
पिता ने 13 साल की बेटी संग ट्रेन के आगे लगाई छलांग
Kanpur Crime News: यूपी के कानपुर में एक दर्दनाक घटना हुई है। गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र के सहजनी रेलवे क्रॉसिंग के पास कानपुर-लखनऊ रेल मार्ग पर सोमवार रात करीब 9 बजे पिता और बेटी के शव ट्रैक पर पड़े मिले। यह हादसा इतना भयानक था कि दोनों के शव अलग-अलग जगहों पर मिले और ट्रेनों को काफी देर तक रोकना पड़ा। पुलिस की जांच में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है, लेकिन शिनाख्त में देरी और पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं।
सोमवार रात करीब 9 बजे गेटमैन ने स्टेशन मास्टर को सूचना दी कि रेलवे ट्रैक पर दो शव पड़े हैं। सूचना मिलते ही आरपीएफ, जीआरपी और गंगाघाट कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। जांच में पता चला कि शव ट्रैक पर तीन मीटर के फासले पर अलग-अलग पड़े थे। किशोरी का सिर और बायां हाथ धड़ से अलग हो गया था। शव ट्रैक पर होने के कारण तेजस एक्सप्रेस को सहजनी क्रॉसिंग पर 33 मिनट और गोमती एक्सप्रेस को गंगाघाट स्टेशन पर 14 मिनट तक रोकना पड़ा। घटनास्थल से करीब 100 मीटर दूर एक कार खड़ी मिली, जो लॉक थी। कार के अंदर दो पर्स और दो मोबाइल फोन पड़े थे। कार लॉक होने से पुलिस तुरंत अंदर नहीं जा सकी।
घटना के चार घंटे बाद पुलिस ने दोनों की पहचान कर पाई। मृतक विकास गुप्ता (लगभग 45 साल) और उनकी 13 साल की बेटी वेदिका थे। वे मूल रूप से कानपुर के कल्याणपुर के रहने वाले थे, लेकिन वर्तमान में सहजनी इलाके में रह रहे थे। विकास की कमर में चाबी का गुच्छा बंधा था और बेटी के कटे हुए बाएं हाथ में घड़ी लगी हुई थी। वहीं विकास की पत्नी डॉली को सूचना मिलते ही गंगाघाट थाने पहुंचीं। पति की मौत का सदमा इतना गहरा था कि वे बेहोश हो गईं। विकास के ससुर राकेश अग्रहरि ने बताया कि परिवार में विवाद चल रहा था। विकास के साले यश गुप्ता के नाम पर कार रजिस्टर्ड थी, जो कानपुर के हरबंश मोहाल कछियाना इलाके में रहते हैं।
सोमवार रात करीब 9 बजे गेटमैन ने स्टेशन मास्टर को सूचना दी कि रेलवे ट्रैक पर दो शव पड़े हैं। सूचना मिलते ही आरपीएफ, जीआरपी और गंगाघाट कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। जांच में पता चला कि शव ट्रैक पर तीन मीटर के फासले पर अलग-अलग पड़े थे। किशोरी का सिर और बायां हाथ धड़ से अलग हो गया था। शव ट्रैक पर होने के कारण तेजस एक्सप्रेस को सहजनी क्रॉसिंग पर 33 मिनट और गोमती एक्सप्रेस को गंगाघाट स्टेशन पर 14 मिनट तक रोकना पड़ा। घटनास्थल से करीब 100 मीटर दूर एक कार खड़ी मिली, जो लॉक थी। कार के अंदर दो पर्स और दो मोबाइल फोन पड़े थे। कार लॉक होने से पुलिस तुरंत अंदर नहीं जा सकी।
पुलिस के अनुसार, डॉली ने थाने में बताया कि ससुराल में विवाद के बाद वे मायके आ गई थीं। सोमवार को मायके में भी पति से झगड़ा हुआ। इसके बाद ही पिता और बेटी ने कथित तौर पर खुदकुशी कर ली। पुलिस आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
इस घटना में पुलिस की कार्यशैली पर लोग सवाल उठा रहे हैं। शव मिलने के बाद चार घंटे तक कुछ नहीं हो पाया। कार में मोबाइल और पर्स दिख रहे थे, मृतक की कमर में चाबी का गुच्छा था, लेकिन पुलिस ने चाबी निकालकर कार का लॉक खोलने की कोशिश नहीं की। संभावना है कि वही चाबी कार की थी। पुलिस का कहना था कि नेटवर्क नहीं आ रहा है, इसलिए ऐप नहीं चल रहा। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि जीआरपी और स्थानीय पुलिस एक-दूसरे पर पंचनामा करने की जिम्मेदारी टाल रही थी। 5जी के दौर में नेटवर्क न आने का बहाना बनाया गया। पुलिस ने आगे-पीछे जाकर नेटवर्क ढूंढने या ऐप चलाने की कोशिश भी नहीं की। कार के नंबर से मालिक की जानकारी आसानी से मिल सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। चालान या अपराधियों की तलाश में पुलिस वाहनों की डिटेल निकाल लेती है, लेकिन यहां इतनी देरी हुई।
दोनों शवों को उन्नाव पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया। पुलिस प्रथम दृष्टया इसे आत्महत्या मान रही है। आरपीएफ प्रभारी सुरजीत सिंह और जीआरपी प्रभारी लोकेंद्र सिंह ने कहा कि जांच जारी है। गंगाघाट कोतवाली के एसएसआई दिलीप प्रजापति ने भी यही बात कही।
Published on:
24 Feb 2026 08:20 am
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