
कानपुर कमिश्नरेट पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। थाना नौबस्ता क्षेत्र में दर्ज मुकदमे की जांच के दौरान इस गिरोह का खुलासा हुआ, जो सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए लोगों को शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर ठगी करता था। पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क के माध्यम से 80 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध लेन-देन सामने आया है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब एक पीड़ित को फेसबुक पर एक लिंक भेजा गया। इस लिंक के जरिए उसे एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां “शेयर ट्रेडिंग” के नाम पर निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। ग्रुप में लगातार मुनाफे के फर्जी स्क्रीनशॉट और आंकड़े दिखाकर भरोसा दिलाया गया। झांसे में आकर पीड़ित ने अलग-अलग तारीखों में करीब 7 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। कुछ समय बाद जब उसे कोई रिटर्न नहीं मिला तो उसने खुद को ठगा हुआ पाया और NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद थाना नौबस्ता में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस जांच में पता चला कि ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर दिल्ली स्थित एक खाते में ट्रांसफर किया जाता था। इस खाते के खिलाफ देशभर में 600 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 13 एफआईआर सामने आई हैं। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने अब तक करीब 26 करोड़ रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया है। खाते में महज तीन महीनों में करीब 80 करोड़ रुपये का लेन-देन दर्ज किया गया।
पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए पंजाब के अबोहर क्षेत्र से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान करण कसौरा (उम्र 31 वर्ष) और गुलशन कुमार (उम्र 29 वर्ष) के रूप में हुई है। करण कसौरा, निवासी नई आबादी, थाना सिटी-2, अबोहर, जिला फाजिल्का (पंजाब) और गुलशन कुमार, निवासी नई आबादी, बड़ी पोड़ी, थाना सिटी-2, अबोहर, जिला फाजिल्का (पंजाब) के रहने वाले है।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी फर्जी ट्रेडिंग ऐप और लिंक के जरिए लोगों को जोड़ते थे और फिर पैसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर 5 से 6 लेयर में घुमाते थे, ताकि उनकी पहचान छिपी रहे। पुलिस को आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज, एटीएम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी बरामद हुए हैं।
डिजिटल साक्ष्यों की जांच में कई व्हाट्सएप ग्रुप और विदेशी नंबरों के जरिए नेटवर्क संचालित होने की बात सामने आई है। पुलिस को शक है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी हो सकती है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
Updated on:
18 Apr 2026 07:28 pm
Published on:
18 Apr 2026 07:25 pm
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