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ई-हॉस्पिटल प्रोजेक्ट की तर्ज पर स्मार्ट होगा हैलट का आईसीयू

हैलट अस्पताल के आईसीयू को लेकर अक्सर शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन अब जल्द ही ये आईसीयू स्मार्ट होने वाला है.

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ई-हॉस्पिटल प्रोजेक्ट की तर्ज पर स्मार्ट होगा हैलट का आईसीयू

कानपुर। हैलट अस्पताल के आईसीयू को लेकर अक्सर शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन अब जल्द ही ये आईसीयू स्मार्ट होने वाला है. ई-हॉस्पिटल प्रोजेक्ट में हैलट आईसीयू को भी जोड़ा गया है. इससे मरीजों, उनके तीमारदारों और डॉक्टर्स तीनों को ही काफी सुविधा हो जाएगी. एक तरफ जहां डॉक्टर्स हर मरीज के बारे में अपने मोबाइल फोन से ही सारा अपडेट ले लेंगे. वहीं मरीज का इलाज एक यूनीक आईडी के जरिए होगा. इसमें उसके इलाज और जांचों का सारा रिकार्ड ऑनलाइन दर्ज होगा. ई-हॉस्पिटल प्रोजेक्ट के लिए फस्र्ट फेज का काम इसी महीने पूरा होगा.

मरीजों को मिलेगा उनका यूनीक आईडी
ई-हॉस्पिटल प्रोजेक्ट में इनडोर हो या ओपीडी एडमिशन के दौरान हर मरीज की एक यूनीक आईडी होगी. इसी आईडी के तहत उसका सारा रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा. डायग्नोस्टिक व पैथोलॉजी जांचों की रिपोर्ट मरीज के मोबाइल पर मिल सकेगी. इसके अलावा उसके ट्रीटमेंट का सारा डाटा ऑनलाइन ही दर्ज होगा.

गंभीर मरीजों का होगा अलग तरह से इलाज
ई-हॉस्पिटल प्रोजेक्ट में हैलट आईसीयू व इमरजेंसी को भी जोड़ा जा रहा है. आईसीयू में ई-हॉस्पिटल सिस्टम लागू होने से क्रिटिकल पेशेंट की पल पल की जानकारी संबंधित यूनिट के डॉक्टर को उसके फोन पर ही उपलब्ध होगी. कारण है कि सारा सिस्टम ऑनलाइन है. इस वजह से हर यूनिट इंचार्ज के पास एक यूजर आईडी होगा. इस पर लॉगइन करके वह संबंधित पेशेंट की जानकारी हासिल कर लेगा. इसके साथ ही अगर किसी हायर सेंटर पर एडवाइज की जरूरत है तो वह भी इसी के जरिए व्‍यवस्‍था कर लेगा.

ऐसा है हैलट आईसीयू का हाल
26 बेडों पर मरीजों का इलाज हो रहा है. इनमें से 18 बेड मेडिसिन आईसीयू के हैं और 5 बेड सर्जरी आईसीयू के. वहीं 3 बेड गाइनी और पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट के हैं. 95 फीसदी आईसीयू में बेड ऑक्यूपेंसी हैं और 500 से ज्यादा पेशेंट्स का आईसीयू में इलाज हुआ है.

इमरजेंसी और आईसीयू को भी जोड़ा जाएगा
एलएलआर एंड एसोसिएटेड हॉस्पिटल्स के एसआईसी डॉ. आरके मौर्या कहते हैं ई-हॉस्पिटल के फस्र्ट फेज का काम तेजी से चल रहा है. इसी महीने यह पूरा कर लिया जाएगा. इमरजेंसी और आईसीयू को भी इससे जोड़ा जा रहा है. इसके शुरू होने से हॉस्पिटल की वर्किंग काफी हद तक पेपरलेस हो जाएगी.