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सैकड़ो वर्ष पुराने शिव के इस धाम की है विशेषता, बड़ी चमत्कारिक है कहानी

कभी घना जंगल हुआ करता था, आज भोलेश्वर धाम भक्तों की कतार लगती है। सावन में होते हैं विशेष पूजन, करीब 100 वर्ष प्राचीन इस मंदिर की अदभुत कहानी है।

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bholeshwar temple

सैकड़ो वर्ष पुराने शिव के इस धाम की है विशेषता, बड़ी चमत्कारिक है कहानी

कानपुर देहात-भोलेनाथ के अनेकों प्राचीन मंदिर विख्यात हैं, जहां भक्तों का सैलाब उमड़ता है। इन मंदिरों जी अलग-अलग मान्यताएं हैं। जिसके चलते श्रद्धालुओं का तांता लगता है। ऐसा ही एक सैकड़ों वर्ष प्राचीन शिव मंदिर जिले के झींझक नगर में स्थित है। यह भोलेश्वर महादेव मंदिर भक्तों की आस्था व आराधना का प्रमुख केंद्र है। सावन के माह में भक्त बड़ी संख्या में यहां आकर भगवान शंकर का पूजन अर्चन करते हैं। सावन के सोमवार को होने वाले रुद्राभिषेक व विशेष पूजन में दूरस्थ स्थानों से आने वाले श्रद्धालु भाग लेकर मनौतियां भी मानते हैं।

मंदिर का है ये प्राचीन इतिहास

झींझक स्थित इस भोलेश्वर धाम में करीब सौ साल पहले बियाबान जंगल हुआ करता था। बुजुर्गों के अनुसार यहां बनी रेलवे क्रासिंग पर तैनात एक रेलवे कर्मी को एक रात स्वप्न आया। जिसमें कहा गया कि झाड़ियों के बीच एक पत्थर की शिवलिंग है। दूसरे दिन वह रेलकर्मी जब यहां पहुंचा तो टीले पर झाड़ियों में विशाल शिवलिंग मिला। इसके बाद उसने वहीं पर साफ सफाई कर भगवान शिव की पूजा अर्चना शुरू की और शिवलिंग स्थापना कराते हुए भव्य मंदिर का निर्माण करा दिया। मान्यता है कि ईश्वर की ऐसी कृपा हुई कि इस बीच उसका प्रमोशन रेलवे गार्ड के पद पर हो गया। समय गुजरते मंदिर के जीर्ण शीर्ण होने पर स्थानीय लोगों ने भोलेश्वर महादेव मंदिर सेवा समिति बनाकर इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। मौजूदा समय में यह मंदिर भक्तों की आराधना व आस्था का केन्द्र बना है।

बोले पुजारी मनौतियां होती हैं पूरी

मंदिर के पुजारी आलोक कुमार ने बताया कि भगवान भोलेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित भगवान शंकर का पूजन कर महामृत्युंजय का जप करने से मनुष्य के सभी कष्ट नष्ट हो जाते हैं। जबकि सावन के अंतिम सोमवार को होने वाले रुद्राभिषेक व विशेष पूजन में भाग लेकर इस पौराणिक शिवालय में पंचाक्षरी मंत्र ऊं नम: शिवाय के जप से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मनौतियां पूरी होने पर श्रद्धालु पूजन कर घंटे व ध्वज भी चढ़ाते हैं।