9 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लेडी सिपाही से दरोगा कर बैठा प्यार , थाने में भावना के साथ फेरे लिए 7

दो साल से दोनों के बीच चल रहा था प्रेम-प्रसंग, दहेज के साथ फिजूलखर्चे से बचने के लिए थाने में पुलिसवालों की मौजूदगी में की शादी

2 min read
Google source verification
दो साल से दोनों के बीच चल रहा था प्रेम-प्रसंग, दहेज के साथ फिजूलखर्चे से बचने के लिए थाने में पुलिसवालों की मौजूदगी में की शादी

कानपुर। बचपन से उसके अंदर देश सेवा करने का जज्बा था और उसे वर्दी से बेइन्ताह प्यार था। शिक्षा पूरी करने बाद उसने सेना और पुलिस में सब इंस्पेक्टर पद के लिए अप्लाई किया और उसका चयन पुलिस में हो गया। ट्रेनिंग के बाद उसे तैनाती मिली, जिस पर वी अपने फर्ज को पूरी इमानदारी से निभाता रहा। सब इंस्पेक्टर के कार्य को देख एसएसपी ने उसकी तैनाती रेलबाजार थाने में कर दी। इसी दौरान थानेदार की मुलाकाम कैंट थाने में तैनात लेडी सिपाही से हुई। दोनों अच्छे दोस्त बन गए और फिर दोस्ती प्यार में बदल गई। थानेदार ने लेडी सिपाही से विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे उसने स्वीकार कर लिया। पर शादी किसी होटल, गेस्टहाउस के बजाए अपने थाने में करने की दोनों ने ठानी। मंगलवार को अपने पुलिसबल की मौजूदगी में दोनों ने विधि-विधान से सात फेरे लिए और जीवन भर की डोर में बंध गए। इस अवसर पर थाने के पुलिसकर्मियों ने जमकर डांस किया और बराती और जनाती का फर्ज अदा किया
पुलिसवाले बने बराती -जनाती
रेल बाजार थाने में तैनात दरोगा गिर्जेश यादव का कैंट थाने में तैनात महिला सिपाही भावना तोमर से पिछले दो साल से अफेयर चल रहा था। दोनों अकसर चोरी-चोरी, चुपके-चुपके मिलते-जुलते थे। इसकी जानकारी उनके कुछ फ्रेंड्स के अलावा थाने के चंद सहकर्मियों को थी। रविवार रात भावना ड्यूटी के बाद घर के लिए निकली, पर रास्ते में कहीं गायब हो गई। उसका मोबाइल नंबर भी बंद बता रहा था। भावना के परिजनों ने डायल 100 पर इसकी सूचना दी। पुलिस तत्काल सक्रिय हुई। मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाली गई। आखिरकार भावना की लोकेशन बाबूपुरवा कोतवाली के पीछे बनी पुलिस कालोनी में मिली। जब पुलिस ने गिर्जेश और वहां मौजूद भावना से पूछताछ की, तब सारी कहानी सामने आ गई। आखिरकार मंगलवार को थाने में ही दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाकर शादी रचा ली। घराती-बराती की भूमिका सहकर्मियों ने निभाई।
जब चंदे कर दिया था दहेज लोभियों को पैसा
दरोगा गिर्जेश यादव ने बताया कि दस साल पहले की घटना है। हमारे गांव में पड़ोसी के घर बारात आई थी। लड़कीपक्ष वालों ने बारातियों की जमकर खातिरदारी की, लेकिन लड़के के पिता ने लड़की के पिता से दहेज के रूपए की डिमांड कर दी। लड़की के पिता के पास उतने पैसे नहीं और उसने अपने होने वाले समधी से समय मांगा पर वह बिना पैसे के एक भी रश्म नहीं होने पर अड़ गए। तब गांव के लोगों ने चंदा कर दहेज के लोभियों को पैसा दिया, जिसका मैंने खुलकर विरोध किया, पर मेरी नहीं चली। उसी दिन तय कर लिया कि मै अपनी शादी में एक पैसा नहीं लूंगा और होटल’गेस्हाउस के बजाए सीधे-साधे तरीके से विवाह करूंगा और मेरा प्रण मेरी पत्नी ने पूरा करा दिया।
पिता थे विवाह के खिलाफ
थानेदार गिर्जेश यादव ने बताया कि पिता ने उन्हें पढ़ा लिखाकर बड़ा किया और उनका सपना था कि वह मेरी शादी बड़ी धूमधाम के साथ करेंगे। पर मैंने उन्हें पहले ही बता दिया था कि मैं अपनी शादी बिना पैसे के करूंगा। इसी दौरान मेरी मुलाकात भावना से हो गई। हम दोनों अच्छे दोस्त थे। तभी मैंने अपने दिल की बात भावना को बताई। वह मेरी बात सुनकर रोने लगी। भावना ने कहा कि आप जैसे लोग इस दुनिया में बहुत कम है और मैं अपने आपको सौभग्यमान समझती हूं कि मेरे होने वाले पति बनें। फिर क्या था हमने शादी की तैयारी कर ली। मैंने भावना से कहा कि होटल, गेस्टहाउस के बजाए अपने थाने में मैं तुम्हारे साथ सात फेरे लूंगा और वह मान गई। हमारे साथी बाराती और जनाती बने।