
कानपुर,होली के उल्लास और रंगों की मस्ती के बाद अब बारी है उस पर्व की, जो भाई-बहन के अटूट रिश्ते को और गहरा करता है। होली के बाद पड़ने वाली द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला भाई दूज इस वर्ष 5 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं।
बहन के स्नेह,विश्वास और सुरक्षा के वचन का प्रतीक-
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाई दूज का पर्व भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और सुरक्षा के वचन का प्रतीक है। बहनें विधिवत पूजन कर आरती उतारती हैं और भाई को मिठाई खिलाकर मंगलकामना करती हैं। बदले में भाई भी अपनी बहन को उपहार देकर उसके सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लेते हैं।
4 मार्च को शाम 4:05 से 5 मार्च को शाम 4:28 तक -
ज्योतिषाचार्य पं. दीनदयाल त्रिपाठी के अनुसार, द्वितीया तिथि 4 मार्च को शाम 4:05 बजे से प्रारंभ होकर 5 मार्च को शाम 4:28 बजे तक रहेगी। ऐसे में 5 मार्च को दिन में शुभ मुहूर्त में तिलक और पूजन करना उत्तम रहेगा। इस दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है, जिसे मांगलिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।
बहन को भाई के घर जाकर करना चाहिए तिलक-
परंपरा के अनुसार, भाई दूज के दिन एक विशेष बात का ध्यान रखना चाहिए—विवाहित बहन को भाई के घर जाकर तिलक करना चाहिए, न कि भाई को बहन के घर जाना चाहिए। ज्योतिषीय दृष्टि से यह नियम धन और वैभव की वृद्धि के लिए शुभ माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से भाई की प्रगति, समृद्धि और पारिवारिक उन्नति के योग मजबूत होते हैं।
Updated on:
04 Mar 2026 12:31 pm
Published on:
04 Mar 2026 12:25 pm
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