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इस लोकसभा सीट पर कांग्रेस और भाजपा का रहा बडा दबदबा, मतदाताओं की कुछ ऐसी रही ख्वाहिश

मतादाताओं ने 13 बार हुए लोकसभा चुनाव में यहाँ 5 बार कांग्रेस, दो बार जनता पार्टी, दो बार भाजपा और दो बार जनता दल को संसदीय क्षेत्र की कमान सौंपी। वहीं एक-एक बार सपा व बसपा को भी मौका दिया गया।

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इस लोकसभा सीट पर कांग्रेस और भाजपा का रहा बडा दबदबा, मतदाताओं की कुछ ऐसी रही ख्वाहिश

कानपुर देहात-जिले की लोकसभा सीट का बड़ा ही अजीब इतिहास रहा है। यहां के मतदाता हमेशा ही भिन्न भिन्न क्षेत्र से जुड़ते रहे हैं। 1957 में पहली बार संसदीय क्षेत्र के रूप में घाटमपुर लोकसभा अस्तित्व में आया, जो 2009 के परिसीमन में खत्म हो गया। इस नए परिसीमन में अकबरपुर लोकसभा जिले के अस्तित्व में आ गयी। यहां के मतादाताओं ने 13 बार हुए लोजसभा चुनाव में 5 बार कांग्रेस, दो बार जनता पार्टी, दो बार भाजपा और दो बार जनता दल को संसदीय क्षेत्र की कमान सौंपी। वहीं एक-एक बार सपा व बसपा को भी मौका दिया गया। इस लोकसभा क्षेत्र से जुड़े कानपुर नगर, फतेहपुर व जिले के मतदाता चार लोकसभा क्षेत्रों में हिस्सेदारी कर रहे हैं। फतेहपुर की जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र के अतिरिक्त कानपुर नगर की घाटमपुर व कानपुर देहात की भोगनीपुर, राजपुर व डेरापुर विधानसभा क्षेत्रों को जोड़कर 1957 में घाटमपुर लोकसभा क्षेत्र का सृजन किया गया था।

शुरुवात में यहां से चार बार लगातार कांग्रेस से तुलाराम ने जीत दर्ज की। फिर 1977 में जनता पार्टी की लहर में कांग्रेस की जड़ उखड़ गई और जनता पार्टी से ज्वाला प्रसाद कुरील ने पहली बार विपक्ष का परचम लहराया। इसके बाद 1980 के उपचुनाव में जनता पार्टी से ही आसकरन संखवार जीते। वहीं 1984 के चुनाव में आसकरन ने कांग्रेस का झंडा थाम एक बार फिर से परचम लहरा दिया। 1989 के चुनाव में जनता दल से केशरीलाल चुनाव जीतकर संसद पहुंच गए। 1991 के चुनाव में फिर से जनता ने उनको चुनकर सांसद बनाया लेकिन 1996 के चुनाव में भाजपा की लहर आई और कमलरानी वरुण ने चुनाव जीतकर भाजपा का खाता खोल दिया।

1998 के चुनाव में वह दोबारा सांसद बनी लेकिन 1999 के चुनाव में बसपा से प्यारेलाल संखवार ने झंडा गाड़ दिया और चुनाव जीतकर बसपा का भी खाता खोल दिया। 2004 के चुनाव में सपा से उतरे राधेश्याम कोरी ने चुनाव जीतकर सपा का परचम लहराया। फिर जब 2009 में परिसीमन हुआ तो घाटमपुर लोकसभा का अस्तित्व खत्म हो गया। इससे जुड़े भोगनीपुर विधानसभा को जालौन गरौठा संसदीय क्षेत्र में, राजपुर व डेरापुर दोनों विधानसभाओं को जोड़कर बनी सिकन्दरा विधानसभा को इटावा लोकसभा में जोड़ दिया गया। हालांकि डेरापुर विधानसभा क्षेत्र के आधे हिस्से को लेकर अस्तित्व में आये रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र को कन्नौज संसदीय क्षेत्र में सम्मिलित किया गया। आज घाटमपुर विधानसभा क्षेत्र अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा बन चुका है। यहां लोकसभा का यह तीसरा चुनाव होना है।