कानपुर। हिअ बरसे रंग अटरियन से, कंपू की होरी के का कहने, खुल जावै धरम जाति की गांठें, जब महके टेसू घर आंगन मा, जब दौर चले ठंडाइन के, बजे ढोल चैपालन मा। हां कुछ इसी प्रकार का नजारा हटिया बजार से निकली होरियारों की टोली में दिखा। रंबगजों की होली में आज गंगा जमुनी तहजीब का रंग जमकर बरशा, जिसमें युवा, युवतियां, बुजुर्ग और महिलाओं के अलावा नेता, कारोबारी, मजदूर और किसान, रंगों की धार में तार – तार हो गए।
भैंसा ठेला देख लोग मंत्रमुग्ध
एतिहासिक गंगामेला को यादगार बनाने के लिए डीएम विजय विश्वास पंत और एसएसपी अनंत देव तिवारी हटिया पहुंचे। डीएम ने हटिया के रज्जन पार्क में लगे होली मेले के इतिहास के शिलालेख का अनावरण करने के बाद रंग ठेले को हरी झंडी.दिखाकर रवाना किया। रंगबाजों की टोलियों के अलावा 1942 की झांकियां, अंग्रेज अफसर के रूप में क्रांतिकारियों पर हंटर चलाते बच्चों की झांकियां, ऊंट, घोड़े और भगवान भोलेनाथ की सवारी लोगों ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंग से भरे बड़े बड़े ड्रम रखने के लिए तीन भैंसा ठेला, तीन ट्रैक्टर और छह टेंपो ट्राली होरियारों के साथ थे।
इन मोहल्लों में घूमा रंग ठेला
बिरहाना रोड काहूकोठी सहित कई जगह मटकी फोड़ का आयोजन किया गया । रंग ठेले में सैकड़ों व्यापारी और क्षेत्रीय लोग शामिल रहे। रंग ठेला हटिया के रज्जन बाबू पार्क से सुबह 10 बजे उठा और यहां से जनरलगंज बाजार, मनीराम बगिया, मेस्टन रोड, चैक, टोपी बाजार, कोतवालेश्वर मंदिर चैक, चैक सराफा, कोतवाली चैराहा, संगमलाल मंदिर, कमला टावर, फीलखाना, बिरहाना रोड, नयागंज चैराहा, मारवाड़ी कालेज, हुलागंज, नयागंज डाकखाना, लाठी मोहाल, जनरलगंज से हटिया रज्जन लाल पार्क में लौटा और यहां से गंगाघाट की तरफ चल पड़ा।
1942 में पड़ी थी नींव
हटिया बाजार मेला आयोजक ज्ञानेंद्र विश्नोई ने बताया गंगा मेले की आयोजन की नींव 1942 को रखी गई थी। बताया, होली के दिन हटिया बाजार में मौजूद रज्जन बाबू पार्क में यहां के नौजवानों ने अंग्रेजी हुकूमत की परवाह किए बगैर तिरंगा फहराकर गुलाल उड़ाकर नाच गा रहे थे। तभी इसकी भनक अंग्रेजी हुक्मरानों को लग गई। अंग्रेज सिपाही मौके पर आए और झंडा उतारने लगे। नौजवानों ने इसका विरोध किया तो अंग्रेज सिपाहियों ने ं गुलाब चंद्र सेठ, बुद्धूलाल मेहरोत्रा, नवीन शर्मा, विश्वनाथ टंडन, हमीद खान और गिरिधर शर्मा सहित करीब 45 लोगों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया।
अंग्रेजों की उड़ी नींद
ज्ञानेंद्र विश्नोई बताते हैं, अंग्रेजों के इस कदम से कानपुर का पूरा बाजार बंद हो गया। मजदूर, साहित्यकार, व्यापारी और आम जनता ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया। मजदूरों ने फैक्ट्रियों में ताले जड़ दिए तो ट्रांस्पोटरों ने भी हड़ताल कर दी। लोगों के इस आंदोलन को देख अंग्रेज हुक्मरानों की नींद उड़ गई। इस आंदोलन में गणेश शंकर विद्यार्थी, दयाराम मुंशी, हशरत मोहानी जैसे क्रांतिकारी अगुवाई करने लगे। पंडित जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी ने भी कानपुर के आंदोलन का पूरा समर्थन किया।
जेल के बाहर लगा रंगबाजों का मेला
ज्ञानेंद्र विश्नोई बताते हैं, हड़ताल के चैथे दिन अंग्रेज का एक वरिष्ठ अफसर ने यहां आकर लोगों से बात की। इसके बाद होली के पांचवें दिन अनुराधा नक्षत्र के दिन सभी पकड़े गए युवकों को रिहा किया गया। अनुराधा नक्षत्र के दिन जब नौजवानों को जेल से रिहा किया जा रहा था, तब पूरा शहर उनके लेने के लिए जेल के बाहर इकठ्ठा हो गए थे। जेल से रिहा हुए क्रांतिवीरों के चेहरे पर रंग लगे हुए थे। रिहा होने के बाद जुलूस पूरा शहर घूमते हुए हटिया बाजार में आकर खत्म हुआ। इनके रिहाई को लेकर यहां जमकर होली खेली गई।