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जंगल में निकली भगवान विष्णु की मूर्ति, दर्शन के लिए हजारों भक्त उमड़े

 नौबस्ता से पांच किमी की दूरी पर स्थित पुरवा गांव के बीहड़ स्थित खेत की जुताई के दौरान में पांच फिट की भगवान विष्णु की मूर्ति जमीन से निकली।

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Akansha Singh

Sep 15, 2016

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कानपुर। नौबस्ता से पांच किमी की दूरी पर स्थित पुरवा गांव के बीहड़ स्थित खेत की जुताई के दौरान में पांच फिट की भगवान विष्णु की मूर्ति जमीन से निकली। गांव वालों को जैसे ही इसकी जानकारी हुई तो बीहड़ में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। बात आसपास के गांव और शहर तक पहुंची तो वहां लोगों का तांता लग गया। देर रात तक भक्तों का बीहड़ में जमावड़ा लगा रहा। गांव की महिलाओं ने ढो़लक, मंजीरे की थाप पर भजन गाना शुरू कर दिया। वहीं खेत के मालिक ने मूर्ति की स्थापना के लिए पांच सौ गज जमीन दान देदी है। लगभग पांच फिट मूर्ति की स्थापना कर ग्रामीण भव्य मंदिर बनवाने की बात कह रहे हैं।


5 फिट की है भगवान विष्णु की मूर्ति
नौबस्ता थाना क्षेत्र स्थित सकरा रोड भूरे पुरवा गांव में रहने वाले होरीलाल राजपूत की गांव के बाहर तीन बीघे खेत हैं। वह खेतों में मेड़ बनवा रहे थे जिसके लिए खेतों के चारों तरफ खुदाई करा रहे थे। खुदाई के दौरान सियाराम को एक पत्थर दिखाई दिया जब उसको और खोदा तो उसे मूर्ति दिखाई देने लगी। इसकी सूचना उसने होरीलाल व उनके बेटे रणविजय को दी। सभी ने मिलकर मूर्ति को बाहर निकाला तो वह पांच फिट की मूर्ति देख सभी हैरान हो गए और यह मूर्ति भगवान विष्णू की थी। यह बात पूरे गांव में आग की तरह फ़ैल गई हजारों की संख्या में ग्रामीण मूर्ति को देखने के पहुंच गए।



हजारों साल पुरानी है मूर्ति
होरीलाल ने बताया कि जब खेत से मूर्ति निकाली गई तो देखने से साफ़ स्पष्ट हो रहा कि यह हजारों साल पुरानी प्रतिमा है।मूर्ति की नक्काशी इस प्रकार है जैसे सतयुग के मंदिरों व मूर्तियों में होती है। उन्होंने बताया कि मूर्ति को निकाल कर पानी से धुल कर रखा गया है, लेकिन जैसे ही ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई तो वह बड़ी संख्या में आ गए। ग्रामीणों ने फूल,फल व प्रसाद चढ़ाकर पूजा अर्चना शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि विष्णू भगवान की प्रतिमा को स्थापित कराने के लिए हम पांच सौ गज जमीन दे रहे है। जहां पर मंदिर का भव्य निर्माण कराया जाएगा जिसमें पूरा गांव सहयोग करेगा।



200 साल पहले निकली थी लक्ष्मी की मूर्ति
ग्रामीण अजय सिंह के मुताबिक जिस स्थान पर यह प्रतिमा निकली है उसी बीहड़ देवी के नाम से जाना जाता है। यहां पर दो सौ साल पहले सबसे पहले लक्ष्मी जी की छोटी सी प्रतिमा निकली थी, जिसे एक चबूतरे में रख दिया गया और गांव के लोग पूजा करने आते हैं। इसके साथ ही जब भी खेतों की खुदाई होती थी छोटी-छोटी मुर्तियां निकलती रहती थी। जिसके बाद से इस इलाके को बीहड़ देवी के नाम से जाना जाने लगा था लेकिन यह भगवान विष्णू की सबसे बड़ी प्रतिमा निकली है।