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कुत्तों से बेइंतहा मोहब्बत करता था विकास दुबे, गैंगस्टर की नेस्तनाबूत कोठी की अब भी पहरेदारी कर रहा कलुआ

- विकास ने पाल रखे थे डेढ़ दर्जन से ज्यादा कुत्ते - गांव के बाहर गुर्गे देते थे उन्हें ट्रेनिंग - एनकाउंटर के बाद अब भी कलुआ ढही कोठी की कर रहा पहरेदारी

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कुत्तों से बेइंतहा मोहब्बत था विकास दुबे को, गैंगस्टर की नेस्तनाबूत कोठी की अब भी पहरेदारी कर रहा कलुआ

कुत्तों से बेइंतहा मोहब्बत था विकास दुबे को, गैंगस्टर की नेस्तनाबूत कोठी की अब भी पहरेदारी कर रहा कलुआ

कानपुर. अपराध की दुनिया का खुंखार अपराधी विकास दुबे पिछले दिनों पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। उसकी मौत के बाद बिकरू के अलावा चौबेपुर थानाक्षेत्र के दर्जनभर से ज्यादा गांवों के लोग खुश हैं और अब खुलकर डॉन की जिंदगी से जुड़े किस्से सुना रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक विकास इंसानों से ज्यादा मोहब्बत कुत्तों से करता था। दो विदेशी और 18 देशी कुत्ते उसने पाल रखे थे, जो कोठी के अवाला उसकी भी रखवाली करते थे। विकास की मौत के बाद अभी भी कलुआ नाम का कुत्ता ढही कोठी के पास बैठा रहता है और पड़ोसी से रोटी खिलाते हैं।

350 से घरों वाले बिकरु गांव में तीन दशक तक राज करने वाले दुर्दान्त अपराधी विकास दुबे की मौत के बाद ग्रामीणों के चेहरों में मुस्कान है। अब ग्रामीण विकास के ढाहे सितम के राज और उसके बारे में खुलकर बोल रहे हैं। पड़ोसी रामकिशन बताते हैं कि विकास दुबे नशा नहीं करता था। उसे पान खाने का शौक था। विकास कोठी व खुद की रखवाली के लिए जहां हथियारबंद अपराधियों का तैनात रखता था तो वहीं डेढ़ दर्जन कुत्ते भी पाल रखे थे। जिसमें एक का नाम कालिया तो दूसरे का नाम गब्बर रखा हुआ था।

नहीं भौंके कुत्ते

ग्रामीणों ने बताया कि 2 जुलाई की रात जब विकास दुबे और उसके साथियों ने पुलिस पर गोलियों से हमला किया तो 18 कुत्ते कोठी के अंदर थे, पर कोई भोंका नहीं। गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच कुत्ते शान्त रहे। बलवंत सिंह बताते हैं कि विकास ने धोखे से पुलिसबल पर हमला किया। कोठी के अंदर सभी कुत्ते खुले में थे। जब पुलिस आई और गेट खोला तो कुत्ते एकाएक भौंकने लगे। पुलिस ने सभी को कोठी से कड़ी मशक्कत के बाद बाहर किया। बलवन्त बताते हैं, विकास दुबे गांव के बाहर जहां युवकों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देता था वहीं पर कुत्तों को भी टिप्स दी जाती थी। विकास को शिकार करने का शौक था। वह जब भी गांव आता तो बंदूक लेकर गंगा के किनारे चला जाता। साथ में उसके पालतू कुत्ते होते और विकास के इशारा करते ही कुत्ते शिकार को दबोच लेते।

विकास की मौत के बाद कलुआ को छोड़कर अन्य कुत्ते लापता हो गए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक कोठी और गांव में पुलिस की पहरेदारी के कारण कुत्तों को भोजन नहीं मिल सका। जिसके चलते कईयों की मौत हो गई है। विकास का खास कलुआ कुत्ता अब भी ढही कोठी के पास बैठा रहता है। बेजुबान का पेट ग्रामीण भरते हैं।

दूसरा सबसे बड़ा कांड

2002 में विकास दुबे ने दूसरा सबसा बड़ा कांड शिवली कस्बे में अंजाम दिया था। विकास ने लल्लन पर बम और गोलियों से हमला कराया था। इसमें तीन ग्रामीण मारे गए थे। उससे पहले तक विकास और लल्लन गहरे दोस्त हुआ करते थे, लेकिन बमकांड के बाद से दोनों एक दूसरे के जानी दुश्मन हो गए। इसके पहले विकास ने चौबेपुर थाने में घुसकर यूपी सरकार के राज्यमंत्री को गोली मारकर हत्या कर दी थी।

नहीं बजी शहनाई

विकास दुबे के चलते बिकरू गांव में पिछले 20 वर्षो से शहनाई नहीं बजी। ग्रामीणों के मुताबिक, विकास के चलते कोई भी दंपत्ति अपनी बेटी की शादी बिकरू गांव के युवक के साथ करने को तैयार नहीं होता था। राजेेद्र सिंह बताते हैं, विकास गांव के युवकों को अपराध की दुनिया में ले जाता। उन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग दिलवाता। राजेंद्र बताते हैं कि 18 साल पहले एक युवक की शादी हुई थी। राजेंद्र कहते हैं, विकास के मारे जाने के बाद अब युवक पढ़ेंगे और बंदुक के बजाए फावड़ा चलाकर रोजी-रोटी कमाएंगे।