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निकाय चुनाव 2017 : भाजपा नहीं यहां सपा से टिकट के लिए दिग्गजों में मची है मारामारी

कानपुर देहात के दिलचस्प निकाय चुनाव को लेकर मतदाता मौन हैं, लेकिन दिग्गजों में जोड़तोड़ की राजनीति शुरू है

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samajwadi party

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कानपुर देहात. निकाय चुनाव की सन्निकटता को देख दलगत राजनीति ने अब तेजी पकड़ना शुरू कर दिया है। पार्टियों से टिकट लेने के लिये पार्टियों से जुड़े दावेदार अब पूरी ताकत झोंके हुए हैं। जिले की नगर पंचायत रूरा में वर्तमान सत्तासीन भाजपा से ज्यादा सपा से टिकट लेने की होड़ मची हुई है।

अकबरपुर-रनिया से सपा से रामस्वरूप सिंह गौर निवर्तमान विधायक रहे हैं। उनके भतीजे पूर्व चेयरमैन देव प्रताप सिंह इस बार फिर से सामान्य सीट होने पर निकाय चुनाव मे सपा से दावा ठोक रहे हैं। टिकट के लिये जोर आजमाइश कर रहे वर्तमान चेयरमैन रहे संदीप कश्यप भी पीछे नहीं हैं। बताया जाता है कि दोनों दिग्गज सपा से टिकट के लिये माथा पच्ची कर रहे हैं, जो लोगों की जुबां पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

सबके अपने-अपने दावे
एक तरफ पूर्व चेयरमैन रहे देव प्रताप अपने विकास के दावे ठोंक रहे हैं तो दूसरी ओर पूर्व चेयरमैन अपने कार्यकाल में विकास कराए जाने की बात कह रहे हैं। फिलहाल दोनों दिग्गज जनसम्पर्क में लगे हुये हैं।

सपा के दिग्गज विधायक रहे रामस्वरूप तो चेयरमैन रहे भतीजे
रनिया-अकबरपुर से लगातार तीन बार विधायक की कुर्सी पर काबिज रहे रामस्वरूप सिंह का भतीजा देव प्रताप सिंह 2008 में हुये नगर
निकाय चुनाव मे चेयरमैन बने थे। पिछली बार पिछड़ा वर्ग सीट होने पर देव प्रताप को मौका नहीं मिला था, इसलिए रामस्वरूप द्वारा संदीप कश्यप को चेयरमैन पद के समर्थित उम्मीदवार खड़ा किया था, जिसे जीत भी हासिल हुई थी। लेकिन इस बार निकाय चुनाव मे सामान्य सीट होने पर देव प्रताप सिंह फिर से प्रबल रूप से मैदान में उतर चुके हैं।

अब संदीप और देव प्रताप आमने सामने
चर्चा में है कि जिले में सपा के पुरोधा कहे जाने वाले रामस्वरूप सिंह गौर द्वारा पिछली बार संदीप कश्यप को पूरी दमखम से चुनाव लड़ाया गया था और संदीप कश्यप चेयरमैन बने थे, वहीं आज चुनाव में मैदान में आये उनके भतीजे देव प्रताप के सामने संदीप ने सपा की टिकट के लिये दावा ठोका है, जो अब राजनीतिक प्रतिष्ठा बना हुआ है।

चुनाव दिलचस्प, लेकिन मतदाता मौन
दिलचस्प हुये इस नगर के चुनाव को लेकर मतदाता भी चुप्पी साधे हुये हैं। बताया जाता है कि पूरे कार्यकाल में 4 वर्ष तक दोनों के बीच संबंध ठीक रहे, लेकिन पिछले एक वर्ष से राजनीतिक विचार धाराओं में मतभेद पैदा हो गया। परिणाम कुछ भी हो फिलहाल दोनों के बीच चुनावी घमासान होने का अंदाज़ा लगाया जा रहा है।