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कानपुर देहात के इस ऐतिहासिक मंदिर की अद्भुत कहानी, सिर कटे मुर्गे की होती है पूजा

खासतौर पर नवरात्रि में दूर दराज के लोग यहां मनौती मांगने आते हैं। इस सिर कटे मुर्गे के पीछे लोगों की अलग अलग मान्यताएं है।

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कानपुर देहात. रसूलाबाद क्षेत्र के लाला भगत स्थित देवी मंदिर की मान्यता अनोखी है। इस देवगांव में स्थित देवी मंदिर में स्थापित सिर कटे मुर्गे की पूजा करने की प्रथा वर्षों से चली आ रही है। लोग इसे कौमारी देवी के मंदिर के नाम से भी जानते हैं। वर्ष भर यहां लोग दर्शन के लिए आते हैं। लोगों की मान्यता है कि, पहले इस स्थान पर जंगल था। गुप्तकाल के पुजारी रामस्वरूप अक्सर उस स्थान से गुजरा करते थे और उस मंदिर को जर्जर देख विचलित होते थे। उन्होंने उस मंदिर का जीर्णाेद्धार कराया। उसमें विधि विधान पूजन कर मुर्गे की प्रतिमा स्थापित कराई और उन्होंने पूजा अर्चना प्रारम्भ कर दी। वह रोजाना वहां आकर पूजा करने लगे।

एक दिन अचानक मंदिर में पूजा करते समय उन्हें मुर्गे की बांग सुनाई दी। आंख खोलने पर वह इधर उधर देखने लगे और सोचा इस जंगल में तो कोई मुर्गा नहीं है। फिर उन्होंने पत्थर का मुर्गा देखा तो उसके सिर से खून निकल रहा था। यह नजारा देख वह अचंम्भित हो गये। और पुजारी उस मुर्गे को नमन करते हुये जमीन पर लेट गये। तब से लेकर आज तक इस मंदिर में लोग सिर कटे पत्थर के मुर्गे की पूजा करते हैं।