
Ambedkar Institue of Technology Students
बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण का सबसे ज्यादा असर भूजल पर पड़ा है। देश के कई हिस्सों में पानी की बर्बादी गंभीर समस्या है। भूजल की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए कई राज्यों ने भूमिगत जलकर्षण के बारे में कानून बनाएं हैं। मगर आज भी देश में गिरता भूजल चिंता का बड़ा विषय है। पेयजल की तेजी से हो रही कमी के चलते केंद्र सरकार लगातार लोगों से जल की बर्बादी रोकने की अपील कर रही है। वहीं, 'मेक इन इंडिया' के तहत जल संरक्षण के लिए कानपुर के अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की छात्राओं ने एक डिवाइस तैयार की है, जो न सिर्फ पानी की बर्बादी को रोकेगी बल्कि यह भी बताएगी कि उपजाऊ फसल के लिए मिट्टी को कितने पानी की आवश्यकता है। इस डिवाइस की कीमत 2000 रुपये है। इस प्रोजेक्ट को तीन छात्राओं ने बनाया है।
मिट्टी की नमी की देगी जानकारी
देश में जल संकट की स्थिति गहराती जा रही है। इसे रोकने के लिए कानपुर के अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की छात्राओं ने शोध करने के बाद ऐसी डिवाइस तैयार की है। छात्राओं के शोध की वजह यह रही कि अक्सर देखा जाता है कि पेड़ों में पानी देने के बावजूद वह जल जाते हैं और पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं। इसके पीछे के कारण को जानने के लिए छात्राओं ने रिसर्च किया तो पता चला कि यदि पेड़ों में अधिक पानी डाला जाए तो वह भी नुकसानदायक होता है। खास तरीके से बनाई गई इस डिवाइस का काम यह है कि डिवाइस मिट्टी में कितने प्रतिशत नमी पेड़ पौधों के लिए फायदेमंद होगी और इसकी पूरी जानकारी देगी।
डिवाइस को बनाने में दो हजार रुपये का खर्च आया है। कॉलेज के हेड ऑफ डिपार्टमेंट मनीष राजपूत ने कहा कि जल संरक्षण के तहत लगातार केंद्र सरकार लोगों से पानी बचाने की अपील करती हैं। गिरता जलस्तर गंभीर समस्या है। ऐसे में पानी को कैसे बचाया जाए इसको लेकर केमिकल इंजीनियरिंग की छात्राओं ने शोध किया है। यह डिवाइस जल संरक्षण के लिए और उपजाऊ फसल के लिए वरदान साबित होगी।
खेतों की सिंचाई के लिए जल की आवश्यकता की जानकारी
यह डिवाइस किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी। पेड़ लगाने वाले व्यक्ति इसे आसानी से खरीद सके, इसके लिए छात्राएं प्रयास कर रही है कि कम से कम रुपयों में इस बेहतर डिवाइस को तैयार किया जाए। शोध करने वाली छात्राओं का दावा है कि इस डिवाइस से खेतों की सिंचाई के लिए कितने जल की आवश्यकता है, उसकी पूरी जानकारी मिल जाएगी। शोध करने वाली छात्रा शिवानी ने बताया कि जल है तो कल है इस सोच को आगे बढ़ाते हुए ‘मेक इन इंडिया’के तहत उनके द्वारा यह डिवाइस बनाई गई है।
Published on:
28 May 2022 05:12 pm
बड़ी खबरें
View Allकानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
