
अटल जी के चलते सदन में दिखी एकता,अंग्रेजों की वीआईपी रोड का नाम बदला
कानपुर। पूर्व प्रधानंमत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद जहां पूरे देश में शोक की लहर है तो वहीं अब जिस शहरों में वो रहे, वहां-वहां की धरोहरों व मोहल्लों के नाम बदले जा रहे हैं। इसकी शुरूआत कानपुर से हो गई। नगर निगम की बैठक में मेयर प्रमिला पांडेय के अलावा विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में अंग्रेजों के जमानें की वीआईपी रोड, बड़ा चौराहे का नाम बदल कर अटल चौराहा कर दिया। इसके अलावा जुही स्थित खलवा पुल अटल सेतु के नाम से जाना जाएगा। इस मौके पर सदन में मौजूद सदस्यों ने बिना रोक-टोक के कार्यवायी चलने दी। सभी ने एक स्वर में अटल जी के लिए एक दिखे।
इन चौरहों व धरोहरों के नाम बदले
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रृदांजलि देने के लिए नगर निगम सदन की बैठक आहूत की गई। इसमें सत्तादल के अलावा विपक्षी दलों के नेताओं को भी बुलाया गया था। सदन में सभी सदस्यों ने एक स्वर में वीआईपी रोड का नाम अटल रोड पर अपनी मुहर लगा दी। वहीं सबसे व्यस्त रहने वाला बड़ा चौराहा अब अटल चौक के नाम से जाना जाएगा। महापौर प्रमिला पांडेय ने बताया कि पहला प्रस्ताव रखा गया है की बड़े चौराहे का नाम अटल चौक किया जाए। गंगा बैराज पर एक घाट का निर्माण चल रहा है उसका नाम भी अटल घाट रखा जाएगा। कानपुर से करीब बीस किलोमीटर दूर शेखपुर स्थित नगर निगम की जमीन पर बने वनस्थल का नाम भी अटल बिहारी वाजपेई स्मृति वन नाम कर दिया गया। मेयर ने बताया कि मोतीझील में बने तुलसी उपवन में अटल बिहारी वाजपेई जी की प्रतिमा स्थापना का प्रस्ताव भी नगर निगम की बैठक में लिया गया है। जल्द ही वहां भव्य प्रतिमा का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
डीएवी छात्रावास में बनेंगा स्मारक
भारत रत्न, पद्म विभूषण अटल बिहारी वाजपेयी के संघर्ष और सफलता की गाथा कानपुर का डीएवी कॉलेज पूरे मन से सुनाता है। इस कॉलेज की पुरानी इमारत में उनके संघर्षों के गीत आज भी गूंजते हैं। उस दौर के उनके साथी बेशक जुबानी सुनाने को उपलब्ध न हों लेकिन, अटल जी से जुड़े रोचक संस्मरण ही इस संस्थान के लिए धरोहर बन गए हैं। एमएलएसी अरूठ पाठक ने बताया कि अटल जी अपने पिता के साथ कानपुर के डीएवी कॉलेज में पढ़ाई की। अब इस छात्रावास को अटल स्मारक के रूप विकसित किया जाएगा। पाठक बताते हैं, अटल जी ग्वालियर में पढ़ाई सिंधिया घराने से मिली छात्रवृत्ति से की तो कानपुर आकर अपने पिताजी के साथ हटिया में ट्यूशन पढ़ाकर खर्च निकाला। अटल जी भूगोल पढ़ाते थे और उनके पिता कृष्णबिहारी वाजपेयी अंग्रेजी का ट्यूशन देते थे।
शहर में घूमेंगा अस्थि कलश
भाजपा नगर अध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री का अस्थि कलश पहले सोमवार को आना प्रस्तावित था। अब तिथि परिवर्तित की गई है। 23 अगस्त को लखनऊ से कलश आएगा। इसी दिन कानपुर में भी अस्थि कलश पहुंचेगे। नगर अध्यक्ष ने बताया कि जाजमऊ से विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण करते हुए यात्रा शाम करीब चार बजे बिठूर के ब्रह्मावर्त घाट पहुंचेगी, जहां विधि-विधान से अस्थि विसर्जन किया जाएगा। सुरेंद्र मैथानी ने बताया कि ग्वालियर में अटल जी के परिजन रहते हैं। उनसे आग्रह किया है कि वह अस्थि कलश यात्रा और विसर्जन में शामिल हों। वहीं, कानपुर में रहने वाली अटल जी की पौत्री नंदिता मिश्रा ने सहमति दे दी है। जिलाध्यक्ष ने बताया कि मार्ग पर सभी मंडल, मोर्चा और प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं को पुष्पवर्षा की जिम्मेदारी दे दी गई है।
मनाएंगे अटल स्मृति दिवस
किराना मर्चेट एसोसिएशन हर वर्ष 16 अगस्त को अटल स्मृति दिवस मनाएगी। इस दिन अटल जी की याद में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नयागंज में किराना कारोबारियों द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश बाजपेई ने ये बातें कहीं। उन्होंने बताया कि एसोसिएशन ने 1990 के करीब आयोजित रासलीला में अटल जी को आमंत्रित किया था। सभा में मौजूद वक्ताओं ने अटल जी से जुड़ी यादों को साझा किया। बाजपेयी बताते हैं कि अटल जी को कानपुर की पानीपुरी के अलावा बनारसी की चाय से खास लगाव था। वो पकवान को छोड़ पानपुरी की डिमांड करते थे। उस दिन भी उनके लिए पानपूरी की व्यवस्था करवाई गई थी।
Published on:
21 Aug 2018 01:29 pm
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