
Kanpur News:अगर आपको जीना है लंबा जीवन, तो ये 3 तरीके जरूर अपनाएं
World Health Day : आज के आधुनिक समय में अगर किसी चीज पर भरोसा नहीं रहा है तो वह है जीवन। हाल के दिनों में स्वयं आप भी अपनी आँखों से देख चुके हैं कि कैसे कई नामचीन मशहूर हस्तियाँ सब कुछ होने के बाद भी असमय बहुत ही कम उम्र में मौत हो गई। जब पुराने समय में (आज से लगभग 20-30 वर्ष पूर्व) यह माना जाता था कि जो पैदा हुआ है। वह कम से कम 60-70 वर्ष तक तो ज़िंदा रहेगा ही,और ऐसा होता भी था।
आखिर ऐसे क्या कारण हैं जो कि आधुनिक समय में अचानक मृत्यु की घटनायें इतनी ज़्यादा संख्या में होने लगी हैं व इनसे कैसे बचा जा सकता है। इस को लेकर राजकीय हृदय रोग संस्थान कानपुर उत्तर प्रदेश में प्रोफ़ेसर, हृदय रोग विज्ञान के पद पर कार्यरत डा.अवधेश शर्मा ने बताया कि एक हृदय रोग विशेषज्ञ होने के नाते मेरे जो अनुभव हैं व जो विभिन्न शोधपत्रों से निकल कर आया है। उसके अनुसार अगर हम अपने जीवन में इन तीन तरीकों को अपनाते हैं। तो शायद लम्बा जीवन जी सकते हैं-
1 -मानसिक तनाव व अवसाद से बचें
वैसे तो जीवन में आगे बढ़ने के लिये कुछ स्तर का तनाव व चिन्ता आवश्यक है क्योंकि यह मानव का मूल स्वभाव है कि अगर उसे सब कुछ बिना मेहनत के हासिल होने लगे तो वह शायद कार्य करना ही छोड़ दे।परन्तु जब हम इस तनाव को एक स्तर से ज़्यादा लेने लगते हैं तो यह हमारे पूरे शरीर पर सिर्फ और सिर्फ नकारात्मक प्रभाव ही डालता है जो कि भविष्य में कई सारी बीमारियों का जनक बनता है।आत्याधिक तनाव का एक प्रमुख कारण आजकल की पीढ़ी में धैर्य का अभाव है।आज का युवा बहुत ही कम समय में और कम मेहनत में सब कुछ प्राप्त कर लेना चाहता है जो कि प्रकृति के सिद्धांत के बिल्कुल उलट है।सीढ़ी दर सीढ़ी और पीढ़ी दर पीढ़ी वाली प्रगति हमेशा लंबी और टिकाऊ होती है व तनाव से रहित होती है।कार्य के साथ-साथ यह अत्यन्त आवश्यक है कि कार्य और आपकी जीवन चर्या में एक सन्तुलन ज़रूर हो।अब सवाल उठता है कि मानसिक अवसाद को दूर करने के लिये हम क्या कर सकते हैं।तो मैंने विभिन्न शोधपत्रों व अपने अनुभव के आधार पर जो निष्कर्ष निकाला है वो निम्न है-
-जीवन में सफलता का मानचित्र ज़रूर बनायें व उसे पूरा करने का प्रयास भी करें परन्तु उसे कभी भी समय की कढ़ी बेड़ियों में ना बाँधें।मतलब अगर हम सरल भाषा में समझें तो समय आधारित कार्य को पूर्ण करने की प्रतिबद्धिता हमेशा तनाव को ही जन्म देती है वो भी जब कार्य पहाड़ जैसा हो और समय छोटा,जो कि अक्सर मानवीय स्वभाव है।हम लोग बहुत ही कम समय में पहाड़ जैसे कई सारे कार्य करने के पीछे भागते रहते हैं जो कि आखिर में सिर्फ़ और सिर्फ़ तनाव व बीमारियाँ ही पैदा करते हैं।
-एक अच्छी नींद ज़रूर लें जिसके कि बाद आपको ताज़गी महसूस हो।नींद के घण्टे कितने हों यह एक अलग विषय है जो कि प्रत्येक व्यक्ति के लिये भिन्न-भिन्न हो सकता है।किसी को तीन घण्टे की नींद में ताज़गी महसूस होने लगती है तो किसी को बारह घण्टे सोने के बाद भी थकान होती है।नींद के घण्टों की बजाय नींद की गुणवत्ता ज़्यादा ज़रूरी है।
-बुजुर्गों व बच्चों के साथ समय ज़रूर बिताएँ। कोशिश करें कि घर व मोहल्ले के बुजुर्ग व बच्चों के साथ थोड़ा समय बात करें।बुजुर्गों से बात करने से आप उनके अनुभव और जीवन जीने का तरीक़ा सीखेंगे तो बच्चों के साथ अपना बचपन।विभिन्न शोधों से भी इस तथ्य की पुष्टि होती है।
-अपने परिवार व मित्रों लिये समय को सुरक्षित रखें क्योंकि आपके जीवन के हर पड़ाव में यही लोग आपके साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर चलने वाले हैं,वर्तमान में भी और भविष्य में भी।अतः किसी ग़लतफ़हमी या मुग़ालते में ना जियें।
