
शहर की बेटी ने रोशन किया नाम, दर्जी की बेटी भारतीय हैंडबॉल टीम में शामिल
कानपुर। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनो में जान होती है। पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इस कहावत को शहर की सपना ने सच कर दिखाया है। सपना ने जो सोचा वो पाया। हालांकि हालात विपरीत थे पर सपना ने हार नहीं मानी और आखिरकार अपनी मंजिल को पा लिया। गरीबी और संसाधनों के अभाव में पली-बढ़ी सपना ने कभी हार नहीं मानी और मेहनत व प्रतिभा के बल पर भारतीय हैंडबॉल टीम में चयनित होकर शहर का नाम रोशन कर दिया।
आर्थिक तंगी के बीच दिए सपनों को पंख
शहर के माल रोड इलाके में किराए के छोटे से कमरे में रहने वाले अशोक कश्यप पेशे से दर्जी हैं और पूर्व डीआईजी जेपी अवस्थी की टेलरिंग की दुकान में काम करते हैं घर में पत्नी मिथलेश गृहिणी हैं और एक बेटी कल्पना पतंजलि स्टोर में काम करती है। उनकी दूसरी बेटी सपना हैंडबाल में कॅरियर बनाना चाहती है। आर्थिक तंगी के बीच सपना ने अपने सपनों को सच करने की ठानी। जुझारू और मेहनती स्वभाव की सपना ने लाख दिक्कतें आने पर भी कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
हैंडबॉल टीम में चयन पर सब खुश
सपा कोशिश करती रहीं और अंतत: उसकी मेहनत रंग लाई। 24 से 29 जुलाई को लेबनान में होने वाली अंडर-20 हैंडबॉल एशियन चैम्पियनशिप के लिए उसका चयन हो गया। सपना के भारतीय टीम में शामिल होने की घोषणा हैंडबॉल फेडरेशन के महासचिव आनंदेश्वर पाण्डेय ने की। जब सपना के पिता अशोक से बात की तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। बोले-परिवार का पेट काटकर बिटिया के सपने को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बहुत मेहनत की है। फिर मुस्कराते हुए बोले, मेरी बेटी बहुत बहादुर है। पैसे की तंगी के बावजूद कभी मुझसे कुछ नहीं कहा।
सेन कॉलेज में ली ट्रेनिंग
भारतीय हैंडबॉल टीम में चुनी गईँ सपना ने बताया कि माल रोड स्थित एसएससेन इंटर कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की है। यहां पर कक्षा छह में हैंडबॉल की शुरुआत की। उस समय खेल शिक्षिका आशा बक्सरे ने हैंडबॉल की बेसिक चीजों से लेकर हर प्रकार की जानकारी दी। इसके बाद प्रशिक्षक संजय कुमार ने हैंडबॉल में कैसे स्पीड को बनाया जाए और खेल को बेहतर किया जाए, इसके टिप्स दिए।
Published on:
28 Jun 2019 01:19 pm
बड़ी खबरें
View Allकानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
