
जर्जर इमारतें : मौत की छत तले हजारों जिंदगियां सांस लेने को मजबूर
कानपुर। किसी भी स्थिति में लोगों को अपनी जान से ज्यादा प्यारा और कुछ नहीं होता, लेकिन इस शहर में हजारों की संख्या में ऐसे लोग हैं जिन्हें अपनी जान से ज्यादा प्यारा अपना घर है. कारण है कि जिसको ये लोग छत समझ रहे हैं वो कभी भी मौत बनकर उन पर गिर सकती है. यह बात उन्हें भी अच्छी तरह मालूम है. इसके बावजूद वे घर छोडऩे को तैयार नहीं हैं. बीते साल बारिश के दौरान जर्जर मकान की छत ढहने से एक की परिवार के तीन लोग मर गए. इस साल फिर कुछ ऐसे ही हालात हैं. सैकड़ों जर्जर हो चुके मकानों में हजारों जिंदगियों पर मौत का साया मंडरा रहा है.
आखिर कौन लेगा इसकी जिम्मेदारी
बीते शुक्रवार को चमगनंज में एक बेहद जर्जर मकान की छत का बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया. इस घटना में एक ही परिवार के आधा दर्जन लोग फंस गए. उन्हें सुरक्षित तरीके से वहां से निकाल तो लिया गया, लेकिन अब इस मकान के अंदर जाने के नाम से ही लोगों के रोंगटे खड़े हो उठते हैं. शहर में ऐसे सैकड़ों मकान हैं, जिन्हें नगर निगम जर्जर घोषित कर चुका है. इसके बावजूद इन घरों में लोग अपनी जान दांव पर लगा कर रहने को मजबूर हैं. ऐसे में सवाल यह भी खड़ा होता है कि अगर कोई हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी.
50 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं
नगर निगम व केडीए ने शहर में कई कॉलोनियां भी बनाई हैं. इसके अलावा साउथ सिटी में कई ऐसी कॉलोनियां हैं, जोकि अब बिल्कुल जर्जर हालत में हैं. इन कॉलोनियों में 50 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं. इनमें से कई कॉलोनियों को खुद नगर निगम भी जर्जर घोषित कर चुका है, लेकिन न तो कभी इन कॉलोनियों को खाली कराने की कोई पहल हुई और न इनकी मरम्मत का कोई इंतजाम हुआ.
केडीए ने की आंखें बंद
शहर में बेतरतीब और अवैध कंस्ट्रक्शन की वजह से भी हादसों का खतरा काफी बढ़ गया है. खासकर कुछ इलाकों में अवैध निर्माण को लेकर तो केडीए ने आंख की बंद कर रखी है. चकेरी के गज्जूपुरवा में अवैध निर्माण की वजह से गिरी सपा नेता की बिल्डिंग में दब कर कई जानें गई थीं. इसके बाद भी अधिकारियों ने कोई सबक नहीं सीखा. शहर के कई घने इलाकों में धड़ल्ले से अवैध निर्माण चल रहा है. छोटी छोटी जगहों पर बहुमंजिला अपार्टमेंट तान दिए गए हैं. शुक्रवार को जुबली रोड पर हुए हादसे की एक वजह बेतरतीब कंस्ट्रक्शन के रूप में भी सामने आई है.
इन जोन में हैं इतने जर्जर मकान
जोन नं. 1 में 280 मकान जर्जर हैं. वहीं जोन 2 में 7 मकान. जोन नं. 3 में 24, जोन 4 में 137, जोन 5 में 19 और जोन 6 में 2 मकान पूरी तरह से जर्जर हैं. इतना ही नहीं, इससे पहले भी यहां मकान की वजह से कई जानें जा चुकी हैं. जुलाई 2017 में किदवई नगर सफेद कालोनी में जर्जर मकान ढहने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हुई थी. फरवरी 2017 में चकेरी के गज्जूपुरवा में सपा नेता की निर्माणाधीन बिल्डिंग ढहने से 10 लोगसें की मौत हुई. 2017 में ही मेडिकल कॉलेज में जर्जर मकान की छत पर पेड़ गिरने से एक वृद्धा की मौत हुई. 2013 में शारदा नगर में भारी बारिश से कच्ची छत ढह गई और 2 लोगों की मौत हो गई.
इन क्षेत्रों में है सबसे ज्यादा खतरा
बताया जा रहा है कि इन जर्जर मकानों को लेकर सबसे ज्यादा जूही सफेद कालोनी, लाल कालोनी,परमट, ग्वालटोली, पुराना कानपुर, चौक सर्राफा, बादशाहीनाका, चमनगंज, बेकनगंज, हरवंश मोहाल जैसे इलाकों में खतरा बना रहता है.
Published on:
07 Jul 2018 02:34 pm

बड़ी खबरें
View Allकानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
