
कानपुर। हमारे देश में आज भी सैकड़ों साल से चली आ रही परम्मपरा जारी हैं, जिनके खात्में के प्रयास नहीं किए गए। ऐसी ही एक प्रथा काजगंज के नजामपुरगांव में बदस्तूर जारी है, यहां दलित सुमदाय के घर बारात लेकर आने युवकों को विवाह के दौरान सेहरा और घोड़ी में बैठकर आने पर रोक है। इसका खत्मा करने के लिए कानपुर के कई सजाजसेवी सामने आया है। भारतीय दलित पैंथर के अध्यक्ष धनीराव बौद्ध ने बताया कि अलीगढ़ से दूल्हा संजय और कासगंज के निजामपुर से आए दुल्हन के भाई बीटू कुमार ने हमें जानकारी दी है कि गांव के लोगों ने चौपाल के जरिए फरमान सुनाया है कि दुल्हा बिन घोड़ी के आएगा। अगर आप लोगों ने हमारी बात नहीं मानी तो पूरे परिवार का हुक्का पानी बंद कर गांव से भगा दिया जाएगा। जिसके बाद हमने कई लोगों के साथ बैठक की और यह निर्णय लिया कि 20 अप्रेल को 20 अप्रैल को दलित दूल्हा घोड़ी से गांव में घूमेगा। बरात में एक हाथी और 50 घोड़े के साथ ही बरात में बड़ी संख्या में मुस्लिम, दलित, सिख, ईसाई शामिल होंगे।
दूल्हे के घोड़ी पर बैठने में है रोक
देश अपनी आजादी के 71 सान मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 वीं सदी की बात करते हैं तो सीएम योगी सबका साथ और सबकी सुरक्षा का दावा करते हैं। लेकिन आज भी ऐसे हजारों लोग हैं, पुरानी प्रथाओं के चलते गुलामी का जीवन जा रहे हैं। ऐसी ही एक 100 साल पुरानी प्रथा काजगंज के निजामपुर गांव में जारी हैं। यहां एक खास समाज के लोगों का आदेश है कि दलित के घर बारात लेकर आने वाला दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर नहीं आएगा। सिर पर सेहरा दिखने पर बारात गांव के अंदर प्रवेश नहीं कर पाएगी। पर गांव में एक दलित युवक बीटू कुमार इस प्रथा के खिलाफ खड़ा हो गया है। बीटू कुमार ने बताया कि उसकी बहन की शादी 20 अप्रेल को अलीगढ़ के संजय के साथ तय हुई है। लेकिन गांव के लोगों की पुरानी प्रथा के चलते होने वाला बहनोई घोड़ी पर सवार होकर नहीं आ पाएगा। हमने इसका विरोध किया तो गांववालों ने हमें जान से मारने के साथ गांव से बेदखल करने की धमकी दी। इसी के चलते हम कानपुर आए और भारतीय दलित पैंथर पार्टी के अध्यक्ष से मिलकर पूरी बहानी बयां की।
दलित दूल्हा घोड़ी पर सवार होगा
दलित युवक की शिकायत पर भारतीय दलित पैंथर कार्यालय मैकरावर्टगंज में भारतीय अल्पसंख्यक बोर्ड की बैठक हुई, जिसमें फैसला लिया गया कि दलित दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर आएगा और धूम-धाम के साथ बारात पूरे गांव में घूमेगी। अध्यक्ष धनीराव बौद्ध ने कहा कि सौ वर्ष पुरानी परंपरा को तोड़ना है। इसके लिए हमने पूरी तैयारी कर ली है। कानपुर के अलावा आसपास के जिलों से करीब पांच सौ लोगों को बुलाया गया है, जो बरात में जनाति बनकर शामिल होंगे। हम जल्द ही वहां के जिला प्रशासन से बात करेंगे और उनसे शिकायत कर ऐसे अराजकतत्वों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे। भारतीय दलित पैंथर के अध्यक्ष ने कहा कि मोदी और योगी सरकार के आने के बाद दलित और मुस्लिमों के साथ उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ी हैं, जिन्हें रोका जाना चाहिए।
क्यों दलितों को आना पड़ा कानपुर
कासगंज के निजामपुर में सतपाल सिंह की बेटी की बरात 20 अप्रैल को अलीगढ़ से आएगी। दूल्हा संजय ने कहा है कि वह घोड़ी से पूरा गांव घूमेगा जबकि निजामपुर गांव में रिवाज है कि कोई भी दलित दूल्हा गांव में घोड़ी पर नहीं घूमेगा बल्कि तय सीमा में ही रहेगा। इसी के चलते हमने अपने होने वाले ***** के साथ कानपुर आकर धनीराम बौद्ध से मिले और अपनी पीणा उन्हें बताई। वहीं दुल्हन के भाई बीटू कुमार ने आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोगों ने उनके खेतों को पानी देना बंद कर दिया है। उनका कहना है कि पहले डीएम को लिखित पत्र दो कि दूल्हा घोड़ी से गांव में नहीं घूमेगा। बताया, इससे उनके समुदाय के लोगों की 25 बीघा खेती सूख गई है।
जमीअत करेगी 25 घोड़ों की व्यवस्था
जमीअत उलमा के प्रदेश संगठन मंत्री एवं शहरकाजी मौलाना हाफिज अब्दुल कुद्दूस हादी ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की घोषणा को बताते हुए कहा कि 25 घोड़ों व 5000 लोगों के खाने की व्यवस्था जमीअत करेगी। बड़ी संख्या में मुस्लिम इस शादी में शिरकत करेंगे। उधर भारतीय मसीह समाज के महामंत्री पादरी जितेंद्र सिंह ने कहा, इसाई समाज के लोग भी कासगंज पहुंचेंगे। श्री गुरु सिंह सभा के सरदार हरविंदर सिंह ने भी पूरा समर्थन देने की घोषणा की। हाफिज अब्दुल कुद्दूस हादी ने बताया कि हम सभी 19 अप्रेल की शाम को गांव पहुंच जाएंगे और बरातियों का स्वागत जनाती बरकर करेंगे। हमारी गांव वालों से अपील है कि कुरीतियों और पुरानी प्रथा से अपने आप को बाहर लाएं और समाज में हर इंसान को बराबरी से जीने का दर्जा दें।
Published on:
26 Mar 2018 09:47 am

बड़ी खबरें
View Allकानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
