
राजा सहस्रबाहु ने यहां की थी परशुराम के पिता की हत्या, इस स्थल की है पौराणिक दास्तां
कानपुर देहात-जनपद कानपुर देहात की धरती पर कई त्रेता व द्वापर युग से जुड़े पौराणिक मंदिर स्थापित हैं। जिनके पीछे की मान्यताओं से लोग आज भी अनभिज्ञ हैं। जिसके चलते ऐसे धार्मिक स्थलों व मंदिरों को वास्तविक मान्यता नहीं मिल सकी है। ऐसा ही एक धार्मिक स्थल कानपुर देहात के रसूलाबाद क्षेत्र के जंतरखेड़ा में स्थित है, जो आज एक टीले के रूप में तब्दील हो चुका है। यहां एक बहुत सुंदर आश्रम हुआ करता था। बताया जाता है कि पौराणिक मान्यताओं के आधार पर यहां कभी जमदग्नि ऋषि अपनी पत्नी रेणुका व अपने शिष्यों के साथ रहा करते थे। इसी स्थान पर माता रेणुका ने अपने पुत्रों को जन्म दिया था। इन पुत्रों में परशुराम का भी जन्म हुआ था, जिन्हें लोगों द्वारा भगवान का दर्जा दिया गया है।
यहां ठहरा था राजा सहस्रबाहु
परशुराम बहुत बड़े पित्र भक्त के साथ अपराजेय हुए और दुष्टों के साथ अहंकारी राजाओं का भी मान मर्दन किया। इस आश्रम के बगल में उस समय कौषिक नाम की गंगा नदी की दूध जैसी जलधारा प्रवाहित होती थी। ऋषि के भोजन व्यवस्था के लिए कामधेनु नाम की गाय भी थी, जो समुद्र मंथन के समय निकली थी, वह ऋषि जमदग्नि जी को सौप दी गई थी। शास्त्रों के अनुसार सब ठीक ठाक चल रहा था। उसी समय सहस्राबाहु अर्जुन नाम का राजा एक बार शिकार खेलते हुए इसी आश्रम में ऋषि की अनुमति से रात्रि विश्राम के लिए अपनी सेना समेत ठहर गया था। जिसके भोजन का इन्तजाम करने के लिए ऋषि ने कामधेनु गौमाता से निवेदन किया तो सारी व्यवस्था हो गई।
राजा ने कर दी थी ऋषि की हत्या
यह सारा नजारा सहस्राबाहु देखता रहा और सुबह चलते समय कामधेनु गाय मांगने लगा। ऋषि के मना करने पर सहस्राबाहु ने आक्रमण कर ऋषि की हत्या कर दी और सुंदर सी बगिया को तहस नहस कर दिया। फिर जब वह गाय को लेने के लिए गया तो वह अदृश्य हो गई। यह दृश्य देख माता रेणुका ने अपने बेटे को याद करते हुए अपने सीने में 21 मुष्टिकाओं से प्रहार किया। महेंद्राचल पर्वत पर तप कर रहे परशुरामजी को आभास होते ही वह अपने आश्रम में आये तो सारा दृश्य देख माता रेणुका से पूँछा। बताने पर क्रोधित हुए परशुराम ने 21 बार ही इस पृथ्वी से सहस्राबाहु अर्जुन के साथ अहंकारी राजाओं का सफाया किया।
आज भी अपेक्षा का शिकार यह स्थल
काल कालान्तर बीत जाने के बाद भी आज उसी स्थान पर एक मंदिर व भगवान परशुराम जी का मंदिर व जमदग्नि ऋषि जी की प्रतिमा लगी हुई है। परशुराम जयंती पर दूर दराज से लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लोगों का कहना है कि शिवरात्रि के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन होता है। मगर आज भी यह स्थल जिम्मेदारों की अपेक्षा का शिकार है। जबकि जोत के सुंदरलाल पांडेय के पुत्र सुधीर पांडेय ने क्षमतानुसार कुछ कार्य करवा दिया था।
Published on:
10 Aug 2020 07:01 pm
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