
यूपी ,पुलिस के इस बॉजीराव सिंघम से थर-थर कांपते अपराधी
कानपुर। यूपी पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां ऐसे कई पुलिस अफसर हैं, जिन्होंने अपने काम के बल पर जनता के दिल में राज तो सरकार से मेंडल पाए हैं। इसी कड़ी में हम आपको ऐसे ही ‘अलग बात’ वाले वर्दीवालों से परिचित कराते हैं। इनमें प्रेम प्रकाश की अलग पहचान है। उनके कड़क तेवर से बदमाश ही नहीं लापरवाह पुलिसकर्मी भी थर्राते थे। कानपुर जोन के एडीजी बनाए जाने के बाद प्रेम-प्रकाश ने े एसएसपी, एसपी व अन्य पुलिस के अलाधिकारियों के साथ बैठक कर अपराधियों के खिलाफ ऑपरेशन शुरू किया। एसएसपी अनंत देव तिवारी के नेतृत्व में कानपुर पुलिस ने अब तक 67 अपराधियों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर जेल भेजा तो कई खुंखार शातिर खुद सरेंडर कर सलाखों के पीछे चले गए। अपराध को खत्म करने और यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए अब एडीजी खुद बिना वर्दी के सड़क में उतर चुके हैं, जिससे अपराधियों के साथ ही पुलिस भी डरी हुई है।
शोहदों के खिलाफ ऑपरेशन शुरू
एडीजी प्रेम प्रकाश की आगवाई में शनिवार को शहर में शोहदों के खिलाफ अभियान और तेज हो गया, जो रविवार को भी जारी रहा। किदवईनगर में महिला सिपाहियों को देखकर अश्लील गाना गानें पर एडीजी ने दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया। मोतीझील सहित अन्य इलाकों में एडीजी अकेले पहुंचे और युवक-युवतियों को हिदायद देकर छोड़ दिया। एडीजी के सड़क में उतरने की खबर से थानों की पुलिस और थानेदार सहमें रहे। कागजी कार्रवाई समेत परिसर की साफ सफाई भी करवाई। एडीजी ने कहा कि जोन को पूरी तरह से अपराध मुक्त करने के लिए पुलिस को कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। अब अपराधी य तो अपराध छोड़ कर जेल जाए नही तो अंजाम भुगतनें के लिए तैयार रहे।
कौन हैं एडीजी प्रेम-प्रकारश
दिल्ली के रहने वाले प्रेमप्रकाश 1993 बैच के आईपीएस अफसर हैं। बीटेक करने के बाद पुलिस मैनेजमेंट में भी एमडी का कोर्स कर चुके हैं। तेजतर्रार आईपीएस प्रेमप्रकाश आगरा, मुरादाबाद, एनसीआर समेत कई जिलों में कप्तान रह चुके हैं। बेसिक पुलिसिंग में महारत रखने वाले एडीजी विभाग में अपने सख्त रवैये के लिये जाने जाते हैं। बगैर किसी दबाव के निर्णय लेने और काम को अंजाम देने में उनकी धाक रही। उनकी साफ और ईमानदार छवि की वजह से कानपुर जोन का एडीजी बनाया गया है।
तो नहीं रहेगी थानेदारी
एडीजी शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था को पटरी में लाने के लिए खुद सड़क पर उतरे। इस बीच वो अकेले बिना वदी के पैदल चल पड़े। वो जैसे ही बड़ा चौराहा पहुंचे, वहां उन्हें अव्यवस्था नजर आई। ऐसे में उन्होंने थानाप्रभारी को मौके पर बुला लिया और कहा कि अगर ट्रॉफिक नहीं सुधरा तो थानेदारी नहीं रहेगी। एडीजी के सख्त तेवर देख थानेदार खुद चौराहे पर खड़े होकर यातायात संभाला। एडीजी यहां से सीधे जेड स्क्वायर पहुंचे तो वहां टैम्पों व अन्य वाहन खड़े थे। जिस पर तत्काल उन्हें सीज करा दिया।
गार्ड को दादागिरी दिखानी पड़ी महंगी