-सकारात्मक व ऊर्जा से भरे लोगों का साथ करें वो आपको जीवन में आगे बढ़ने के लिये प्रेरित करेंगें वो भी सही रास्तों से।
-जीवन में कोशिश करें मध्यम मार्ग को अपनाने की मतलब अपने जीवन जीने की कला को मध्यममार्गी रखें क्योंकि अति हर चीज की बुरी होती है व जीवन पर हमेशा बुरा प्रभाव ही डालती है।(अति का भला ना बोलना,अति की भली ना चुप। अति का भला ना वर्षना,अति की भली ना धूप॥)
-वर्ष में कम से कम एक बार परिवार के साथ कार्य की आपाधापी से दूर यात्रा ज़रूर करें।
2- स्वस्थ्य आहार का सेवन करें
एक पुरानी कहावत है कि जैसा अन्न वैसा मन।जो कि मेरे अनुसार पूर्णता सत्य है। आपके स्वास्थ्य पर इसका बहुत असर पड़ता है कि आप क्या खा रहें हैं।आज के समय में अचानक मृत्यु का सबसे बढ़ा कारण हार्ट अटैक है। जिसके कि लिये अनुचित खान-पान काफी हद तक ज़िम्मेदार है।अगर आप अपने भोजन में तैलीय पदार्थों ,जंक फ़ूड आदि का सेवन ज़्यादा कर रहें हैं। तो आपको हार्ट अटैक,शुगर,उच्च रक्तचाप,मोटापा व मानसिक अवसाद का रिस्क ज़्यादा रहता है।अगर आप बीड़ी,सिगरेट या तम्बाकू लेते हैं तो आपको हार्ट अटैक व ब्रेन स्ट्रोक का ख़तरा चार गुना ज़्यादा होता है। अगर आप शराब का आत्याधिक सेवन करते हैं तो आपका जीवनकाल कम हो सकता है। तो ऐसे क्या कदम उठायें कि हम स्वस्थ्य आहार के माध्यम से लम्बी और निरोगी उम्र जी सकें।
-सात्विक खाने जैसे कि हरी सब्ज़ियाँ, मौसमी फल,दाल आदि का सेवन ज़्यादा करें।
-एक मुट्ठी भर ड्राई फ़्रूट्स जैसे कि बादाम,अखरोट,काजू आदि का सेवन करें।
-निकोटीन का सेवन किसी भी रूप (बीड़ी,सिगरेट,तम्बाकू)में बिल्कुल भी ना करें।
-शराब का सेवन बिल्कुल भी ना करें या फिर अपने चिकित्सक से परामर्श कर सीमित मात्रा में करें।
-जंक फूड(पिज़्ज़ा,बर्गर) आदि से परहेज़ करें।
-कोल्ड ड्रिंक्स आदि से परहेज़ करें।इनके स्थान पर लस्सी,शर्बत,नारियल पानी आदि का सेवन करें।
-ओवरईटिंग से बचें।जितना ज़रूरत है उतना ही खायें।एक पुरानी कहावत है कि “कम खायें गम खायें”.
-खानें में दालों, फलियों, दही,सलाद आदि का सेवन ज़रूर करें।
-ज़्यादा तैलीय पदार्थों का सेवन ना करें।
-पानी का भरपूर सेवन करें।(40 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम वजन के अनुसार)।
3- नियमित व्यायाम ज़रूर करें
शरीर को सक्रिय रखना लम्बी उम्र का सबसे बढ़ा राज है।पुराने समय में व्यक्ति का पूरा कार्य शारीरिक श्रम पर ही निर्भर करता था जो कि आज की परिस्थिति से बिल्कुल भिन्न है।आज का मनुष्य पूरी तरह से हर कार्य के लिये मशीनों पर निर्भर हो गया है जिस कारण शारीरिक श्रम बिल्कुल नगण्य हो गया है।विभिन्न शोधपत्रों के अनुसार भी एक स्वस्थ्य व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग तीस मिनट व्यायाम अवश्य करना चाहिये।प्रतिदिन टहलना, साइकिल चलाना ,कसरत करना व योग एवं ध्यानयोग(मेडिटेशन) करना इस सबमें शामिल है।मेरे अनुभव के आधार पर निम्न तरीकों को अपना कर आप शारीरिक रूप से सक्रिय रह सकते हैं-
-प्रतिदिन आधा से एक घण्टा व्यायाम,योग अथवा मेडिटेशन में व्यतीत करें।
-बच्चों के साथ जब भी समय मिलें बच्चे बनकर उनके खेल में शामिल हों।
-अपनी कार या बाइक को ऑफ़िस में अपने कमरे से लगभग आधा किलोमीटर दूर पार्क करें व इस आधा किलोमीटर की दूरी को पैदल चलकर तय करें।
-लिफ़्ट के स्थान पर सीढ़ियों का इस्तेमाल ज़्यादा करें।
-घर के सभी सदस्यों में व्यायाम आदि की आदत विकसित करें जिससे कि आप का पूरा परिवार स्वस्थ्य रहे।
डा.अवधेश शर्मा ने कहा कि अगर संक्षेप में कहा जाये तो आप इन तीन तरीकों को अपना कर स्वयं को व अपने परिवार को स्वस्थ रख सकते हैं और लम्बी उम्र जी सकते हैं।
Published on:
07 Apr 2023 12:42 pm
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