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कानपुर की बेटी के साथ लंदन में पति ने ढाया कहर, जान बचाकर भारत आयी युवती

विवाहिता किसी तरह लंदन से जान बचाकर भारत लौटी। मायके आने के बाद पीडि़ता के परिजनों ने आईजी के सामने मामला रखा।

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Juhi Mishra

Jul 19, 2015

domestic violence

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कानपुर। एनआरआई दूल्हे की चाह में बेटियों को परदेस ब्याहने वाले माता-पिता नहीं समझ पाते कि वहां के माहौल में वह कैसे ढलेगी। एक तो देश नया ऊपर से परिवार के बारे में न के बराबर जानकारी। ऐसे में यदि कोई घटना हो जाए तो मदद के लिए कहां जाएगी बेटी। ऐसा ही वाक्या कानपुर की एक बेटी के साथ हुआ। जिसने आईजी ऑफिस पहुंचकर अपने साथ हुए अत्याचार की कहानी बयां की।

शाहदुलापुर पीएसी रोड में रहने वाली युवती की शादी 24 मई 2014 को नोएडा के युवक से हुई थी। युवती के मुताबिक शादी में पिता ने बीस लाख रुपए, जेवरात और 150 वर्गमीटर का प्लॉट दिया था। उसके बावजूद ससुराल वाले दहेज की मांग को लेकर प्रताडि़त करते थे। कुछ महीनों बाद ही पत्नी को मायके से लाने गए पति ने लंदन जाने के नाम पर दो लाख रुपए की मांग की। वह भी लड़की के पिता ने दे दिए। इसके बाद भी युवती का मानसिक उत्पीडऩ बंद नहीं हुआ। जिसके कारण नवम्बर 2014 में नोएडा के प्रयाग अस्पताल में उसने इलाज कराया। 21 मई 2015 को युवती पति के साथ लंदन चली गई। वहां पर भी प्रताडऩा कम नहीं हुई। उस दौरान पत्नी को यह भी पता चला कि उसके पति ने खुद को अविवाहित बताकर कई मैट्रीमोनियल साइट्स पर प्रोफाइल डाल रखा है और चार- पांच लड़कियों से उसकी बात भी हो रही है। 1 जुलाई को पति ने अपना आखिरी दांव खेला। उसने युवती के साथ मारपीट कर उसे लहूलुहान कर उसे अलमारी के अंदर बंद कर दिया। पांच घंटे बंद रहने के बाद वह किसी तरह से बाहर निकली और वहां की पुलिस को फोन कर बुला लिया।

खास बात यह रही कि लंदन में इसके लिए कानून में कोई सजा का प्रावधान ही नहीं था। ऐसे में विवाहिता किसी तरह वहां से जान बचाकर भारत लौटी। मायके आने के बाद पीडि़ता के परिजनों ने आईजी के सामने मामला रखा। आईजी ने पूरे मामले को सुनने के बाद महिला थाने में पति और अन्य ससुराल वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

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