25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आर्डिनेंस फैक्ट्री पर बंदी का खतरा मंडराया, ओवरटाइम पर भी सख्ती से रोक

फैक्ट्री में सिर्फ छह महीने के लिए 285 करोड़ का वर्क ऑर्डर, अब 250 उत्पाद भी नहीं बनेंगे

3 min read
Google source verification
OEF, ordnance equipment factory, kanpur OEF, OEF kila, ajay mishra, R K kulshetra,  defence ministry, ministry of defence, non-core, indian army, hindi news, defence news

आलोक पाण्डेय

कानपुर . किला यानी ओईएफ (आर्डिनेंस इक्यूपमेंट फैक्ट्री) पर बंदी का खतरा मंडराने लगा है। फैक्ट्री में सिर्फ छह महीने के लिए 285 करोड़ का वर्क ऑर्डर शेष है। नया काम नहीं मिला तो छह महीने बाद कर्मचारी हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहेंगे। ऐसे में ओईएफ में तालाबंदी की संभावना फिर जोर पकडऩे लगेगी। काम का बोझ बेहद कम होने के कारण रक्षा मंत्रालय ने समस्त आयुध इकाइयों में ओवर टाइम करने पर भी सख्ती से प्रतिबंध लगा दिया गया है। कर्मचारियों को सप्ताह में 47.6 घंटे ही काम करने को कहा गया है। उधर, रक्षा मंत्रालय ने नान कोर श्रेणी के 250 उत्पादों को ओईएफ और पैरॉशूट फैक्ट्री में बनाने पर पाबंदी लगाते हुए निजी क्षेत्र की कंपनियों से ऐसे उत्पादों को बनवाने के लिए कहा है।


पिछले साल था 670 करोड़ का वर्क ऑर्डर, इस साल आधा भी नहीं

शहर में किले के नाम से मशहूर फूलबाग स्थित ओईएफ को पिछले साल 670 करोड़ का वर्क-आर्डर मिला था, लेकिन इस वित्तीय वर्ष में सिर्फ 285 करोड़ का वर्क ऑर्डर प्राप्त हुआ है। कर्मचारियों की संख्या के आधार पर यह ऑर्डर सितंबर-अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा। ऐसे में नया काम नहीं मिला तो नवंबर से कर्मचारियों को निठल्ला बैठना होगा। ओईएफ प्रबंधन नए वर्क ऑर्डर की कोशिश में जुटा है, लेकिन कामयाबी नहीं मिली है। इसी दरम्यान नान कोर श्रेणी के उत्पादों को निजी क्षेत्र की फैक्ट्रियों में बनवाने के आदेश ने ओईएफ की उम्मीदों को धूमिल कर दिया है। उधर, एक अन्य आदेश ने रक्षा कर्मचारियों को मायूस कर दिया है। रक्षा मंत्रालय ने बीते सप्ताह देश की सभी रक्षा इकाइयों को जारी आदेश में स्पष्ट और सख्त आदेश दिया है कि किसी भी कर्मचारी को ओवर-टाइम नहीं करना है। आदेश के मुताबिक, ओवर टाइम का भुगतान किया गया तो संबंधित इकाई के महाप्रबंधक के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।


ओईएफ-पैराशूट फैक्ट्री में 250 उत्पाद बनाने पर भी पाबंदी लगाई गई


डिफेंस कॉरिडोर के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों को न्योता देने के साथ ही रक्षा मंत्रालय ने तय किया है कि नान कोर उत्पाद बनाने वाली ओईएफ और पैराशूट फैक्ट्रियों में 250 किस्म के उत्पाद नहीं बनेंगे। रक्षा मंत्रालय के निदेशक आर.के. कुलश्रेष्ठ ने फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि फिलहाल 250 नान कोर उत्पाद आर्डिनेंस फैक्ट्रियों में नहीं बनेंगे, लेकिन धीरे-धीरे उत्पादों की संख्या 250 से बढ़ाकर 400 की जाएगी। उन्होंने कहाकि नान कोर उत्पाद के उत्पादन का पूरा जिम्मा निजी सेक्टर को सौंपने की मंशा है। फैसले का उद्देश्य नॉन कोर में छोटी इकाइयों को बढ़ावा देना है। गौरतलब है कि सेना के लिए विशेष कपड़े, बूट, टेंट, दरी, कंबल जैसे 700 से ज्यादा उत्पादों की सप्लाई आर्डिनेंस फैक्ट्रियों से ही होती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से निजी क्षेत्र की कंपनियां भी सेना को सप्लाई करने लगी हैं।


निजी कंपनियों के सामने टिकना मुश्किल था, अब रास्ते ही बंद

रक्षा संस्थान के कर्मचारियों के संगठन के नेता अजय मिश्रा ने कहाकि सरकार तो सेना का निजीकरण ही करने के इरादे से काम कर रही है। उन्होंने कहाकि कीमतों के संदर्भ में निजी कंपनियों के सामने आर्डिनेंस फैक्ट्रियों का टिकना मुश्किल हो रहा था, लेकिन गुणवत्ता के दम पर ओईएफ और पैराशूट फैक्ट्रियों को काम मिलता रहा है। अब सरकार ने आर्डिनेंस इक्यूपमेंट फैक्ट्रियों के लिए सभी रास्ते बंद कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल नानकोर के नाम पर आर्डिनेंस फैक्ट्रियों में बनने वाले 600 उत्पादों को तैयार करने के लिए निजी क्षेत्र को भी आमंत्रित कर लिया गया। सेना को अधिकार दिया गया कि सरकारी और निजी क्षेत्र में तैयार उत्पादों को गुणवत्ता और कीमत के आधार पर वर्क ऑर्डर जारी करे। कीमत के मामले में सरकारी कंपनियों का निजी सेक्टर के सामने ठहरना मुश्किल था, लेकिन निजी क्षेत्र के उत्पाद आर्डिनेंस फैक्ट्रियों के पास उत्पादों से गुणवत्ता में कमजोर थे। ऐसे में सरकार ने नया आदेश जारी कर दिया है।