
शहर गंदा ही रहा फिर कैसे सुधर गई स्वच्छता रैंकिंग
कानपुर। शहर में सफाई के हालात सब जानते हैं, फिर भी स्वच्छता रैंकिंग में शहर आगे बढ़ गया। लोग हैरत में हैं कि आखिर बिना सफाई हुए कागजों पर शहर कैसे साफ हो गया। गंदगी की हालत जस की तस है। यहां तक कि खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी नगर निगम शहर की असलियत नहीं छिपा पाया और सीएम ने गंदगी को लेकर महापौर से भी नाराजगी जताई थी। फिर भी प्रदेश में दूसरा स्थान पाकर नगर निगम खुश है, उसे लगता है कि शहर साफ हो गया।
जमीन पर कोई सुधार नहीं
शहर का कोई भी इलाका हो, हर जगह सफाई के इंतजाम ढेर हैं। जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर सच बता रहे हैं। किदवईनगर में बैंककर्मियों के लिए बनी कालोनी की दीवार से सटा कूड़ाघर हटा दिया गया। इसके बावजूद वहां कूड़े का ढेर लगा रहता है। सेटलमेंट कॉलोनी को प्रशासन ने उजाड़ दिया तो नगर निगम ने इस जगह को कूड़ाघर बना डाला। दशमेश डेयरी के पास भी कूड़ाघर बना दिया गया। अशोकनगर और हर्षनगर जैसे पॉश इलाके में भी जगह-जगह कूड़ा ही नजर आता है।
रात की सफाई बंद
शहर के बाजारों में रात को सफाई की व्यवस्था शुरू की गई थी, ताकि व्यापारियों और ग्राहकों को परेशानी न हो और बाजार भी साफ रहें। पर रात की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट है। लोगों को खुद अपनी दुकान के आगे सफाई करनी पड़ती है या फिर निजी सफाईकर्मियों को पैसा देकर सफाई करानी पड़ती है, पर कूड़ा उठ न पाने से बाजार गंदा ही रहता है।
प्लांट तक नहीं पहुंच रहा कूड़ा
चुन्नीगंज में कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन का लोकार्पण कराने के बाद से यह बंद है। प्लांट तक कूड़ा पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं है। कूड़ा ट्रांसफर के लिए काम्पैक्टर भी मंगाए जा चुके हैं पर इसमें कूड़ा डालने के लिए वाहन नहीं है। नगर निगम की पुरानी गाडिय़ों से ही काम चलाया जा रहा है।
निस्तारण भी धीमा
पनकी के कूड़ा निस्तारण प्लांट पर रोज केवल ३०० मीट्रिक टन कूड़े का ही निस्तारण हो रहा है। जबकि रोज १००० मीट्रिक टन कूड़ा यहां पहुंच रहा है, यानि रोज ७०० मीट्रिक टन कूड़ा बच रहा है, जिससे कूड़े का ढेर भी बढ़ता जा रहा है।
Updated on:
07 Mar 2019 02:05 pm
Published on:
07 Mar 2019 02:04 pm
बड़ी खबरें
View Allकानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
