जब बसपा का गठन हुआ था तब एक युवा नेता आदित्य पांडेय ने फतेहपुर जिले की जहानाबाद विधानसभा में दबंगों के खिलाफ खड़े होकर लड़ाई लड़ी। पहले दलितों की मैला ढोने की प्रथा के लिए सड़क पर उतरकर लड़ाई की। बसपा से तीन बार चुनाव लड़ा, लेकिन दो बार उन्हें हार मिली। लेकिन कुर्मी बहूल्य सीट से पांडेय ने 2007 में सपा के कद्दावर नेता मदन गोपाल उमराव को हराया था। पांडेय ने अपनी विधायकी के दौरान दलितों को जमीन दिलवाई, स्कूल से लेकर गांव - गांव सड़क बनवाई। लेकिन नसीमुद्दीन सिद्दकी की चाटुकारी नहीं की, जिसका खामियाजा उन्हें 2012 में उठाना पड़ा। नसीमुद्दीन के कहने पर नामंकन के महज पंद्रह दिन पहले उनका टिकट काट कर एक व्यापारी को दे दिया गया। पूर्व विधायक ने बताया कि आज बसपा की जो दुर्गति हो रही है, इसके पीछे सिर्फ एक आदमी का हाथ है, जिसका नाम नसीमुद्दीन सिद्दकी है।