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लश्कर भी तुम्हारा है,सरदार भी तुम्हारा है,झूठ को भी सच लिख दो,अखबार तुम्हारा है -डॉ.कुमार विश्वास

Dr. Kumar Vishwas : कानपुर देहात महोत्सव में कवि सम्मेलन के दौरान डॉ कुमार विश्वास ने अखबारों पर व्यंग्य किया।बोले लश्कर भी तुम्हारा है सरदार भी तुम्हारा है झूठ को भी सच लिख दो।अखबार तुम्हारा है।  

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लश्कर भी तुम्हारा है,सरदार भी तुम्हारा है,झूठ को भी सच लिख दो,अखबार तुम्हारा है -डॉ.कुमार विश्वास

लश्कर भी तुम्हारा है,सरदार भी तुम्हारा है,झूठ को भी सच लिख दो,अखबार तुम्हारा है -डॉ.कुमार विश्वास

कानपुर देहात के इको पार्क में कानपुर देहात महोत्सव के चौथे दिन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।कवि सम्मेलन में शिरकत करने के लिए डॉ.कुमार विश्वास पहुंचे।डॉ कुमार विश्वास ने कवि सम्मेलन की शुरुआत करते हुए उन्होंने पत्रकारों व अखबारों पर व्यंग्य करते हुए कहा कि पांडाल में पत्रकार मित्र भी बैठे हैं उनका बहुत स्वागत है।कुछ भी हो नेहा जी पत्रकारों को प्रसन्न रखना।क्योंकि प्रदेश को और मुख्यमंत्री जी को इनके ही माध्यम से पता चलेगा कि कार्यक्रम कैसा रहा।हमें चाय मत पिलाना इन्हें जरूर पिलाना।अगर यह नाराज हो गए तो कल अखबारों में लिखा होगा "न जम पाया कार्यक्रम रंग,रहा फीका"।अगर यह प्रशन है तो लिखा होगा "खूब जमे कुमार,छाया कविताओं का जादू"।उसके बाद अखबारों पर व्यंग्य करते हुए कहाकि लश्कर भी तुम्हारा है,सरदार भी तुम्हारा है, झूठ को भी सच लिख दो,अखबार तुम्हारा है।

मैं भी बेटों की तरह जीने का हक मांगती हूं

डॉ कुमार विश्वास ने बेटियों को लेकर कविता पढ़ते हुए कहा कि 'दिल के बहलाने का सामान न समझा जाए।मुझको भी अब इतना आसान न समझा जाए।मैं भी बेटों की तरह जीने का हक मांगती हूं।इसको गद्दारी का एलान न समझा जाए।अब तो बेटे भी हो जाते हैं घर से रुकसत।सिर्फ बेटी को ही घर का मेहमान न समझा जाए।इन पंक्तियों को सुनकर पंडाल में मौजूद दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजा डॉ.कुमार विश्वास का उत्साहवर्धन किया।

ये संबंधों की तुरपाई है षड्यंत्रों से मत खोलो

डॉ कुमार विश्वास ने अपने कुछ पुराने दोस्तों पर भी व्यंग्य किया।बोले 'पुरानी दोस्ती को इस नई ताकत से मत तोलो,ये संबंधों की तुरपाई है।षड्यंत्रों से मत खोलो,मेरे लहजे की छेनी से गढ़े कुछ देवता तो कल,मेरे शब्दों में मरते थे।वो कहते हैं मत बोलो'।यह सुनते ही मंच के पंडाल में मौजूद दर्शकों ने जमकर तालियां बजाई।

बंद हो जाएगी मेरी दुकान

डॉ कुमार विश्वास ने मंच से अधिकारियों पर भी व्यंग्य किया।उन्होंने कहा कि महोत्सव में ऐसा बहुत कुछ हुआ है।जिसके चलते डर लगने लगा है।उन्होंने सीधे तौर पर नाम लेते हुए कहा सौम्या जी कथक कर रही हैं।तो वही कानपुर देहात थीम सांग लिखने वाले ट्रेजरी अफसर आप कविता लिख रहे हैं।इस तरह से करेंगे तो मेरी दुकान बंद हो जाएगी।यह सुन मंच के नीचे मौजूद अधिकारी व दर्शक जमकर मुस्कुरा उठे और पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।