
कानपुर. 40 साल से चली आ रही अर्मापुर इस्टेट की रामलीला राम और रहीम मिलकर मनाते हैं। इसमें हिन्दू भी शामिल हैं तो मुसलमान भी। पात्र में विकास चंद्र शामिल हैं तो मोहम्मद रियाज भी हैं। लल्लन प्रसाद हैं तो समीर खान भी। समीर और रियाज वर्षों से विभिन्न पात्रों की भूमिका निभा रहे। कभी बालि बनते हैं तो कभी खरदूषण, कभी अहिरावण बने तो कभी सुग्रीव। वहीं मोहम्मद वाजिद और मोहम्मद इंतजार, राम बनने को तैयार करते हैं।
एकता की मिशाल है अर्मापुर इस्टेट की रामलीला
कानपुर के कई मोहल्लों और गांवों में रामलीला का मंचन चल रहा है। चहुंओर जय श्रीराम के गूंज सुनाई पड़ रही है, लेकिन कल्यणपुर क्षेत्र के अर्मापुर इस्टेट में चल रही रामलीला अपने आप में अलग है। क्योंकि यहां पर हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के लोग रामलीला का पांडाल तैयार करने के साथ ही रावण व अन्य राक्षसों के पुतले तैयार करते हैं। साथ ही रामलीला मंचन में मुस्लिम भाई कलाकार बनकर किरदार भी निभाते हैं। मोहम्मद वाजिद कहते हैं कि अर्मापुर इस्टेट की रामलीला सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है। आर्डनेंस फैक्ट्री कर्मी व बच्चे यहां की रामलीला के पात्र बनते हैं और पूरी व्यवस्थाएं करते हैं। इसमें हिन्दू भी शामिल हैं तो मुसलमान भी।
मुस्लिम युवक निभाते हैं किरदार
रामलीला मंचन में जहां विकास चंद्र अपनी कला बिखेरते हैं तो मोहम्मद रियाज भी भगवान राम के पिता का रोल निभाते हैं। बालि का किरदर निभा रहे समीर वैसे रामलीला के कई पात्रों की भूमिका निभा चुके हैं। समीर कभी बालि बनते हैं तो कभी खरदूषण, कभी अहिरावण बने तो कभी सुग्रीव। समीर ने बताया कि हमारे मोहल्ले के लोग कई सालों से एकसाथ रहते हैं और एक-दूसरे के त्यौहारों में शामिल होते हैं। समीर ने बताया कि वैसे तो हमने रामचरित मानस के अधिकतर बड़े पात्रों के किरदार निभा चुके हैं, पर दो साल से बालि की भूमिका निभा रहे हैं। समीर ने बताया कि हमें पूरी रामचरित मानस मुंह जुबानी रटी है।
जाकिर के तबले की थाप से सराबोर हो जाता है पांडाल
रामलीला मंचन के दौरान जब लक्ष्मण और परशुराम अपने संवादों से एक दूसरे की ताकत तौलते हैं, उस समय जाकिर के तबले की थाप संवादों को जीवंत कर देती है। मंच पर लक्ष्मण और मेघनाद जब युद्ध करते हैं तो मोहम्मद मुस्लिम के हाथों तैयार की गई बिजली-व्यवस्था तलवारों की चमक बढ़ा देती है। वहीं प्राईवेट कंपनी में नौकरी करने वाले विकास भगवान राम का रोल निभाते हैं। विकास बताते हैं कि दस दिन तक चलने वाली रामलीला के संवाद की पूरी तैयारी हमें मोहम्मद वाजिद, मोहम्मद आलिम, इंतजार अली कराते हैं। विकास कहते हैं कि यूपी की ये इकलौती रामलीला है, जिसमें सारे कलाकार मोहल्ले के है। इनमें हिन्दुओं के साथ-साथ मुस्लिम भाई भी शामिल हैं।
फख्र है कि हमारे हुनर से 'राम' दमक उठे
मोहम्मद नईम कहते हैं कि ये फख्र की बात है कि हमारे हुनर से 'राम' दमक उठे। अर्मापुर इस्टेट परिवार है और दशकों पुरानी रामलीला का मंचन हमारा पारिवारिक आयोजन। धार्मिक मतभेद का सवाल इसलिए नहीं कि हमारा धर्म केवल सामाजिकता और इंसानियत है। महामंत्री और व्यवस्थापक संजय सिंह कहते हैं कि यह अर्मापुर इस्टेट परिवार का आयोजन है। हमें केवल एक धर्म सिखाया गया, मानवीयता, एकता और समाज सेवा। पूरा रामलीला परिवार यही कर रहा। वहीं आयोजनों की गति देने के लिए अध्यक्ष एसके यादव, महामंत्री और व्यवस्थापक संजय सिंह, कार्यकारी मंत्री मधुसूदन सिंह हैं तो संगठन को मजबूत करने का काम मोहम्मद नईम और खुर्शीद अहमद के भी हाथ में हैं। प्रचार के लिए पूरी टीम है तो इरफान अहमद और रेहान अहमद मलिक के पास भी जिम्मेदारी है।
रिपोर्ट- विनोद निगम
Published on:
30 Sept 2017 01:55 pm
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