
कानपुर के थाना नजीराबाद में दर्ज मुकदमे के आधार पर पुलिस ने संगठित साइबर-आर्थिक अपराध में संलिप्त एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह लोगों को लोन दिलाने का झांसा देकर उनके पैन कार्ड, आधार कार्ड और रिहायशी दस्तावेज हासिल करता था। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आरोपित संबंधित व्यक्तियों के नाम से फर्जी फर्म खोलकर जीएसटी पंजीकरण कराते और बैंक खाते संचालित करते थे।
38 बोगस कंपनियों का चला पता -
पुलिस के अनुसार अब तक 38 बोगस कंपनियों का पता चला है। इन फर्जी फर्मों के माध्यम से लगभग ₹250 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि खातों में जीएसटी से संबंधित ट्रांजेक्शन दर्शाकर बड़ी धनराशि का आवागमन किया जाता था, जिसे बाद में विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता था, ताकि वास्तविक लाभार्थियों की पहचान कठिन हो सके।
एक रिक्शा चालक के नाम भी है फॉर्म -
मामले में एक रिक्शा चालक के नाम से भी फर्जी फर्म खोले जाने का तथ्य सामने आया है। उसके बैंक खाते में करीब ₹1.50 करोड़ का ट्रांजेक्शन पाया गया, जबकि उसे इसकी कोई जानकारी नहीं थी। पुलिस ने संबंधित खाते में उपलब्ध राशि को फ्रीज करा दिया है और अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
दो आरोपियों को किया गया है गिरफ्तार -
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों—कपिल और राज उर्फ अमरदीप को गिरफ्तार किया है, जबकि पांच अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। तलाशी के दौरान 30 मोबाइल फोन और 52 चाबियां बरामद की गई हैं। पुलिस इन मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कर डिजिटल साक्ष्य एकत्र कर रही है। बरामद चाबियों के संबंध में भी जांच की जा रही है कि उनका उपयोग किन परिसरों या लॉकरों के संचालन में किया जाता था।
अभी मामले में विवेचना है जारी -
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि प्रकरण में जीएसटी विभाग और संबंधित बैंकों के साथ समन्वय स्थापित कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। मामले की विवेचना जारी है।
Updated on:
03 Mar 2026 08:22 pm
Published on:
03 Mar 2026 07:59 pm
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