा हुआ था। जब रंग ठेला पहुंचा तो साथ चल रहे युवाओं की टोलियों ने एक-एक कर मटकी फोड़ने की जोर आजमाइश की, लेकिन बिरहनारोड की मटकी काली मठिया की टोली ने मटका को फोड़कर इनाम जीता।वहीं काहूकोठी की मटकी पर हटिया बाजार के छोरों ने हाथ मारा। इस दौरान दही के साथ भांग व गुझिया और ठड्डू खिलाकर रंग ठेला में शामिल लोगों की खातिरदारी की गई। महिलाओं ने रंग और गुलाल उड़कर रंग ठेला को आगे बढ़ाया।

स्वतंत्रता सेनानियों को किया गया याद

गंगा मेला हटिया बाजार में शाम के 3:30 पर स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया गया। हटिया मेला समिति के संयोजक विश्नोई जी ने यहां मौजूद लाखों लोगों को बताया कि किस तरह अंग्रेजी सरकार के खिलाफ रज्जनबाबू पार्क में 45 युवाओं ने भाग लिया था और अंग्रेज सरकार का झंडा उतारकर भारत का तिरंगा फहराया था। कहा, उसी दिन से कानपुर में आजादी की बयार बही और सब धर्म के लोग एक हुए, जो कभी जुदा नहीं हुए।

कहा, 90 के दशक में हमारी गंगा जमुनी की तहजीब को तोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन टूट कर ऐसे जुड़े की हनें अब कोई टोड़ने के बारे में सोच नहीं सकता। जिसकी एक मिसाल यहां खड़े हर समुदा़य के लोह प्रतीक हैं। इस दौरान गणेश शंकर विद्यार्थी की प्रतिमा पर फूल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। पंडित चंद्रशेखर आजाग, शहीद भगत सिंह और राजगुरु को भी याद कर उनके द्वारा किए गए काम की जानकारी युवाओं को दी गई।

बैला ठेला, लोगों को जमकर भाया

रंग ठेला मेला में आज लोगों के आकर्षण का केंद्र बैला ठेला रहा। बैला ठेला की शुरुआत 1942 में हुई थी, जब अंग्रेज सरकार ने उन 45 युवाओं को रिहा किया, तब इन्ही ठेलों में युवाओं को बैठाकर पहले पूरे शहर में घुमाया गया था। तब से बैला ठेला का प्रचलन चला आ रहा है। बैला ठेले में युवा सवार थे और भारत माता के जयकारे लगा रहे थे। तो कोई मेरा रंग दे बसंती चोला गाकर देश प्रेम के जज्बे से पूरे महौल को खुशनुमा बना रहे थे। महिलाएं, युवक और युवतियों के अलावा बुजुर्ग भी आज मेले में शामिल रहे। शाम को रंग ठेला मेला सरसैया घाट पहुंचेगा, जहां लाखों लोग स्नान ध्यान कर अगले साल फिर से मिलने की बात कहकर घर वापस आएंगे।

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