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300 साल पुरानी है मंदिर में अनोखी प्रथा, मन्नत पूरी होने पर भक्त चढ़ाते हैं ताला

पूरे देश में शरदीय नवरात्र का पर्व बड़े धूमघाम के साथ मनाया जा रहा है।

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कानपुर. पूरे देश में शरदीय नवरात्र का पर्व बड़े धूमघाम के साथ मनाया जा रहा है। भक्त मां के दरबार में भोर पहर से पहुंचना शुरू कर देने हैं और उनके चरणों में फल-मेवा का प्रसाद चढ़ाकर मन्नत मांगते हैं। लेकिन कानपुर के बंगाली मोहाल स्थित एक तीन सौ साल पुराना एतिहासिक मां काली का मंदिर है, यहां भक्त मातारानी के चरणों में ताला चढ़ाते हैं। मंदिर के पुजारी रविंद्र नाथ बनर्जी के मुताबिक नवरात्र में भक्त मां के दरबार में आकर हाजिरी लगाते हैं मन्नत के नाम पर ताला लगाते हैं। मातारानी की कृपा से उनकी मुराद पूरी हो जाती है तो वो अगले साल आकर ताला खोल लेते हैं। पुजारी ने बताया कि ये प्रथा लगातार तीन सौ साल से जारी है।


मन्नत पूरी होने पर खोल ले जाते हैं ताले


300 वर्ष पुराने इस मां काली के मंदिर में नवरात्र के अवसर पर प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में भक्त मां के दर्शनों के लिए आते हैं। कहा जाता है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा से मां के मंदिर में ताला बांध कर मनोकामना मांगता है वह अवश्य पूर्ण होती है। आमतौर पर यहां लोहे के ताले लगाए जाते हैं, लेकिन कुछ भक्त मां के चरणों में सोने, चांदी और अन्य धातुओं से निर्मित ताले लगाते हैं। मंदिर में ताला लगाने से पूर्व ताले का पूर्ण विधि विधान से पूजन करना पड़ता है।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि मनोकामना पूरी होने के बाद भक्त वापस मंदिर आता है। भक्त दोबारा अपने स्वयं द्वारा बांधे गए ताले की पूजा करता है। इसके बाद वह चाभी से ताला खोल देता है। यहां कई बार यह भी देखने को मिलता है कि भक्तों को ताला खोलने में दिक्कत होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि धीरे-धीरे यहां तालों की तादाद बहुत बढ़ जाती है।


ऐसे मां काली का नाम ताला वाली माता पड़ा


मान्यता है कि सदियों पहले एक महिला भक्त बहुत परेशान थी। वह हर दिन मां काली के मंदिर में दर्शन करने के लिए आती थी। कुछ दिनों बाद वह महिला मंदिर के प्रांगण में ताला लगाने लगी तो पुरोहित ने इस बारे में उससे सवाल किया। महिला ने जवाब दिया कि उसके सपनों में मां काली आई थीं और उसे ऐसा करने के लिए कहा था। मां ने यह भी कहा था कि ऐसा करने से इच्छा जरूर पूरी हो जाएगी। वहीं, कुछ दिनों बाद स्वतः मंदिर की दीवार पर लिखा पाया गया कि तुम्हारी मनोकामना पूरी हो गई है। इसके बाद से ही वह महिला भी कभी नहीं दिखी और उसके द्वारा लगाया हुआ ताला भी गायब हो गया। जाते हैं। मंदिर में अधिक ताले होने पर जिन भक्तों को अपना लगाया ताला नहीं मिलता वे ताले की चाबी मां काली के चरणों में अर्पित करके चले जाते हैं।


बहन की शादी होने के बाद चढ़ाया ताला


जहानाबाद के बाजपेयी गली निवासी अशोक निगम ने बताया कि वो अपनी इकलौती बहन के विवाह के लिए तीन साल से परेशान थे। वर मिलता तो कुंडली नहीं मिलती। कभी कुंडली मिल जाती तो लड़के वाले हमारे घर में रिश्ता करने से इंकार कर देते। हम चैत्र की नवरात्र में मां के दरबार में आए और ताला अर्पित कर बहन के लिए अच्छा वर मिले इसके लिए मन्नत मांगी। दो माह बीत नहीं पाए कि बहन के लिए रिश्ता मिल गया और धूमधाम के साथ उसका विवाह हो गया। वहीं आर्यनगर निवासी महेंद्र ने बताया कि वो मां के दर पर आते हैं और उनके चरणों में ताला चढ़ाते हैं। जब से मातारानी के यहां आकर हाजिरी लगाई तब से रोजगार में बढ़ोतरी हुई। मंदिर के पुजारी ने बताया कि कई मंत्री और विधायक हां आते हैं और मां को ताला अर्पित कर मन्नत मांगते हैं।

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