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सिस्टम की लापरवाही का ‘सींग’: मंदिर के बाहर ड्यूटी कर रहे सिपाही को सांड ने पटका, नाले में जा गिरा रक्षक

Kanpur News : कानपुर के बिल्हौर में मंदिर के बाहर ड्यूटी कर रहे सिपाही पर सांड ने जानलेवा हमला कर दिया। कान्हा गौशाला के पास आवारा पशुओं के आतंक से श्रद्धालु और स्थानीय लोग खौफ में हैं।

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सांड ने सिपाही को उठाकर पटका, PC- Gemini

शहर में छुट्टा मवेशियों का आतंक अब खाकी पर भी भारी पड़ने लगा है। बिल्हौर के प्रसिद्ध सिंह वाहिनी मंदिर के बाहर सुरक्षा में तैनात एक पुलिस सिपाही शनिवार को सांड के हमले का शिकार हो गया। सांड ने सिपाही को हवा में उछालकर नाले में पटक दिया। गनीमत रही कि पास मौजूद साथियों ने तुरंत दौड़कर सांड को खदेड़ा, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

कान्हा गौशाला के 'द्वार' पर आवारा पशुओं का डेरा

हैरानी की बात यह है कि जिस जगह यह हादसा हुआ, उसके ठीक सामने नगरपालिका की 'अस्थायी कान्हा गौशाला' बनी है। कागजों में मवेशी अंदर हैं, लेकिन हकीकत में गौशाला के दरवाजे पर ही छुट्टा गोवंश का जमावड़ा लगा रहता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गौशाला के अंदर से ज्यादा जानवर सड़कों और गलियों में घूम रहे हैं, जिससे राहगीरों और श्रद्धालुओं की जान पर हर वक्त बन आती है। लोगों को पशुओं से बचकर निकलना पड़ता है।

रासलीला में उमड़ रही भीड़, सुरक्षा पर संकट

मंदिर परिसर में इन दिनों आठ दिवसीय रासलीला का भव्य आयोजन चल रहा है। रात के समय यहां सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। स्थानीय निवासी सुरेंद्र कुमार सैनी 'बापू' ने बताया कि छुट्टा जानवर व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। भीड़ के बीच सांडों का यह हिंसक व्यवहार किसी बड़ी अनहोनी को न्योता दे रहा है। गुरुवार को भी इसी सांड ने दर्शन करने आए अधिवक्ता शुभम श्रीवास्तव के वृद्ध पिता अनिल श्रीवास्तव को लहूलुहान कर दिया था, जो अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं।

प्रशासन से पशुओं को पकड़ने की मांग

रासलीला के दौरान आवारा पशुओं की समस्या बढ़ने से लोग परेशान हैं। हाल ही में हुए दो हादसों की वजह से लोगों में आक्रोश है और उन्होंने प्रशासन से पशुओं को पकड़ने की अपील की है।

जब मंदिर की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। कान्हा गौशाला होने के बावजूद सड़कों पर सांडों का तांडव नगर पालिका प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि के बाद ही इन मवेशियों को बाड़े में बंद करने की जहमत उठाएगा?