
आर्थिक तंगी और पिता की मौत के बाद भी पावर लिफ्टिंग में फहराया परचम
कानपुर। बुलंद हौसलों की बदौलत लोगों ने मुश्किल हालातों में भी अपनी मंजिल को हासिल किया। इस बात को शहर की बेटी ने फिर सच कर दिखाया है। पिता को खोने के बाद आर्थिक तंगी की चुनौती से जूझकर उसने अपने सपनों को सच कर दिखाया। ये हैं शहर नाम रोशन करने वाली खुशी यादव।
संघर्षों भरा जीवन
खुशी का जीवन आसान नहीं बीता। खुशी जब छोटी थी तभी उसके पिता की एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। जिसके बाद खुशी के परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। पर खुशी ने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य ध्यान दिया। पिता गम भुलाकर खुशी ने पॉवरलिफ्टिंग की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और पदक भी जीता।
ओलंपिक जीतना लक्ष्य
बिठूर के एक छोटे से गांव रमेल नगर की रहने वाली खुशी यादव गौरव मेमोरियल इंटरनेशनल में कक्षा 11 की छात्रा हैं। पढ़ाई में श्रेष्ठ होने के साथ-साथ वह खेल में नाम रोशन कर रही हैं। खुशी ने अब तक चार बार स्ट्रांग वूमेन ऑफ द उत्तर प्रदेश का खिताब अपने नाम किया है। बिठूर के छोटे से गांव रमेल नगर की बेटी ने बुलंद हौसले व पक्के इरादे के बूते कठिन लक्ष्य को आसान किया। अब देश के लिए ओलंपिक में पदक जीतना उनका लक्ष्य है।
परिवार को दिया श्रेय
खुशी मानती हैं कि उनके सपनों को पूरा करने में उनके परिवार ने भरपूर साथ दिया। आज वे जो मेडल जीत पाई हैं, उसका पूरा श्रेय परिवार को जाता है। मां आशा देवी और चाचा अमित यादव ने हर प्रतियोगिता के लिए खुशी को अभ्यास कराया। स्कूल की डायरेक्टर व कोच से फ्री क्लास मिली। जिसके चलते खुशी ने स्टेट लेवल पर परचम लहराया।
जीतीं ये प्रतियोगिताएं
खुशी ने 27 से 30 दिसम्बर 2017 में जमशेदपुर में जूनियर, सबजूनियर पावरलिफ्टिंग में प्रथम स्थान पाया। 16 से 19 मार्च 2018 में नागपुर में सबजूनियर पावरलिफ्टिंग में द्वितीय स्थान पर रहीं। 29 से 31 मई 2018 को कानपुर में जूनियर पावरलिफ्टिंग चैम्पियनशिप में दूसरा स्थान रहा। 6 से 9 जून 2019 जमशेदपुर में हुई सबजूनियर पावरलिफ्टिंग में तृतीय स्थान अपने नाम किया। 6 से 10 अगस्त 2019 हिमाचल प्रदेश में हुई सीनियर नेशनल पावरलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक जीता।
Published on:
13 Aug 2019 12:11 pm
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