जेड स्क्वायर के गेट में बंदूक के साथ तैनात गार्ड रमाकांत साहू को एडीजी ने बुलाया तो मूंछ में ताव फेरते हुए आ गया। एडीजी ने उससे कहा कि गेट के असापास वाहनों को क्यों खड़ा करवाते हो। जिस पर गार्ड ने कहा तुम सवाल जवाब करने वाले कौन होते हो। सादी वर्दी में एडीजी को पहचान नहीं माने के कारण उसने अभद्रता कर दी। गुस्साए एडीजी ने पुलिस को बुलाया औा गार्ड को थाने भिजवाया दिया। पुलिस ने गार्ड को शांतिभंग के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया।
बिना वर्दी के करते हैं ड्यिटी
एडीजी प्रेम प्रकाश जब से जोन का पदभार संभाला, तब से वो रात में लोअर व टीशअर् पहनकर सड़क पर उतर जाते हैं। आमशहरी के अलावा पुलिस भी उन्हें वहचान नहीं पाती। थाने के बाहर जाकर चाय पीते थे और पुलिस के कार्यप्रणाली पर नजर रखते हैं। साथ ही भीड़भाड़ वाले इलाके, बाजार महिला कॉलेज व अन्य स्थलों पर अकेले पीछे हाथ कर चुपचाप खड़े रहते हैं। जैसे ही कोई गैर कानूनी कार्य करता है उसे दबोच लेते हैं। फिर पुलिस को बुला थाने भिजवाते हैं। इसी का नतीजा है कि शहर में करीब 67 से ज्यादा अपराधियों का पुलिस ने ऑफ एनकाउंटर के बाद जेल भेजा है।
थानों में घंटे टंगवाए थे
एडीजी प्रेम प्रकाश ने 12 जुलाई 2009 को लखनऊ में एसएसपी का चार्ज संभाला। पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर मुस्तैद रखने के लिए उन्होंने थानों में घंटे टंगवाए और संतरी को जेल की तर्ज पर हर घंटे इन्हें बजाने का आदेश जारी किया। इससे रायफल कोने में रखकर सुस्ताने वाले पुलिसकर्मी घंटा बजाने की चिंता में सतर्क रहते थे, क्योंकि प्रेम प्रकाश खुद व उनके मुखबिर घंटे की आवाज सुनने को थानों के आसपास चक्कर काटते थे। इसके अलावा उन्होंने पुलिस लाइन की तर्ज पर थानों में पुलिसकर्मियों की परेड शुरू कराई थी। इसमें तोंद वाले पुलिसकर्मी उनके निशाने पर रहते थे।
खुद जेल से छुड़वाया
प्रेम प्रकाश की कप्तानी के दौरान प्रदेश कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी का घर फूंकने व ठाकुरगंज इलाके में तिहरे हत्याकांड के साथ लाखों की डकैती हुई। पुलिस ने डकैत को मुठभेड़ में मार गिराने के साथ अन्य की धरपकड़ की। प्रेम प्रकाश कोई चूक उजागर होने पर गलती सुधारने में हिचकते नहीं। लखनऊ में तैनाती के दौरान सआदतगंज व बाजार खाला पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार कर पांच लाख की लूट का फर्जी खुलासा कर दिया। इसकी जानकारी होते ही बतौर एसएसपी प्रेम प्रकाश ने खुद जांच की। वारदात अंजाम देने वाले बदमाशों की गिरफ्तारी के साथ बेगुनाहों को जेल से रिहा कराया और फर्जी खुलासा करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की।
एक साल तक बरेली के रहे एडीजी
एडीजी प्रेम प्रकाश कानपुर से पहले एक साल तक बरेली में तैनात रहे। इनके कार्यकाल साम्प्रदायिक दृष्टि से अति संवेदनशील बरेली जोन में सभी पर्व सकुशल सम्पन्न हुए। जब भी कभी माहौल खराब होने की नौबत आई तो एडीजी की सूझ बूझ से हालात नहीं बिगड़े। पैदल गस्त कर चेकिंग करना और देर तक कार्यालय में बैठ कर फरियादियों को सुनना उनकी पुलसिंग का एक हिस्सा था। तेज तर्रार आईपीएस अफसरों में गिने जाने वाले प्रेम प्रकाश अपने स्टाफ के प्रति हमेशा मुलायम रहे और उनके स्टाफ में तैनात अफसरों से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक के कर्मचारियों का वो ध्यान रखते थे।
Published on:
23 Jun 2019 04:17 pm
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