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अब बिना झटके चलिए वंदे भारत के साथ, तकनीक ने बढ़ा दी सुविधा

Indian Railway: स्वर्ण शताब्दी की तरह वंदेभार में भी आरामदायक सीटें होंगी। आकस्मिक ब्रेक लगाने पर भी ब्रेक असेंबली जाम न होगी।

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Indian Railway: No shocks in journey of Vande Bharat Facilities Increased by High Technology

Indian Railway: No shocks in journey of Vande Bharat Facilities Increased by High Technology

दिल्ली से वाराणसी वाया कानपुर चलने वाली वंदेभारत एक्सप्रेस के कोचों का जल्द ही कायाकल्प होगा। सब कुछ ठीकठाक रहा तो अगस्त में इस ट्रेन के कोच आधुनिक तकनीक से लैस होंगे। आकस्मिक ब्रेक लगाने पर न तो ब्रेक असेंबली जाम होगी और न ही यात्रियों को झटका लगेगा। इसकी सीटें भी स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस की तरह आरामदायक यानी कि लचकदार होंगी। अभी वंदेभारत की सीटें बैठने पर स्टेट बनी रहती हैं। इससे यात्रियों को दिक्कतें होती थीं।

15 फरवरी-2019 को पीएम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्टेशन से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखा रवाना किया था। सात लाख से अधिक किमी. की दूरी तय करने के बाद इसके कोचों का कायाकल्प और अधिक सुविधाजनक बनाया जा रहा है। इसका एलान रेल मंत्रालय ने कर भी दिया है। आरामदायक सीटें न होने पर यात्रियों ने सुझाव भी दिए थे। इसके मद्देनजर ही सीटों के साथ ही इस ट्रेन के कोचों की तकनीक भी अपग्रेड हो रही है।

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पर अभी फुल स्पीड से नहीं चल पा रही वंदेभारत

दिल्ली से कानपुर तक वंदेभारत एक्सप्रेस 130 किमी. की गति से चलती है, जबकि प्रयागराज से वाराणसी के बीच इसकी गति अधिकतम 110 किमी. की ही रहती है। इसकी वजह ट्रैक है। प्रयागराज से वाराणसी के ट्रैक के उच्चीकरण का काम हो रहा है। साल के अंत तक यह ट्रेन भी फुल स्पीड से दौड़ने लगेगी तो पौन घंटे तक का सफर कानपुर से दिल्ली के बीच का कम होगा।

स्वर्ण शताब्दी में 12 साल बाद बदले थे कोच

दिल्ली से लखनऊ वाया कानपुर चल रही स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस वर्ष 1989 में चली थी। इस ट्रेन का तब नाम शताब्दी एक्सप्रेस था। मई-2001 में इस ट्रेन में जर्मन कोच लगे तो इस ट्रेन का नाम स्वर्ण शताब्दी कर दिया गया था। रेलवे ने आधुनिक कोच लगते ही किराया दस फीसदी बढ़ा लिया था। जर्मन कोच लगते ही ट्रेन की कपलिंग खुलने लगी थी तो बाद में स्वदेशी तकनीक की कपलिंग लगी तो समस्या का समाधान हुआ था।

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